शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव सोमवार को होंगे। 25 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी है, जबकि दो निर्दलीय सदस्य सत्ता की चाबी माने जा रहे हैं।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को होने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने समर्थित सदस्यों को एकजुट रखने में जुटी हैं। मौजूदा समीकरणों के बीच दो निर्दलीय जिला परिषद सदस्यों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, जिनके समर्थन से सत्ता का फैसला तय हो सकता है।
निर्दलीय सदस्यों पर टिकी सत्ता की चाबी
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। सोमवार को होने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने-अपने समर्थित सदस्यों को एकजुट रखने में जुटी हैं। 25 सदस्यीय जिला परिषद में बहुमत के लिए 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी है, ऐसे में दो निर्दलीय सदस्यों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है।
बहुमत के लिए दोनों दलों की जोरदार तैयारी
मौजूदा सियासी समीकरणों के अनुसार भाजपा के पास 12 सदस्यों का समर्थन बताया जा रहा है, जबकि कांग्रेस के साथ 11 सदस्य हैं। ऐसे में दोनों निर्दलीय सदस्यों का समर्थन ही यह तय करेगा कि जिला परिषद की कमान किस दल के हाथ में जाएगी। इसी वजह से दोनों दल अंतिम समय तक राजनीतिक रणनीति और संपर्क अभियान में जुटे हुए हैं।
तीन महीने से जारी है सियासी हलचल
जिला परिषद की सत्ता हासिल करने के लिए पिछले करीब तीन महीनों से राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने समर्थित सदस्यों के संपर्क में हैं और किसी भी तरह की टूट-फूट रोकने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले भी दोनों खेमों ने अपने सदस्यों को एकजुट रखने के लिए लगातार बैठकें की हैं।
निर्दलीय बदल सकते हैं पूरा समीकरण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों निर्दलीय सदस्य किसी एक दल के पक्ष में जाते हैं तो जिला परिषद का पूरा सत्ता समीकरण बदल सकता है। यही कारण है कि दोनों दलों की नजर केवल निर्दलीय सदस्यों पर ही नहीं, बल्कि अपने-अपने समर्थित सदस्यों पर भी बनी हुई है ताकि मतदान के समय कोई अप्रत्याशित स्थिति न बने।
सोमवार को होगा फैसला
जिला उपायुक्त कार्यालय स्थित बचत भवन में सोमवार सुबह अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान कराया जाएगा। इस चुनाव पर पूरे हिमाचल प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि देर रात तक चली राजनीतिक कवायद किस दल के पक्ष में जाती है और शिमला जिला परिषद की कमान आखिर किसके हाथ में आती है।












