भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी उतार-चढ़ाव के बाद अंततः गिरावट के साथ कारोबार समाप्त हुआ। मासिक F&O एक्सपायरी के दिन बाजार पर दबाव बढ़ने से निवेशकों में मुनाफावसूली हावी रही, वहीं वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक चिंताओं ने भी सेंटीमेंट को कमजोर किया।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला और दिन के अंत में बाजार लाल निशान पर बंद हुआ। मासिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी (F&O Expiry) के दबाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते निवेशकों में सतर्कता और मुनाफावसूली का माहौल रहा, जिसका सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा।
कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 479.26 अंक यानी 0.63% की गिरावट के साथ 76,009.70 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 118 अंक टूटकर 23,913.70 के स्तर पर आ गया। दिनभर की ट्रेडिंग में बाजार में कभी हल्की रिकवरी तो कभी तेज बिकवाली देखने को मिली, लेकिन अंततः दबाव हावी रहा।
एक्सपायरी डे और मुनाफावसूली ने बढ़ाया दबाव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट की सबसे बड़ी वजह मासिक F&O एक्सपायरी रही। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स अपनी ओपन पोजिशन को बंद करते हैं, जिससे बाजार में अचानक वोलैटिलिटी बढ़ जाती है। इस बार भी यही ट्रेंड देखने को मिला, जहां बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया।निफ्टी का 24,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर टूटना निवेशकों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है। इस स्तर के नीचे बंद होने से शॉर्ट टर्म सेंटिमेंट कमजोर हुआ है।
घरेलू कारणों के अलावा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों ने भी बाजार की दिशा को प्रभावित किया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर निवेशकों में चिंता बढ़ी है। हाल ही में शांति वार्ता की उम्मीदों से बाजार में सुधार देखा गया था, लेकिन ताजा घटनाक्रमों ने फिर अनिश्चितता बढ़ा दी है। वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ने से विदेशी निवेशक (FII) भी सतर्क नजर आए, जिसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी पड़ा।
सेक्टरवार प्रदर्शन: बैंकिंग और रियल्टी में गिरावट

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो FMCG और मेटल सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में गिरावट देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में खास दबाव रहा, जिसमें PSU बैंक और प्राइवेट बैंक दोनों शामिल रहे। इसके अलावा रियल्टी, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी बिकवाली हावी रही। हालांकि FMCG और मेटल सेक्टर ने अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया और बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट दिया।
निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में अपोलो हॉस्पिटल्स, भारती एयरटेल, टीसीएस, विप्रो और ट्रेंट शामिल रहे। इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने इंडेक्स पर सीधा असर डाला। वहीं दूसरी ओर कुछ शेयरों ने मजबूती भी दिखाई। अदाणी एंटरप्राइजेज, टाटा मोटर्स, टेक महिंद्रा और नेस्ले जैसे शेयर बढ़त के साथ बंद हुए और गिरावट को सीमित करने में भूमिका निभाई।
मिडकैप और स्मॉलकैप में हल्की मजबूती
बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में हल्की मजबूती देखने को मिली। यह संकेत देता है कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निफ्टी के लिए 24,100–24,200 का स्तर अब बेहद महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन बन गया है। यदि निफ्टी इस स्तर को पार करता है तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। दूसरी ओर, अगर निफ्टी 24,000 के नीचे बना रहता है तो यह कमजोरी बढ़ा सकता है और इंडेक्स 23,800 के स्तर तक फिसल सकता है।








