स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी SAIL के कर्मचारियों के वार्षिक बोनस को लेकर होने वाली अहम बैठक से निर्वाचित यूनियन नेताओं को बाहर रखे जाने का मामला अब चर्चा में है। एक अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाली बोनस बैठक में कंपनी प्रबंधन के साथ एनजेसीएस से जुड़े इंटक, एटक, सीटू, बीएमएस और एचएमएस के प्रतिनिधि शामिल होंगे। लेकिन जिन प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाया गया है, उनमें किसी के भी निर्वाचित सदस्य होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस स्थिति ने सेल की अलग-अलग इकाइयों में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष पैदा किया है।
बोनस की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सेल के करीब 52 हजार स्थायी और प्रशिक्षु कर्मचारियों के बोनस पर इसी बैठक में अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है। इससे पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक प्रबंधन और एनजेसीएस नेताओं के बीच एक अक्टूबर को बोनस की देय राशि पर चर्चा होनी है और फैसला होने के बाद पांच अक्टूबर तक कर्मचारियों के बैंक खातों में भुगतान किए जाने की संभावना है। पिछले वर्ष स्थायी कर्मचारियों को 29,500 रुपये और प्रशिक्षु कर्मियों को 23,600 रुपये बोनस मिला था। इस वर्ष मौजूदा बोनस फार्मूले के आधार पर करीब 29 से 30 हजार रुपये की राशि का अनुमान लगाया गया है, हालांकि अंतिम रकम बैठक में तय होगी।
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार बोनस बैठक में इंटक की ओर से डॉ. जी. संजीवा रेड्डी और बीएन चौबे, एटक की ओर से वीएस गिरी, डी. आदिनारायण और रामाश्रय सिंह, सीटू की ओर से तपन सेन और ललित मोहन मिश्रा, एचएमएस की ओर से संजय बढ़ावकर, राजेंद्र सिंह और रक्षित सिंह तथा बीएमएस की ओर से जगदेश्वर राव और रंजय कुमार सिंह को प्रतिनिधित्व के लिए आमंत्रित किया गया है। इन नामों को लेकर विवाद इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि सेल की कुछ इकाइयों में कर्मचारियों द्वारा चुने गए यूनियन प्रतिनिधि इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं होंगे।
निर्वाचित प्रतिनिधियों को बैठक से बाहर रखने पर बोकारो अनधिशासी कर्मचारी संघ यानी बीएकेएस के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर कुमार ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हो रही है तो जमीनी स्तर पर कर्मचारियों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने प्रबंधन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचित नेता बाहर रहकर केवल बैठक के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ये आरोप यूनियन नेता की ओर से लगाए गए हैं और इस मामले में प्रबंधन का विस्तृत पक्ष संबंधित रिपोर्ट में सामने नहीं आया है।
दरअसल, सेल की कई बड़ी इकाइयों में लंबे समय से यूनियन चुनाव नहीं होने का मुद्दा भी इस विवाद से जुड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बोकारो, भिलाई, एएसपी दुर्गापुर, डीएसपी दुर्गापुर और सीएफपी चंद्रपुर जैसे संयंत्रों में कई दशकों से यूनियन चुनाव नहीं हुए हैं। वहीं सेल की माइंस, एसआरयू और सीएमओ जैसी इकाइयों में मान्यता प्राप्त यूनियनों के एनजेसीएस में प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बोनस जैसे सीधे कर्मचारियों के आर्थिक हित से जुड़े मुद्दे पर कौन प्रतिनिधित्व करेगा, इसे लेकर श्रमिक संगठनों के बीच मतभेद दिखाई दे रहा है।
विवाद का दूसरा पहलू बोनस फार्मूला भी है। सेल कर्मचारियों के बोनस के लिए वर्तमान फार्मूले के आधार पर इस साल राशि की गणना की गई है। इससे पहले रिपोर्ट में बताया गया था कि 2023 में सेल प्रबंधन और एनजेसीएस नेताओं के बीच हुए समझौते के आधार पर मौजूदा फार्मूले को लागू किया जा रहा है और इसकी अवधि इस वर्ष समाप्त होने वाली है। एक अक्टूबर की बैठक में इसी आधार पर तैयार राशि को यूनियन नेताओं के सामने रखा जाना है। हालांकि यूनियन की ओर से राशि बढ़ाने की मांग रखे जाने की संभावना भी जताई गई है।
बोनस को लेकर कर्मचारियों की दिलचस्पी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल दुर्गापूजा से पहले इसकी घोषणा और भुगतान पर विशेष ध्यान रहता है। इस वर्ष भी त्योहारों से पहले बोनस मिलने की उम्मीद है। दो अक्टूबर को गांधी जयंती का अवकाश और इसके बाद शनिवार-रविवार की छुट्टी होने के कारण एक अक्टूबर की बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रबंधन इसी बैठक में बोनस की राशि पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश करेगा।
इस बीच स्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ सेल के ठेका श्रमिकों के बोनस को लेकर भी फैसला हो चुका है। सेल बोर्ड ने ठेका श्रमिकों को उनके वार्षिक मूल वेतन का 8.33 प्रतिशत बोनस देने को मंजूरी दी है। इसका लाभ बोकारो सहित सेल की विभिन्न इकाइयों में काम करने वाले करीब 80 हजार ठेका श्रमिकों को मिलने की बात कही गई है। इसके लिए पात्रता उन ठेका श्रमिकों की है जिनका मासिक वेतन 21 हजार रुपये से कम है। ठेका श्रमिकों को दुर्गापूजा से पहले बोनस भुगतान किया जाना है।
स्थायी और प्रशिक्षु कर्मचारियों के मामले में अब सबकी नजर एक अक्टूबर को होने वाली बैठक पर है। कर्मचारियों के लिए बोनस सिर्फ त्योहार के समय मिलने वाली अतिरिक्त राशि नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के घरेलू बजट से जुड़ा महत्वपूर्ण भुगतान भी है। इसलिए बोनस की राशि, भुगतान की तारीख और इसे तय करने वाली प्रक्रिया को लेकर कर्मचारियों और यूनियन प्रतिनिधियों की नजर बैठक पर बनी हुई है। पिछले साल स्थायी कर्मचारियों को 29,500 रुपये बोनस मिलने के बाद इस बार भी कर्मचारी उससे अधिक या कम से कम उसके आसपास राशि मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि अंतिम फैसला प्रबंधन और एनजेसीएस के बीच होने वाली बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।
निर्वाचित यूनियन नेताओं को बैठक में शामिल नहीं किए जाने का मुद्दा ऐसे समय उठा है जब सेल की विभिन्न इकाइयों में कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व को लेकर पहले से ही अलग-अलग संगठन अपनी बात रखते रहे हैं। एक तरफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि बोनस वार्ता में हिस्सा लेंगे, वहीं दूसरी तरफ कुछ निर्वाचित प्रतिनिधियों के बाहर रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। श्रमिक नेताओं का कहना है कि बोनस का फैसला कर्मचारियों के आर्थिक हित से जुड़ा है, इसलिए प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए। वहीं बैठक में शामिल होने वाले संगठनों की भूमिका एनजेसीएस व्यवस्था के तहत है। इस पूरी प्रक्रिया का वास्तविक परिणाम एक अक्टूबर की बैठक के बाद ही सामने आएगा।
बोनस बैठक में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों के सामने कर्मचारियों की ओर से बोनस फार्मूले में बदलाव और राशि बढ़ाने की मांग रखे जाने की संभावना है। पहले भी यूनियन नेताओं ने कहा है कि कंपनी की आय, व्यय और प्रदर्शन को देखते हुए बोनस की राशि पर चर्चा की जाएगी तथा मौजूदा फार्मूले में बदलाव की कोशिश की जाएगी। हालांकि अभी तक अंतिम बोनस राशि घोषित नहीं हुई है। इसलिए करीब 29 से 30 हजार रुपये की संभावित राशि को अंतिम भुगतान नहीं माना जा सकता।
बोकारो समेत सेल की दूसरी इकाइयों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अब एक अक्टूबर की बैठक सबसे महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। बैठक में प्रबंधन और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि इस साल स्थायी और प्रशिक्षु कर्मचारियों को कितना बोनस मिलेगा। इसके साथ ही निर्वाचित यूनियन नेताओं को बैठक से बाहर रखने को लेकर उठे सवालों पर आगे कोई बातचीत या प्रक्रिया होती है या नहीं, यह भी कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों की नजर में रहेगा। फिलहाल कर्मचारियों की उम्मीद बोनस की घोषणा पर टिकी है, जबकि यूनियन प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद ने इस वार्ता को और महत्वपूर्ण बना दिया है।












