मुंबई के दहिसर वार्ड 7 में बीजेपी ने शिवसेना को मात दी। गणेश खनकर BMC के नए ग्रुप लीडर बन सकते हैं। चुनावी जीत ने राजनीतिक समीकरण बदले और स्थानीय सियासत में बीजेपी की ताकत को मजबूत किया।
Maharashtra BMC: मुंबई की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, गणेश खनकर को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC – Brihanmumbai Municipal Corporation) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का नया ग्रुप लीडर चुना गया है। पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर सहमति बन चुकी है और आधिकारिक घोषणा जल्द होने की संभावना है। बीजेपी नेतृत्व औपचारिक ऐलान की तैयारियों में जुटा हुआ है।
गणेश खनकर ने दहिसर इलाके के वार्ड नंबर 7 से जीत दर्ज कर बीएमसी में अपनी सीट सुरक्षित की थी। यह जीत सिर्फ एक पार्षद की जीत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे मुंबई की सियासत में बीजेपी की रणनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
दहिसर वार्ड नंबर 7 की सियासी अहमियत
दहिसर का वार्ड नंबर 7 लंबे समय से शिवसेना का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यहां पर शिवसेना का संगठनात्मक प्रभाव और स्थानीय पकड़ काफी मजबूत रही है। यही वजह है कि इस वार्ड में बीजेपी की जीत को बेहद अहम माना जा रहा है।
इस सीट पर जीत हासिल कर गणेश खनकर ने न केवल शिवसेना को चुनौती दी, बल्कि यह भी दिखा दिया कि बीजेपी अब मुंबई की नगर राजनीति में आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।
चुनाव से पहले का नाटकीय घटनाक्रम
इस वार्ड को लेकर चुनाव से पहले काफी नाटक और राजनीतिक उठा-पटक देखने को मिली। शुरुआत में यह चर्चा थी कि तेजस्वी घोषालकर उबाठा शिवसेना (UBT Shiv Sena) की ओर से मुंबई नगर निगम चुनाव में इसी वार्ड से उम्मीदवार होंगे। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर प्रचार भी शुरू हो गया था।
लेकिन चुनावी समीकरण उस वक्त बदल गए जब तेजस्वी घोषालकर ने शिवसेना छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर ली। इसके बाद उन्हें वार्ड नंबर 2 से बीजेपी का टिकट दिया गया। इस फैसले ने पूरे इलाके की राजनीति में हलचल मचा दी।
घोषालकर परिवार की रणनीति
तेजस्वी घोषालकर के बीजेपी में जाने के बाद शिवसेना की ओर से वार्ड नंबर 7 को बचाने की कोशिश तेज हो गई। विनोद घोषालकर की दूसरी बहू पूजा घोषालकर ने इस वार्ड से चुनाव प्रचार शुरू किया। माना जा रहा था कि परिवार का प्रभाव इस सीट को बचा लेगा।
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हालांकि वार्ड नंबर 7 ओपन कैटेगरी में आता है। इसी वजह से बाद में विनोद घोषालकर के बेटे सौरभ घोषालकर को शिवसेना की ओर से उम्मीदवार बनाया गया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद शिवसेना इस वार्ड पर अपनी पकड़ बनाए रखने में नाकाम रही।
वार्ड नंबर 2 में भी बदले सियासी समीकरण
दूसरी तरफ वार्ड नंबर 2 में भी राजनीतिक समीकरण दिलचस्प रहे। यहां से तेजस्विनी घोषालकर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ीं और जीत दर्ज की। इस जीत ने यह साफ कर दिया कि घोषालकर परिवार की राजनीति अब शिवसेना से अलग दिशा में जा चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने मुंबई की स्थानीय राजनीति में परिवारवाद, दल-बदल और रणनीतिक फैसलों की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया।
शिंदे गुट से जुड़ी उम्मीदें और हकीकत
पिछले बीएमसी चुनाव में इस वार्ड से शीतल म्हात्रे ने शिवसेना के टिकट पर जीत दर्ज की थी। बाद में शिवसेना के विभाजन के बाद यह माना जा रहा था कि यह सीट एकनाथ शिंदे गुट के पास बनी रहेगी।
स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी यही उम्मीद थी कि यह वार्ड शिंदे समर्थक शिवसेना के खाते में जाएगा। लेकिन नतीजों ने सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया। सीट सीधे बीजेपी के खाते में चली गई, जो अपने आप में बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
बीजेपी के भीतर नामांकन को लेकर मंथन
जब यह साफ हो गया कि वार्ड बीजेपी के खाते में जा सकता है, तब पार्टी के भीतर इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि उम्मीदवार कौन होगा। कई नामों पर विचार हुआ, लेकिन अंततः गणेश खनकर के नाम पर सहमति बनी।
गणेश खनकर को स्थानीय स्तर पर एक मजबूत संगठनकर्ता और जमीनी नेता माना जाता है। पार्टी नेतृत्व को भरोसा था कि वे शिवसेना के मजबूत किले में सेंध लगाने में सक्षम हैं।
बीजेपी और उबाठा शिवसेना के बीच सीधी टक्कर
चुनाव के दौरान वार्ड नंबर 7 में बीजेपी और उबाठा शिवसेना के बीच सीधी और कड़ी टक्कर देखने को मिली। दोनों दलों के उम्मीदवारों की पकड़ मजबूत थी। यही वजह थी कि मतगणना तक नतीजों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। कार्यकर्ता और उम्मीदवार आखिरी राउंड तक सांस रोके बैठे रहे। हर राउंड के साथ माहौल बदलता रहा। लेकिन अंततः बीजेपी ने बढ़त बनाई और गणेश खनकर विजयी घोषित हुए।









