सरपंच चुनाव हारने पर भी चिड़ी देवी को मिले 25 लाख रुपये, ग्रामीण बोले- चुनाव से बड़ा गांव का भाईचारा

नागौर की भदौरा पंचायत में चिड़ी देवी 162 वोट से सरपंच चुनाव हार गईं। इसके बाद मोड़ी गांव के लोगों ने 25 लाख रुपये जुटाकर परिवार को भेंट किए। जानें पूरा मामला।

राजस्थान के नागौर में सरपंच चुनाव हारने वाली चिड़ी देवी के परिवार को ग्रामीणों ने 25 लाख रुपये भेंट किए। चिड़ी देवी गांव वालों के कहने पर चुनाव लड़ी थीं। ग्रामीणों ने कहा कि उनके लिए आपसी भाईचारा जीत-हार से बड़ा है।

नागौर: राजस्थान के नागौर जिले में सरपंच चुनाव हारने वाली महिला प्रत्याशी के घर ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी अब खूब चर्चा हो रही है। चुनाव में 162 वोटों से हारने वाली चिड़ी देवी के घर गांव के लोग गाड़ियों में भरकर पहुंचे। किसी के हाथ में फूलों की माला थी तो कोई साफा लेकर आया था। ग्रामीण अपने साथ एक थाल में 25 लाख रुपये भी लेकर आए थे। यह रकम उन्होंने आपस में सहयोग करके जुटाई थी।

मामला नागौर की मूंडवा पंचायत समिति की भदौरा ग्राम पंचायत का है। यहां मोड़ी गांव के लोगों ने आपसी सहमति से चिड़ी देवी को चुनाव लड़वाया था। वह चुनाव नहीं जीत सकीं तो ग्रामीणों ने उनके परिवार को आर्थिक सहयोग देने का फैसला किया।

गांव वालों ने खुद चुना था सरपंच पद का उम्मीदवार

मोड़ी गांव की रहने वाली चिड़ी देवी की उम्र 45 साल है। उनके पति हेमाराम राव खेती करते हैं। परिवार लंबे समय से गांव में सामाजिक कामों से जुड़ा रहा है। हेमाराम ने करीब दो साल पहले गांव की गोशाला को एक ट्रैक्टर दिया था। इसके अलावा लोगों के लिए पानी की प्याऊ बनवाई थी। उन्होंने एक बोरवेल खुदवाने की भी घोषणा की थी।

इन कामों की वजह से गांव में उनके परिवार की अच्छी पहचान बनी। इस बार भदौरा ग्राम पंचायत में सरपंच का पद महिला के लिए आरक्षित था। ऐसे में मोड़ी गांव के लोगों ने बातचीत करके चिड़ी देवी को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया।

ग्रामीणों का कहना है कि चिड़ी देवी ने उनके कहने पर चुनाव लड़ा था। इसलिए नतीजा आने के बाद परिवार को अकेला छोड़ना उन्हें ठीक नहीं लगा।

गिरिजा सान्दू ने 162 वोटों से हराया

भदौरा ग्राम पंचायत के चुनाव में चिड़ी देवी का मुकाबला गिरिजा सान्दू से था। गिरिजा भदौरा गांव के रहने वाले रिटायर्ड थानेदार माधोसिंह की पुत्रवधू हैं।

मतगणना के बाद गिरिजा सान्दू को विजेता घोषित किया गया। उन्हें कुल 1,317 वोट मिले, जबकि चिड़ी देवी को 1,155 मत प्राप्त हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच 162 वोटों का अंतर रहा।

नतीजे के बाद चिड़ी देवी सरपंच नहीं बन सकीं। हालांकि मोड़ी गांव के लोगों ने हार को लेकर आपसी संबंध खराब नहीं होने दिए। उन्होंने चुनाव के बाद भी परिवार के साथ खड़े रहने का फैसला किया। 

बैठक करके जुटाए 25 लाख रुपये

चुनाव परिणाम आने के बाद मोड़ी गांव में लोगों की बैठक हुई। इसमें चिड़ी देवी के परिवार को आर्थिक सहयोग देने की बात रखी गई। ग्रामीणों ने अपनी-अपनी तरफ से रकम दी और कुल 25 लाख रुपये इकट्ठा कर लिए।

इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण गाड़ियों से हेमाराम राव के घर पहुंचे। वहां उनका साफा और माला पहनाकर सम्मान किया गया। फिर थाल में रखी रकम परिवार को भेंट कर दी गई। 

ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव लड़ने में परिवार ने काफी मेहनत की थी और खर्च भी उठाया था। ऐसे में उन्होंने मिलकर कुछ आर्थिक मदद करने का फैसला लिया। इस मौके पर वार्ड नंबर पांच और छह से चुने गए वार्ड पंच सहदेवराम गोलिया और जगराम गोलिया का भी सम्मान किया गया।

हेमाराम बोले- गांव वालों ने हार का दुख दूर कर दिया

गांव के लोगों से मिले सम्मान के बाद हेमाराम राव भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने का दुख जरूर था। परिवार को उम्मीद थी कि चिड़ी देवी सरपंच बनेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

हेमाराम के मुताबिक, गांव वालों ने जिस तरह साथ दिया, उससे हार की निराशा काफी हद तक दूर हो गई। उनके लिए गांव के लोगों का प्यार और भरोसा किसी पद से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने मिलकर चिड़ी देवी को चुनाव लड़ाने का फैसला किया था। उस समय सभी ने यही माना था कि जीत किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव की होगी।

ग्रामीण बोले- चुनाव आते-जाते रहेंगे, रिश्ते बने रहने चाहिए

मोड़ी गांव के लोगों का कहना है कि चुनाव में किसी एक उम्मीदवार की जीत और दूसरे की हार तय है। लेकिन इसके कारण गांव के लोगों के बीच दूरी नहीं बढ़नी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने चिड़ी देवी के परिवार की मदद की। उनका कहना था कि चुनाव का परिणाम चाहे जो रहा हो, आपसी भाईचारा और एकता बनी रहनी चाहिए।

नागौर में हुई इस घटना ने पंचायत चुनाव के बीच लोगों का ध्यान खींचा है। जहां गिरिजा सान्दू ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की, वहीं चुनाव हारने वाली चिड़ी देवी को ग्रामीणों से 25 लाख रुपये का सहयोग मिला।

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