शिकारी और कबूतर: संगठन में ही शक्ति है

शिकारी और कबूतर: संगठन में ही शक्ति है

यह पंचतंत्र की सबसे प्रसिद्ध कहानियों में से एक है। अक्सर जब मुसीबत आती है, तो हम घबराकर एक-दूसरे पर दोष लगाने लगते हैं और बिखर जाते हैं। लेकिन यह कहानी हमें सिखाती है कि संकट के समय अगर हम 'बुद्धिमानी' और 'एकता' के साथ काम करें, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत (जाल) को भी अपने साथ उड़ाकर ले जा सकते हैं।

कहानी 

एक बहुत बड़े बरगद के पेड़ पर कबूतरों का एक बड़ा झुंड रहता था। उस झुंड का राजा 'चित्रग्रीव' था, जो बहुत ही समझदार और अनुभवी था। एक दिन की बात है, चित्रग्रीव अपने पूरे परिवार और साथियों के साथ भोजन की तलाश में आकाश में उड़ रहा था। वे सब बहुत भूखे थे।

उड़ते-उड़ते एक युवा कबूतर की नजर नीचे जमीन पर पड़ी। उसने देखा कि नीचे जंगल के बीचो-बीच बहुत सारे चावल के दाने बिखरे हुए हैं। उसने खुशी से चिल्लाकर कहा, 'देखो! नीचे कितना सारा भोजन है। चलो, नीचे उतरकर पेट भरते हैं।'

बाकी कबूतर भी नीचे जाने के लिए तैयार हो गए। लेकिन राजा चित्रग्रीव को शक हुआ। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'रुको! जरा सोचो, इस सुनसान जंगल में जहाँ कोई इंसान नहीं रहता, वहां इतने सारे चावल के दाने कहां से आए? इसमें जरूर कोई खतरा है। हमें नीचे नहीं उतरना चाहिए।'

लेकिन कबूतरों को बहुत जोर की भूख लगी थी। उन्होंने अपने राजा की बात अनसुनी कर दी और कहा, 'आप तो हमेशा शक करते हैं। हमें खाना चाहिए।' यह कहकर पूरा झुंड दाना चुगने के लिए जमीन पर उतर गया। राजा चित्रग्रीव न चाहते हुए भी उनकी रक्षा के लिए उनके साथ नीचे उतरे।

जैसे ही कबूतरों ने दाना चुगना शुरू किया, अचानक उन पर एक भारी जाल आ गिरा। वे सब उस जाल में बुरी तरह फंस गए। यह एक बहेलिए (शिकारी) की चाल थी। झाड़ियों के पीछे छिपा हुआ शिकारी यह देखकर बहुत खुश हुआ और जाल की तरफ दौड़ने लगा।

जाल में फंसते ही कबूतर घबरा गए। वे चिल्लाने लगे और हर कोई अपने-अपने तरीके से बाहर निकलने के लिए पंख फड़फड़ाने लगा। कोई बायीं ओर खींच रहा था, तो कोई दायीं ओर। लेकिन जाल टस से मस नहीं हुआ। वे जितना जोर लगाते, जाल उतना ही कसता जाता।

मौत को सामने देखकर वे एक-दूसरे को कोसने लगे। 'तुम्हारी वजह से हम नीचे आए', 'तुमने राजा की बात नहीं मानी'।

तभी चित्रग्रीव ने उन्हें डांटते हुए कहा, 'शांत हो जाओ! एक-दूसरे पर दोष लगाने का यह समय नहीं है। बिखरकर कोशिश करोगे तो सब मारे जाओगे। शिकारी आ रहा है। अगर बचना है तो मेरी बात ध्यान से सुनो।'

सभी कबूतर चुप हो गए। चित्रग्रीव ने कहा, 'इस जाल को काटने का समय नहीं है, लेकिन हम इसे उठाकर ले जा सकते हैं। हम सब में बहुत ताकत है, लेकिन अभी वह ताकत बंटी हुई है। हमें 'संगठन' की शक्ति दिखानी होगी।'

राजा ने योजना समझाई, 'मैं तीन तक गिनूंगा। जैसे ही मैं तीन बोलूँ, तुम सब अपनी पूरी ताकत लगाकर एक साथ, एक ही दिशा में ऊपर की ओर उड़ना। कोई भी पीछे नहीं रहेगा।'

शिकारी अब बिलकुल पास आ चुका था। उसकी आँखों में चमक थी कि आज उसे ढेर सारे कबूतर मिल गए।

चित्रग्रीव ने चिल्लाकर कहा, 'एक... दो... और तीन! उड़ो!'

अचानक एक चमत्कार हुआ। सैकड़ों कबूतरों ने एक साथ पंख फड़फड़ाए। उनकी सम्मिलित ताकत के सामने भारी जाल भी हल्का पड़ गया। देखते-ही-देखते कबूतरों का झुंड पूरे जाल को लेकर हवा में ऊपर उठ गया।

शिकारी की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह जाल पकड़ने के लिए दौड़ा, लेकिन तब तक कबूतर बहुत ऊपर जा चुके थे। वह हताश होकर आसमान की ओर देखता रह गया।

चित्रग्रीव अपने साथियों को लेकर अपने मित्र 'हिरण्यक' चूहे के पास गए। चूहे ने अपने तेज दांतों से जाल काट दिया और सभी कबूतर आजाद हो गए। सबने जान लिया था कि आज उनकी जान केवल उनकी 'एकता' की वजह से बची है।

सीख 

इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है कि 'संगठन में ही शक्ति है' (Unity is Strength)। जब हम अकेले होते हैं, तो हम कमजोर पड़ सकते हैं और आसानी से पराजित हो सकते हैं। लेकिन जब हम एकजुट होकर, एक टीम की तरह काम करते हैं, तो हम ऐसी बाधाओं को भी पार कर सकते हैं जो असंभव लगती हैं।

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