S. Jaishankar बुधवार को यूरोपीय संघ (ईयू) के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में शामिल होने के लिए साइप्रस पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर अपनी यात्रा की जानकारी दी।
World News: भारत की वैश्विक कूटनीति को एक और बड़ा मंच मिला है। S. Jaishankar यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की उच्च स्तरीय अनौपचारिक बैठक ‘जिमनिख’ में भाग लेने के लिए साइप्रस पहुंचे हैं। यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब यूरोप, पश्चिम एशिया और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं। भारत की इस भागीदारी को नई दिल्ली की बढ़ती वैश्विक रणनीतिक भूमिका और यूरोप के साथ मजबूत होते संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
साइप्रस में जुटे वैश्विक कूटनीतिक नेता
यह अहम बैठक साइप्रस के लिमासोल शहर में आयोजित की जा रही है, जहां यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। बैठक की सह-अध्यक्षता Kaja Kallas और साइप्रस के विदेश मंत्री Constantinos Kombos कर रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को विशेष आमंत्रण दिया गया है, जो इस बात का संकेत है कि यूरोप भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। इस बैठक में Faisal bin Farhan Al Saud की भागीदारी भी पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक संवाद को दर्शाती है।
भारत-यूरोप संबंधों पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा सहयोग और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूरोप के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है, खासकर इंडो-पैसिफिक रणनीति, सप्लाई चेन सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग के क्षेत्रों में।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी चर्चा अहम मानी जा रही है। दोनों पक्ष इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी और उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मुलाकात का असर
हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने Ursula von der Leyen से मुलाकात कर भारत-यूरोप संबंधों को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया था। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत और यूरोप के बीच सहयोग में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जबकि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस संभावित समझौते को दोनों पक्षों के रिश्तों में “नए युग की शुरुआत” बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि इसका लाभ व्यापार, निवेश और आम लोगों तक तेजी से पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
साइप्रस में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और रूस-यूक्रेन संघर्ष के वैश्विक प्रभाव जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। भारत की भूमिका यहां खास मानी जा रही है, क्योंकि नई दिल्ली ने पिछले कुछ वर्षों में संतुलित और बहु-आयामी विदेश नीति अपनाई है। भारत ने पश्चिम एशिया के देशों, यूरोप, अमेरिका और रूस के साथ समान रूप से संवाद बनाए रखते हुए खुद को एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित किया है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती रणनीतिक मौजूदगी
एस. जयशंकर की यह यात्रा भारत की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत देश वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। भारत अब केवल दक्षिण एशिया तक सीमित शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और भू-राजनीतिक संतुलन में प्रभावशाली भागीदार बनकर उभर रहा है।









