सज्जन कुमार के परिजनों से मिले BJP के 3 सांसद, नितिन नवीन ने लगाई फटकार; जानें पूरा विवाद
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने दिल्ली के अपनी ही पार्टी के तीन सांसदों को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार की शोक सभा में शामिल होने को लेकर फटकार लगाई है।
BJP MPs Sajjan Kumar: दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के तीन सांसदों के कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के परिजनों से मुलाकात करने का मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, बीजेपी सांसद कमलजीत सहरावत, रामवीर सिंह बिधूड़ी और योगेंद्र चंदोलिया सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके परिवार से मिलने पहुंचे और संवेदना व्यक्त की। पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी पहले नहीं दी गई थी, जिसके बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीनों सांसदों को तलब कर नाराजगी जताई।
सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दोषी ठहराए गए थे और उम्रकैद की सजा काट रहे थे। उनके निधन के बाद उनके परिवार से बीजेपी सांसदों की मुलाकात ने सियासी और सामाजिक स्तर पर बहस छेड़ दी।
तीन बीजेपी सांसदों की मुलाकात से क्यों बढ़ा विवाद?
रिपोर्टों के अनुसार, कमलजीत सहरावत, रामवीर सिंह बिधूड़ी और योगेंद्र चंदोलिया सज्जन कुमार के परिवार से मिलने पहुंचे थे। यह मुलाकात उनके निधन के बाद शोक और संवेदना व्यक्त करने के लिए बताई जा रही है। हालांकि, इस कदम पर सिख विरोधी दंगा मामलों में पीड़ितों की ओर से लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वरिष्ठ वकील एच.एस. फुल्का ने आपत्ति जताई।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीनों सांसदों की आलोचना की और कहा कि संवेदना उन परिवारों के प्रति होनी चाहिए जिन्होंने 1984 के दंगों में अपने परिजनों को खोया। इस प्रतिक्रिया के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक चर्चा में आ गया।
नितिन नवीन ने सांसदों को क्यों फटकारा?
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सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, बीजेपी नेतृत्व इस बात से नाराज था कि तीनों सांसदों ने सज्जन कुमार के परिवार से मिलने से पहले पार्टी को इसकी जानकारी नहीं दी थी। बताया जा रहा है कि बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को तीनों सांसदों को बुलाकर इस मामले पर जवाब मांगा और उन्हें कड़ी फटकार लगाई। पार्टी नेतृत्व के लिए यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी लंबे समय से 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करती रही है।
हालांकि, सांसदों की मुलाकात को लेकर उनकी ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत सफाई सामने आने के बाद ही उनके व्यक्तिगत उद्देश्य और परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
सज्जन कुमार का 1984 दंगा मामले से क्या संबंध था?
सज्जन कुमार कांग्रेस के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता रहे थे। 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा हुई थी। इन मामलों में सज्जन कुमार को दोषी ठहराया गया था। वह मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। 20 अगस्त को उनके निधन के बाद उनके परिवार और राजनीतिक विरासत को लेकर एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा शुरू हुई।
वरिष्ठ वकील एच.एस. फुल्का ने बीजेपी सांसदों के दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक नेताओं को 1984 की हिंसा के पीड़ितों और उनके परिवारों की पीड़ा को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बीजेपी ने लंबे समय तक 1984 के दंगा मामलों में न्याय की मांग का समर्थन किया है। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में सार्वजनिक प्रतिनिधियों के किसी भी कदम का प्रतीकात्मक और राजनीतिक महत्व होता है।








