भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) ने अपनी हालिया बोर्ड बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए खुले बाजार में शेयर पुनर्खरीद यानी बायबैक की सुविधा को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह नया ढांचा 1 अगस्त 2026 से लागू होगा।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बाजार नियामक सेबी (Securities and Exchange Board of India) ने खुले बाजार (Open Market) से शेयर पुनर्खरीद यानी बायबैक को दोबारा शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह नया नियम 1 अगस्त से लागू होगा। लंबे समय से बंद इस व्यवस्था की वापसी को कंपनियों और निवेशकों दोनों के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है।
सेबी के निदेशक मंडल ने शुक्रवार को हुई बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनमें ओपन मार्केट बायबैक की पुनः शुरुआत, म्यूचुअल फंड्स के लिए इंट्रा-डे उधारी मानकों में ढील और निवेशक की मृत्यु के बाद प्रतिभूतियों (securities) के हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है।
ओपन मार्केट बायबैक क्या है?
ओपन मार्केट बायबैक एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कंपनियां अपने शेयर सीधे शेयर बाजार से खरीदती हैं। यह तरीका कंपनियों को लचीलापन देता है, क्योंकि वे बाजार की स्थिति के अनुसार धीरे-धीरे शेयर खरीद सकती हैं। इससे पहले यह विकल्प पारदर्शिता और सभी निवेशकों को समान अवसर न मिलने जैसी चिंताओं के कारण बंद कर दिया गया था। अब सेबी ने इसे फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है, लेकिन इसके लिए सख्त नियम और समय सीमा तय की गई है।
60 दिनों की समय-सीमा और नियम
नए ढांचे के तहत ओपन मार्केट बायबैक को अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। कंपनियों को इस अवधि के भीतर निर्धारित मात्रा में अपने शेयर बाजार से खरीदने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कंपनियों को अधिक रणनीतिक तरीके से पूंजी प्रबंधन करने की सुविधा देगा। साथ ही, यह निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि बायबैक अक्सर कंपनी के भविष्य में विश्वास का संकेत होता है।
बायबैक का महत्व और उपयोग
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कंपनियां आमतौर पर बायबैक का उपयोग शेयरधारकों को अतिरिक्त नकदी लौटाने, प्रति शेयर आय (Earnings Per Share – EPS) बढ़ाने और बाजार में अपने शेयरों की मांग को संतुलित करने के लिए करती हैं। ओपन मार्केट रूट बंद होने के बाद कंपनियों के पास बायबैक के सीमित विकल्प रह गए थे, जैसे टेंडर ऑफर और अन्य संरचित तरीके।
अब इस विकल्प की वापसी से कंपनियों को अधिक लचीलापन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस प्रक्रिया में बाजार पर संभावित प्रभाव और कीमतों में अस्थिरता को लेकर सतर्कता जरूरी होगी।
निवेशकों के लिए संभावित प्रभाव
सेबी का यह कदम निवेशकों के लिए मिश्रित प्रभाव ला सकता है। एक ओर जहां कंपनियों की ओर से बायबैक की संभावना बढ़ने से शेयरों की मांग में सुधार हो सकता है, वहीं दूसरी ओर बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता की स्थिति भी बन सकती है। नियामक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी रहें और छोटे निवेशकों के हित सुरक्षित रहें।
सेबी ने अपने फैसलों में सोने और चांदी आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के लिए एक नया ट्रेडिंग सिस्टम भी मंजूर किया है, जो 1 सितंबर से लागू होगा।इस नए ढांचे का उद्देश्य ETF की कीमतों को उनके अंतर्निहित एसेट्स (Underlying Assets) के वास्तविक मूल्य के अधिक करीब रखना है। इससे घरेलू बाजार की कीमतों और वैश्विक कमोडिटी बाजार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा।
नए नियमों के तहत ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत ‘प्री-ओपन कॉल ऑक्शन’ से होगी और इसके बाद ‘डायनामिक प्राइस बैंड’ के भीतर कारोबार किया जाएगा। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजारों में रातभर हुए बदलावों को तुरंत भारतीय बाजार में प्रतिबिंबित करना है।









