महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के अलग गुट बनाने की खबरों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
नई दिल्ली: West Bengal में Mamata Banerjee की All India Trinamool Congress के बाद अब Maharashtra की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। चर्चाओं के अनुसार, Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) के छह सांसद Eknath Shinde के गुट में विलय के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप चुके हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना अभी बाकी है।
इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच Asaduddin Owaisi ने तंज कसते हुए कहा, "शिकारी नया है, जाल पुराना है।" ओवैसी का यह बयान दल-बदल और राजनीतिक टूट-फूट की घटनाओं पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
शिवसेना (यूबीटी) में टूट की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने अलग गुट बनाने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की है और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय के संबंध में पत्र भी सौंपा है।
हालांकि, इस घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रक्रिया और संवैधानिक मान्यता को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित संसदीय प्रक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, अलग गुट से जुड़े सांसदों में भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल, संजय दीना पाटिल, संजय हरिभाऊ जाधव, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और संजय देशमुख के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
ओवैसी ने उठाए राजनीतिक सवाल
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असदुद्दीन ओवैसी ने अपने बयान में केवल शिवसेना के घटनाक्रम का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि हाल में पश्चिम बंगाल की राजनीति में सामने आई घटनाओं को भी इससे जोड़ा। उन्होंने सवाल किया कि आखिर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या उसके सहयोगी दलों के साथ क्यों जुड़ रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि हर राजनीतिक टूट के लिए केवल किसी एक व्यक्ति या नेता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा कि राजनीतिक दलों में लगातार हो रही टूट के पीछे व्यापक कारणों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक संकट का विश्लेषण तथ्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल आरोप-प्रत्यारोप के जरिए।
पश्चिम बंगाल के घटनाक्रम का भी किया जिक्र
ओवैसी की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई सांसदों के अलग गुट बनाने की खबरें चर्चा में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी के कुछ सांसदों ने अलग राजनीतिक समूह बनाकर नई रणनीति अपनाने का फैसला किया है। बागी नेताओं ने भविष्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ सहयोग की संभावना भी जताई है।
इन घटनाओं ने विपक्षी दलों के भीतर एकजुटता और नेतृत्व क्षमता को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। यदि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों का अलग गुट आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त करता है, तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ सकता है। पहले ही शिवसेना में हुए विभाजन के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला था, जिसके परिणामस्वरूप एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में नया राजनीतिक समीकरण बना।









