शिमला बाईपास फोरलेन निर्माण के दौरान भूस्खलन से मकान ढहने के मामले में हिमाचल हाई कोर्ट ने NHAI और निर्माण कंपनी को जिम्मेदार ठहराया। अदालत ने पीड़ित महिला को चार सप्ताह में मुआवजा देने का निर्देश दिया।
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला बाईपास फोरलेन निर्माण के दौरान हुई लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने भूस्खलन में मकान ढहने से प्रभावित महिला को मुआवजा देने का आदेश NHAI और निर्माण कंपनी को दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि नुकसान की निर्धारित राशि का 50-50 प्रतिशत दोनों पक्ष चार सप्ताह के भीतर सीधे पीड़िता को भुगतान करें।
फोरलेन निर्माण के दौरान हुआ था भूस्खलन
मामला शिमला ग्रामीण के चमियाणा स्थित संजय वन कॉलोनी का है, जहां एनएच-5 से आने वाले फोरलेन मार्ग के निर्माण के दौरान पहाड़ की खड़ी कटाई की जा रही थी। इसी दौरान 30 जून 2025 को क्षेत्र में बड़ा भूस्खलन हुआ।

भूस्खलन की चपेट में आने से रंजना नाम की महिला का चार मंजिला मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर ढह गया। इसके पीछे स्थित चंदा देवी का करीब साढ़े तीन मंजिला मकान भी असुरक्षित हो गया और उसमें रहना संभव नहीं रहा।
घटना के बाद मामले को लेकर निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों और तकनीकी प्रक्रियाओं के पालन पर सवाल उठे।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट में लापरवाही का खुलासा
अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट में हादसे को प्राकृतिक घटना के बजाय निर्माण कार्य से जुड़ी मानवीय लापरवाही का परिणाम बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, पहाड़ी की कटाई के दौरान पर्याप्त भू-तकनीकी योजना और जल निकासी व्यवस्था का उचित प्रबंध नहीं किया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि एनएचएआई की ओर से अधिग्रहित भूमि की निर्धारित चौड़ाई से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया। इससे ढलान की स्थिरता प्रभावित हुई और भूस्खलन का खतरा बढ़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने सुनवाई के बाद मुआवजे को लेकर निर्देश जारी किए।
नुकसान का मूल्यांकन 5.61 करोड़ रुपये से अधिक
रंजना के मकान, जमीन और घरेलू सामान को हुए नुकसान का मूल्यांकन उपमंडलीय मजिस्ट्रेट की ओर से किया गया था। इसमें 100 प्रतिशत सॉलटियम सहित कुल नुकसान की राशि 5.61 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी।
यह मूल्यांकन पिछले वर्ष ही NHAI को भेज दिया गया था, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक कोई भुगतान नहीं मिला था। हाई कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण माना।
अदालत ने नुकसान की निर्धारित राशि में से 2,23,55,924 रुपये के भुगतान का विशेष निर्देश दिया है। इसके तहत NHAI और गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी को 50-50 प्रतिशत राशि सीधे रंजना देवी को देनी होगी।
चार सप्ताह में भुगतान का निर्देश
हाई कोर्ट ने NHAI और गावर शिखा हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि निर्धारित राशि का अपना हिस्सा चार सप्ताह के भीतर पीड़िता को भुगतान करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवार को मुआवजे के लिए और इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।
इसके साथ ही राज्य सरकार को चंदा देवी के असुरक्षित मकान का भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत तत्काल मूल्यांकन करने का निर्देश दिया गया है। अदालत के आदेश के बाद अब प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ने की उम्मीद है।
इस मामले में हाई कोर्ट के रुख से यह भी स्पष्ट है कि बड़े सड़क और फोरलेन प्रोजेक्ट में निर्माण के दौरान भू-तकनीकी सुरक्षा, ढलान स्थिरता और जल निकासी जैसे पहलुओं की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।










