ब्रिटिश रॉयल मरीन कमांडो ने इंग्लिश चैनल में रूस के शैडो फ्लीट ऑयल टैंकर को इंटरसेप्ट कर बोर्ड किया। छह घंटे चले इस ऑपरेशन में RAF और NCA ने भी सहयोग किया। टैंकर को जांच के लिए निगरानी में रखा गया है।
मास्को/लंदन: रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े प्रतिबंधों के बीच ब्रिटेन ने रविवार को एक ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। रॉयल मरीन्स कमांडोज़ ने इंग्लिश चैनल में एक रूसी ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े तेल टैंकर को इंटरसेप्ट कर उस पर बोर्डिंग की। यह पहली बार है जब ब्रिटिश सशस्त्र बलों ने इस तरह की सीधी समुद्री कार्रवाई की है।
यह ऑपरेशन लगभग छह घंटे तक चला और इसमें रॉयल मरीन्स के साथ नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) के अधिकारी और रॉयल एयर फोर्स (RAF) का समर्थन शामिल था। जहाज को अब दक्षिण इंग्लैंड के तट के पास निगरानी में रखा गया है।
क्या है ‘शैडो फ्लीट’ और क्यों है विवाद?
रूस पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद क्रेमलिन पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए कई देशों ने तेल निर्यात पर सख्ती की है। इसके जवाब में रूस पर आरोप है कि वह एक “शैडो फ्लीट” यानी छिपे हुए टैंकरों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे वह प्रतिबंधों से बचकर तेल का निर्यात जारी रख सके।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह शैडो फ्लीट 700 से अधिक जहाजों का नेटवर्क है, जो रूस के प्रतिबंधित तेल का लगभग 75% हिस्सा ढोने में भूमिका निभाता है।
ऑपरेशन कैसे हुआ: हेलीकॉप्टर से फास्ट-रोपिंग के जरिए बोर्डिंग
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि रॉयल मरीन्स कमांडो हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे जहाज पर उतरते हैं। यह बेहद हाई-रिस्क ऑपरेशन था, जिसमें समुद्र में चलते जहाज पर सशस्त्र सैनिकों ने नियंत्रण हासिल किया।
इसके बाद कमांडो ने जहाज के विभिन्न हिस्सों की तलाशी ली, जबकि NCA अधिकारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स की जांच करते रहे। पूरे ऑपरेशन के दौरान RAF का P-8 निगरानी विमान भी तैनात रहा, साथ ही HMS Sutherland और HMS Ledbury जैसे नौसैनिक जहाज भी शामिल थे।
जहाज “Smyrtos” को लिया गया नियंत्रण में
जिस टैंकर को रोका गया, उसकी पहचान “Smyrtos” के रूप में हुई है। यह जहाज कैमरून के झंडे के तहत चल रहा था और इसे यूके के दक्षिणी तट के पास वेमाउथ के नजदीक एंकर किया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जहाज 5 जून को रूस के Ust-Luga पोर्ट से निकला था और बाद में इंग्लिश चैनल की ओर बढ़ा। जांच में यह भी सामने आया है कि जहाज ने हाल के महीनों में अपना नाम और फ्लैग कई बार बदला था, जिससे इसकी गतिविधियों पर संदेह और बढ़ गया।

ब्रिटेन का कड़ा संदेश: प्रतिबंधों से बचना आसान नहीं
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने इस ऑपरेशन को रूस के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक सफलता बताया। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई उन नेटवर्कों को संदेश देती है जो रूस के तेल व्यापार को प्रतिबंधों के बावजूद जारी रखने में मदद करते हैं।
ब्रिटेन ने अब तक रूस से जुड़े 500 से अधिक जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत ऐसे जहाजों को ब्रिटिश बंदरगाहों में प्रवेश की अनुमति नहीं है और न ही उन्हें बीमा, वित्तीय सेवाएं या ब्रोकरेज सुविधाएं दी जा सकती हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: समर्थन और आलोचना दोनों
इस कार्रवाई पर ब्रिटेन के भीतर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऑपरेशन यूक्रेन युद्ध को वित्तीय रूप से कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ब्रिटेन का धन्यवाद करते हुए कहा कि यूरोप को अब कानूनी रूप से ऐसे जहाजों को रोकने के साथ-साथ उनके तेल को जब्त करने पर भी विचार करना चाहिए।
ब्रिटेन की विपक्षी नेता ने भी इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि यह “बहादुर सैन्य बलों का महत्वपूर्ण ऑपरेशन” है और यूक्रेन के साथ एकजुटता का संकेत है।
रक्षा मंत्रालय की रणनीति और भविष्य की कार्रवाई
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह ऑपरेशन सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत रूस की तेल आय को कम करने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि रूस की युद्ध मशीनरी को कमजोर करने के लिए उसकी ऊर्जा आय को रोकना सबसे प्रभावी तरीका है।
रक्षा राज्य मंत्री ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में ऐसे और ऑपरेशंस किए जा सकते हैं, यदि ऐसे जहाज ब्रिटिश जल क्षेत्र से गुजरते पाए जाते हैं।
जहाज की गतिविधियों पर जांच जारी
जांच एजेंसियों के अनुसार, जहाज “Smyrtos” ने अपने रूट और पहचान में कई बदलाव किए हैं। इससे यह संदेह और मजबूत हुआ है कि यह प्रतिबंधों से बचने के लिए जानबूझकर अपनी पहचान बदल रहा था।
जहाज की यात्रा रूस के तेल टर्मिनल से शुरू होकर इंग्लिश चैनल तक पहुंची, जहां इसे ब्रिटिश बलों ने रोक लिया।
फ्रांस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस ऑपरेशन में फ्रांस के साथ भी समन्वय किया गया था। दोनों देशों ने हाल के महीनों में समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंध प्रवर्तन को लेकर सहयोग बढ़ाया है।
फ्रांस पहले भी रूस से जुड़े एक अन्य तेल टैंकर को रोकने की कार्रवाई में शामिल रहा है, जिससे यूरोपीय देशों की संयुक्त रणनीति मजबूत होती दिख रही है।
यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा प्रतिबंधों पर असर
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों की रणनीति ऊर्जा प्रतिबंधों पर केंद्रित है। रूस की तेल बिक्री उसकी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और पश्चिमी देश इसे सीमित करने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समुद्री कार्रवाइयां भविष्य में और बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा व्यापार और सुरक्षा नीति पर भी प्रभाव पड़ेगा।










