झुंझुनूं: पहली बारिश में बह गई 35 लाख रुपये की नई सड़क, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल; जांच और कार्रवाई के आदेश

झुंझुनूं में दो महीने पहले बनी 35 लाख रुपए की सड़क पहली बारिश में बह गई। ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का आरोप लगाया, PWD ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया।

झुंझुनूं के मंड्रेला क्षेत्र में 35 लाख रुपए की लागत से बनी सड़क पहली तेज बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने जांच कर कमियां मिलने पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में हाल ही में निर्मित एक ग्रामीण सड़क पहली ही तेज बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग दो महीने पहले 35 लाख रुपये की लागत से बनाई गई यह सड़क भारी वर्षा के बाद कई स्थानों पर टूट गई और इसका बड़ा हिस्सा बह गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

यह सड़क सैनीपुरा गांव को तिगियास पंचायत से जोड़ती है और क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग मानी जाती है। लेकिन मानसून की पहली तेज बारिश ने सड़क की मजबूती की परीक्षा ली और सड़क इस परीक्षा में पूरी तरह विफल साबित हुई।

35 लाख रुपये की लागत से बनी थी 1.2 किलोमीटर लंबी सड़क

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, यह सड़क करीब 1,200 मीटर लंबी है और इसका निर्माण हाल ही में सार्वजनिक धन से कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का लगभग 500 मीटर हिस्सा बारिश के दौरान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कई जगहों पर डामर और मिट्टी पूरी तरह बह गई, जबकि कुछ हिस्सों में बड़े गड्ढे बन गए।

सड़क के टूटने से आसपास के गांवों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस सड़क को वर्षों तक चलने के उद्देश्य से बनाया गया था, वह कुछ ही सप्ताह में खराब हो गई।

जल निकासी की कमी बनी सबसे बड़ी वजह

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण के दौरान वर्षा जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी। तेज बारिश के बाद पानी को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला और वह सड़क के ऊपर से बहने लगा। लगातार बहते पानी ने सड़क के नीचे की मिट्टी को काट दिया, जिससे आधार कमजोर हो गया और सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ समय के लिए सड़क किसी बहते नाले जैसी दिखाई देने लगी थी। कई स्थानों पर पानी झरने की तरह सड़क के ऊपर से बह रहा था, जिससे सड़क की संरचना पूरी तरह प्रभावित हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण में जल निकासी व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक होती है। यदि वर्षा जल के लिए पर्याप्त निकास मार्ग नहीं बनाया जाए, तो नई सड़कें भी कम समय में क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।

ग्रामीणों ने लगाए घटिया निर्माण सामग्री के आरोप

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुसार बनाई गई होती, तो वह पहली ही बारिश में नहीं टूटती।

स्थानीय निवासी मुकेश सैनी का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण की अनदेखी की गई। उनके अनुसार, इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्माण प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठते हैं। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों पर करोड़ों और लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि निर्माण कुछ ही महीनों में खराब हो जाए तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का मामला बन जाता है।

पूर्व जनप्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल

क्षेत्र के पूर्व सरपंच और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह मार्ग आसपास की कई पंचायतों और गांवों के लिए महत्वपूर्ण है तथा इसके खराब होने से हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही प्रभावित हो रही है।

झुंझुनूं: पहली बारिश में बह गई 35 लाख रुपये की नई सड़क, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल; जांच और कार्रवाई के आदेश

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण पर बड़ी राशि खर्च की जाती है, लेकिन यदि परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जाती तो इसका सीधा नुकसान जनता को उठाना पड़ता है। उन्होंने निर्माण प्रक्रिया की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

सार्वजनिक निर्माण विभाग ने जांच का दिया आश्वासन

मामला सामने आने के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने घटना का संज्ञान लिया है। विभाग के सहायक अभियंता (AEN) ने कहा कि सड़क को हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त हो चुकी है और जल्द ही मौके का निरीक्षण किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि सड़क को नुकसान प्राकृतिक कारणों से हुआ या निर्माण में किसी प्रकार की तकनीकी कमी रही। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि सड़क की मरम्मत और यातायात बहाली को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि ग्रामीणों को अधिक समय तक परेशानी न झेलनी पड़े।

भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता पर फिर बहस

झुंझुनूं की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब भारत में बुनियादी ढांचे के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। सड़क, पुल, राजमार्ग और ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण को विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। हालांकि कई बार निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नई परियोजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी और रखरखाव पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि परियोजनाएं शुरुआती चरण में ही क्षतिग्रस्त होने लगें, तो इससे सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और जनता का भरोसा भी प्रभावित होता है।

ग्रामीणों की मांग: मरम्मत के साथ जवाबदेही तय हो

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि क्षेत्र में सामान्य आवागमन बहाल हो सके। साथ ही उन्होंने निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में भी इसी तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। उनका मानना है कि विकास कार्यों की वास्तविक सफलता तभी संभव है जब निर्माण गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की जाएं।

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