मेघालय में ₹51 करोड़ का स्काईवॉक 2027 तक तैयार, पर्यटकों को मिलेगा रोमांचक अनुभव

मेघालय के प्रसिद्ध मावकडोक डिमपेप वैली मे 51 करोड़ रुपए की लागत से स्काईवॉक 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। 40 मीटर लंबा यह प्रोजेक्ट पर्यटको के लिए नजारा

मेघालय के प्रसिद्ध मावकडोक डिमपेप वैली में 51 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा स्काईवॉक 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। 40 मीटर लंबा यह प्रोजेक्ट पर्यटकों को घाटी के शानदार नजारों का अनूठा अनुभव देगा और राज्य के पर्यटन को नई रफ्तार देगा।

शिलॉन्ग: पूर्वोत्तर भारत का खूबसूरत राज्य मेघालय आने वाले वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की तैयारी कर रहा है। राज्य के प्रसिद्ध मावकडोक डिमपेप वैली (Mawkdok Dympep Valley) में बन रहा अत्याधुनिक स्काईवॉक प्रोजेक्ट तेजी से आकार ले रहा है। करीब 51 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट 2027 के अंत तक पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।

सोहरा (चेरापूंजी) क्षेत्र के विधायक गेविन मिगुएल माइलियम ने जानकारी दी कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 20 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य पिछले वर्ष शुरू हुआ था और इसका मुख्य उद्देश्य मेघालय के पर्यटन अनुभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई देना है।

प्राकृतिक सुंदरता, बादलों से ढकी पहाड़ियां, गहरी घाटियां और हरियाली के लिए मशहूर मावकडोक डिमपेप वैली अब इस स्काईवॉक के जरिए एडवेंचर और इको-टूरिज्म का नया केंद्र बनने जा रही है।

क्या है मावकडोक स्काईवॉक प्रोजेक्ट?

मावकडोक स्काईवॉक एक आधुनिक पर्यटन परियोजना है, जिसे घाटी के ऊपर रोमांचक दृश्य अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत 40 मीटर लंबा वॉकवे बनाया जा रहा है, जिसमें सात मीटर चौड़ा कैंटिलीवर सेक्शन भी शामिल होगा। यह हिस्सा घाटी के ऊपर हवा में निकला हुआ रहेगा, जहां से पर्यटक नीचे फैली गहरी खाई और आसपास की पहाड़ियों का शानदार नजारा देख सकेंगे।

यह स्काईवॉक लगभग 0.54 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। परियोजना में 2,195 वर्ग मीटर का पैदल यात्री डेक भी शामिल होगा, जहां पर्यटक सुरक्षित तरीके से घूम सकेंगे और प्राकृतिक दृश्य का आनंद ले सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्काईवॉक भारत के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक बन सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो प्रकृति और एडवेंचर दोनों का अनुभव लेना चाहते हैं।

मेघालय पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

मावकडोक डिमपेप वैली पहले से ही मेघालय आने वाले पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। शिलॉन्ग से सोहरा (चेरापूंजी) जाने वाले हाईवे पर स्थित यह घाटी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, गहरे गॉर्ज और हरियाली के लिए जानी जाती है।

अब स्काईवॉक बनने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। राज्य सरकार और पर्यटन विभाग का मानना है कि यह प्रोजेक्ट मेघालय को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्काईवॉक केवल एक पर्यटन स्थल नहीं होगा, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देगा। होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड सर्विस, स्थानीय हस्तशिल्प और खानपान से जुड़े लोगों को इसका सीधा फायदा मिलने की संभावना है।

एडवेंचर टूरिज्म का नया केंद्र बनेगा सोहरा क्षेत्र

सोहरा, जिसे पहले चेरापूंजी के नाम से जाना जाता था, दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल है। यहां की प्राकृतिक गुफाएं, झरने, जीवित जड़ पुल (Living Root Bridges) और घाटियां पहले से ही एडवेंचर प्रेमियों को आकर्षित करती रही हैं।

अब मावकडोक स्काईवॉक के जुड़ने से यह क्षेत्र एडवेंचर टूरिज्म के लिए और ज्यादा आकर्षक बन जाएगा। पर्यटक घाटी के ऊपर बने इस वॉकवे पर चलते हुए बादलों के बीच अनोखा अनुभव ले सकेंगे।

पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई देशों में इस तरह के स्काईवॉक पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। मेघालय का यह प्रोजेक्ट भी उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण पर भी रहेगा फोकस

राज्य सरकार का कहना है कि इस परियोजना को विकसित करते समय पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। मेघालय अपनी जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन के लिए जाना जाता है, इसलिए निर्माण कार्य को इको-फ्रेंडली तरीके से किया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, स्काईवॉक परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति जागरूकता भी बढ़ाना है। यहां आने वाले पर्यटकों को स्थानीय पारिस्थितिकी, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर के बारे में जानकारी दी जाएगी।

पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इस परियोजना को संतुलित तरीके से संचालित किया गया तो यह इको-टूरिज्म का बेहतरीन उदाहरण बन सकती है।

2027 तक पूरा होने की उम्मीद

विधायक गेविन मिगुएल माइलियम के अनुसार, परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार चल रहा है। फिलहाल करीब 20 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और 2027 के अंत तक इसे आम लोगों के लिए खोलने की योजना है।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना मेघालय की पर्यटन क्षमता को नई दिशा देगी और राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि स्काईवॉक शुरू होने के बाद देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक मेघालय पहुंचेंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

पूर्वोत्तर भारत में तेजी से बढ़ रहा पर्यटन

पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर भारत पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम जैसे राज्यों में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार भी पूर्वोत्तर राज्यों में पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चला रही है। सड़क, एयर कनेक्टिविटी और डिजिटल सुविधाओं में सुधार से इन राज्यों तक पहुंच पहले की तुलना में आसान हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मावकडोक स्काईवॉक जैसे प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक पर्यटन बाजार में नई पहचान दिला सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण बनने की संभावना

दुनिया भर में स्काईवॉक पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। चीन, अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों में बने ग्लास ब्रिज और स्काईवॉक लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

मावकडोक स्काईवॉक भी अपनी प्राकृतिक लोकेशन और अनोखे डिजाइन के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो सकता है। खासतौर पर सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रैवल कंटेंट के दौर में इस तरह के पर्यटन स्थल तेजी से लोकप्रिय होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकार बेहतर प्रचार-प्रसार और पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध कराती है, तो यह प्रोजेक्ट मेघालय को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दिला सकता है।

स्थानीय समुदाय को मिलेगा लाभ

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय समुदाय को मिलने की उम्मीद है। निर्माण कार्य से लेकर पर्यटन सेवाओं तक, बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।

इसके अलावा स्थानीय संस्कृति, भोजन, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को भी नई पहचान मिलने की संभावना है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि पर्यटन विकास के साथ स्थानीय लोगों की आय और जीवन स्तर में भी सुधार हो।

मावकडोक स्काईवॉक परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं बल्कि मेघालय के पर्यटन, रोजगार और आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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