2025 में रुपया 3.54% गिरा, बनी एशिया की दूसरी सबसे कमजोर करेंसी

2025 में रुपया 3.54% गिरा, बनी एशिया की दूसरी सबसे कमजोर करेंसी

भारतीय रुपया इस साल 3.54% गिर चुका है, जिससे यह एशिया की दूसरी सबसे कमजोर करेंसी बन गया है। डॉलर की मजबूती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

Dollar vs Rupee: भारतीय रुपया इस साल अब तक 3.54% तक गिर चुका है। यह एशिया की दूसरी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गई है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार दबाव में है, जिसकी मुख्य वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव मानी जा रही है।

आज भी कमजोर हुआ रुपया

बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 15 पैसे फिसलकर 88.65 प्रति डॉलर पर आ गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में यह 88.61 पर खुला और जल्द ही 88.65 तक पहुंच गया। मंगलवार को रुपया 88.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि यूएस-इंडिया ट्रेड डील की उम्मीदों ने कुछ सपोर्ट तो दिया, लेकिन डॉलर की मजबूती ने दबाव बनाए रखा।

डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति बताता है, 0.06% बढ़कर 99.50 पर पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि डॉलर मजबूत हो रहा है और उभरते बाजारों की मुद्राएं, जिनमें रुपया भी शामिल है, दबाव में हैं।

विशेषज्ञों की राय

मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि मंगलवार को रुपये में जो हल्की तेजी आई थी, उसका कारण ग्लोबल मार्केट में जोखिम उठाने की प्रवृत्ति बढ़ना और डॉलर की कमजोरी थी। अमेरिकी सरकार के शटडाउन खत्म होने की उम्मीदों ने बाजार का मूड सुधारा है, जिससे करेंसी में हल्की राहत दिखी।

अनुज चौधरी का मानना है कि आने वाले सत्रों में अगर वैश्विक बाजार सकारात्मक रहते हैं और डॉलर कमजोर होता है, तो रुपया कुछ सुधार दिखा सकता है। हालांकि, क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और आयातकों की डॉलर मांग रुपये की बढ़त को सीमित कर सकती हैं। वहीं, HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने बताया कि हाल की मजबूती का एक बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान हैं, जिन्होंने बाजार में थोड़ी स्थिरता दी।

शेयर बाजार में तेजी से बना भरोसा

रुपये की कमजोरी के बावजूद शेयर बाजार में तेजी देखी गई। अमेरिकी सरकार के शटडाउन खत्म होने की उम्मीदों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। बुधवार को सेंसेक्स 502.82 अंक की छलांग लगाकर 84,374.14 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 में 144.05 अंकों की बढ़त के साथ 25,839 पर कारोबार हुआ।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.26% घटकर 65 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मंगलवार को ₹803 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ा।

रुपये पर दबाव क्यों बढ़ा

रुपये की कमजोरी कई कारकों के कारण देखी जा रही है। सबसे पहला कारण है अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती। जैसे-जैसे डॉलर इंडेक्स ऊपर जा रहा है, उभरते बाजारों की करेंसियों पर दबाव बन रहा है। दूसरा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली है, जिन्होंने हाल में भारतीय इक्विटी से निकासी बढ़ाई है।

इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी रुपये की गिरावट में योगदान दे रहे हैं। भारत आयात-आधारित अर्थव्यवस्था है, इसलिए क्रूड की ऊंची कीमतें सीधे करेंसी पर असर डालती हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल रुपया दबाव में रहेगा, लेकिन आने वाले हफ्तों में कुछ स्थिरता लौट सकती है। यूएस-इंडिया ट्रेड डील की प्रगति और घरेलू शेयर बाजार की मजबूती रुपये को सपोर्ट दे सकती है। अगर डॉलर इंडेक्स में गिरावट आती है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली घटती है, तो रुपया 88 के स्तर से नीचे भी जा सकता है।

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