कफ सीरप की बिक्री पर सख्ती, बिना वैध पर्ची दवा देने पर होगी कड़ी निगरानी

केंद्र सरकार ने कफ सीरप समेत कुछ दवाओं की बिक्री पर निगरानी बढ़ाई। अब वैध चिकित्सकीय पर्ची के बिना दवा बिक्री पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में संशोधन कर कुछ सीरप आधारित दवाओं पर मिलने वाली छूट समाप्त कर दी है। इसके बाद कफ सीरप की बिक्री, भंडारण और निगरानी अधिक सख्त होगी। हरियाणा में भी अधिकारियों को नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

 अंबाला: कफ सीरप और अन्य सीरप आधारित दवाओं की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ड्रग्स नियमों में संशोधन के बाद अब इन दवाओं की बिक्री और निगरानी पहले की तुलना में अधिक सख्त हो जाएगी। सरकार का उद्देश्य दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना और नियामकीय व्यवस्था को मजबूत बनाना है। इसके बाद राज्यों ने भी नियमों के पालन को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है।

ड्रग्स नियमों में संशोधन के बाद बदली व्यवस्था

केंद्र सरकार ने दवा नियमन से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कफ सीरप सहित कुछ सीरप आधारित दवाओं पर मिलने वाली विशेष छूट को समाप्त कर दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 9 जून 2026 को जारी अधिसूचना के तहत ड्रग्स रूल्स-1945 के शेड्यूल-के में संशोधन किया गया है। इस बदलाव के बाद अब इन दवाओं की बिक्री और निगरानी पहले से अधिक नियंत्रित तरीके से की जाएगी।

कफ सीरप की बिक्री पर सख्ती, बिना वैध पर्ची दवा देने पर होगी कड़ी निगरानी

विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव तकनीकी रूप से छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन इसका प्रभाव दवा कारोबार, मेडिकल स्टोर संचालन और उपभोक्ताओं तक व्यापक रूप से पहुंच सकता है। सरकार का मानना है कि दवाओं की उपलब्धता और उपयोग को लेकर अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।

कफ सीरप के दुरुपयोग पर रोक लगाने की कोशिश

पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कफ सीरप के गलत इस्तेमाल और नशे के लिए उपयोग किए जाने के मामले सामने आए हैं। कई राज्यों में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मामलों में कार्रवाई भी की है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने नियमों को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ दवाओं का अनियंत्रित उपयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसलिए दवा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नए नियमों को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग हुआ सक्रिय

केंद्र की अधिसूचना के बाद हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य औषधि नियंत्रक रिपन मेहता ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अनुसूचित दवाओं की बिक्री केवल वैध चिकित्सकीय पर्ची के आधार पर ही सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को मेडिकल स्टोरों पर नियमित निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच करने के लिए भी कहा गया है ताकि नए नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

मेडिकल स्टोर संचालकों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

नए नियमों का सबसे अधिक असर मेडिकल स्टोर संचालकों पर पड़ सकता है। अब उन्हें दवा बिक्री के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन दवाओं के लिए चिकित्सकीय पर्ची आवश्यक है, उनकी बिक्री निर्धारित नियमों के तहत ही हो।

इसके अलावा स्टॉक प्रबंधन, प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन और दवा वितरण से जुड़े दस्तावेजों को भी अधिक सावधानी से संभालना होगा। यदि किसी मेडिकल स्टोर पर नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

उपभोक्ताओं को भी रखना होगा ध्यान

नए प्रावधान लागू होने के बाद कुछ सीरप आधारित दवाएं खरीदने के लिए उपभोक्ताओं को डॉक्टर की सलाह और वैध प्रिस्क्रिप्शन की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि अधिसूचना में किसी विशेष ब्रांड का नाम नहीं दिया गया है, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि सरकार कफ सीरप और अन्य संवेदनशील दवाओं की बिक्री पर निगरानी बढ़ाना चाहती है।

इस बदलाव के बाद मेडिकल स्टोर से बिना आवश्यक दस्तावेजों के कुछ दवाएं प्राप्त करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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