सीकर में SFI का आक्रोश मार्च, नीट पेपरलीक पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

राजस्थान के सीकर में SFI ने नीट पेपरलीक के विरोध में आक्रोश मार्च निकाला। संगठन ने NTA पर सवाल उठाते हुए 19 जून को शिक्षा मंत्रालय के घेराव का ऐलान किया।

सीकर में SFI ने नीट पेपरलीक के विरोध में आक्रोश मार्च निकाला। संगठन ने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। SFI ने 19 जून को दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के घेराव का ऐलान किया।

सीकर: राजस्थान के सीकर में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने बुधवार को आक्रोश मार्च निकाला। संगठन ने NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और कथित पेपर लीक मामलों के विरोध में यह प्रदर्शन आयोजित किया। मार्च डाक बंगला परिसर से शुरू होकर नवलगढ़ पुलिया होते हुए सीएलसी चौराहे तक पहुंचा, जहां छात्रों और संगठन के पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित किया।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। साथ ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियों पर सवाल उठाए गए। मार्च में शामिल छात्रों ने कहा कि बार-बार सामने आने वाले परीक्षा विवादों ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है।

NTA की कार्यप्रणाली पर SFI ने उठाए सवाल

सभा को संबोधित करते हुए SFI के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष जाखड़ ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी की जिम्मेदारी निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षाएं आयोजित करने की है, लेकिन पिछले वर्षों में कई परीक्षाएं विवादों में रही हैं।

जाखड़ ने दावा किया कि बीते वर्षों में कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों का सबसे बड़ा असर छात्रों पर पड़ता है, जिन्हें बार-बार परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है।

शिक्षा मंत्रालय के घेराव का ऐलान

प्रदर्शन के दौरान SFI ने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की घोषणा भी की। संगठन ने कहा कि 19 जून को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय का घेराव किया जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदारी तय करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

सीकर में SFI का आक्रोश मार्च, नीट पेपरलीक पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

SFI नेताओं ने कहा कि देशभर के छात्र इस अभियान में शामिल होंगे और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाएंगे। उनका कहना है कि छात्रों का भविष्य किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।

छात्रों के मानसिक दबाव का मुद्दा भी उठा

आक्रोश मार्च के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि परीक्षा रद्द होने, परिणामों में देरी और विवादों के कारण छात्रों को भारी तनाव झेलना पड़ता है।

संगठन ने उन छात्रों का भी जिक्र किया, जिनकी मौतों को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े तनाव को कम करने और छात्रों को मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

सीकर क्यों बना आंदोलन का केंद्र

सीकर देश के प्रमुख कोचिंग हब में से एक माना जाता है, जहां हर साल हजारों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। ऐसे में NEET या अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं से जुड़ा कोई भी विवाद यहां के छात्रों और अभिभावकों को सीधे प्रभावित करता है।

यही वजह है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर सीकर अक्सर छात्र आंदोलनों का केंद्र बनता रहा है। स्थानीय स्तर पर शुरू होने वाली ऐसी आवाजें कई बार राष्ट्रीय बहस का विषय भी बन जाती हैं।

परीक्षा सुधारों की मांग हुई तेज

छात्र संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी की जरूरत है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने की मांग लगातार उठ रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर सकती है। इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।

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