SIR में छूटे और नए मतदाताओं के नाम फिर जुड़ेंगे, चुनाव आयोग चलाएगा विशेष अभियान; महाराष्ट्र पर खास नजर

चुनाव आयोग 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के दौरान छूटे पात्र मतदाताओं और नए 18 वर्षीय मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाएगा।

चुनाव आयोग SIR पूरा कर चुके 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाएगा। इसमें छूटे पात्र मतदाताओं और 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे। आयोग ने गलत तरीके से हटे नामों की जांच के निर्देश दिए हैं।

नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची से छूट गए पात्र लोगों के नाम दोबारा शामिल करने के लिए 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। अभियान के तहत उन लोगों की पहचान की जाएगी, जो SIR के दौरान मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके। इसके साथ ही 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके नए पात्र मतदाताओं को भी सूची में शामिल करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि SIR के दौरान यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से छूट गया है, तो उसकी जांच कर उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत फिर से मतदाता सूची में शामिल किया जाए। यह कदम मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नाम छूटने को लेकर उठे सवालों के बीच आया है।

20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा विशेष अभियान

चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को राज्यों को लिखित निर्देश भेजे थे। इसके बाद सभी संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी निर्देश दोहराए गए। विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना है, जो SIR के दौरान किसी कारण से छूट गए।

अभियान में नए मतदाताओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। जिन नागरिकों ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली है और जो मतदान के लिए पात्र हैं, वे Form 6 के जरिए अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। SIR पूरा हो चुके राज्यों में नए अभियान के दौरान सामान्य Form 6 प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा।

आयोग का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटना सीधे उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।

SIR में नाम छूटना अंतिम तौर पर नाम हटना नहीं

महाराष्ट्र में SIR के ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम फिलहाल शामिल नहीं हो पाए थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस आंकड़े को अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं माना जाना चाहिए। इन मामलों में अलग-अलग कारणों से Enumeration Form जमा नहीं हो पाए थे।

इन कारणों में मतदाता का घर पर नहीं मिलना, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, मृत्यु, डुप्लीकेट या किसी अन्य स्थान पर पहले से नाम दर्ज होना आदि शामिल हैं।

महाराष्ट्र में SIR से पहले मतदाता सूची में करीब 9.79 करोड़ मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में लगभग 7.72 करोड़ नाम शामिल किए गए थे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे दावा और आपत्ति प्रक्रिया के जरिए नाम शामिल कराने की मांग कर सकते हैं।

महाराष्ट्र में 1.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच

महाराष्ट्र में SIR के दौरान करीब 1.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी विसंगतियां मिली हैं, जिनके कारण उनके मामलों की अतिरिक्त जांच की जा रही है।

इनमें करीब 62.48 लाख मतदाताओं के रिश्तेदारों की जानकारी में विसंगति पाई गई, जबकि करीब 59.76 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड को पिछली मतदाता सूची में किसी रिश्तेदार से मैप नहीं किया जा सका।

यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि 1.22 करोड़ का आंकड़ा और 2.07 करोड़ का आंकड़ा अलग-अलग प्रक्रियाओं से संबंधित है। 2.07 करोड़ उन मतदाताओं का आंकड़ा है, जिनके Enumeration Form ड्राफ्ट प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके, जबकि 1.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में विशेष जांच की जरूरत बताई गई है।

गलत तरीके से हटे नामों की दोबारा होगी जांच

चुनाव आयोग ने अधिकारियों को SIR से पहले और उसके बाद की मतदाता सूचियों की तुलना करने को कहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से तो नहीं छूट गया।

यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर हुआ है, तो अधिकारी उसके मामले की दोबारा जांच करेंगे। इसमें यह भी देखा जाएगा कि संबंधित व्यक्ति किसी दूसरी जगह डुप्लीकेट मतदाता के रूप में दर्ज तो नहीं है और रिकॉर्ड में उसकी मृत्यु की जानकारी तो नहीं है।

जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति से Form 6 भरवाकर नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और बूथ लेवल एजेंटों की सहायता भी ली जाएगी।

BLO अब मतदाताओं के घर जाकर ले सकेंगे दस्तावेज

चुनाव आयोग ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने के भी निर्देश दिए हैं। जिन मतदाताओं को “unmapped” या रिकॉर्ड में “logical discrepancy” के आधार पर नोटिस मिला है, उन्हें हर मामले में खुद कार्यालय जाकर दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी।

अब Booth Level Officer (BLO) संबंधित मतदाता के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज हासिल कर सकते हैं। इसके बाद दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा और Electoral Registration Officer (ERO) उनकी जांच करेंगे।

यदि दस्तावेजों की जांच के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होती है, तो मतदाता को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का एक और अवसर दिया जाएगा। अंतिम निर्णय पूरी जांच और निर्धारित प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।

महाराष्ट्र में जल्दबाजी में नाम नहीं हटाने का निर्देश

महाराष्ट्र में SIR अभी प्रक्रिया में है। ऐसे में चुनाव आयोग ने अधिकारियों को विशेष सावधानी बरतने को कहा है। खासकर मुंबई शहर और मुंबई उपनगर में अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी की पूरी जांच की जाए।

SIR से जुड़े मामलों में नोटिस पाने वाले लोगों की सहायता के लिए विशेष कैंप भी आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य लोगों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर देना है।

महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 कर दी है, जबकि नोटिस से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर तक चल सकती है।

ECINet सॉफ्टवेयर की भी होगी समीक्षा

SIR से जुड़ी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले ECINet सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए भी चुनाव आयोग ने एक समिति बनाने का फैसला किया है। समिति में वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त के अलावा IIT या IIIT से एक स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होगा। जरूरत के अनुसार सॉफ्टवेयर में बदलाव किए जा सकते हैं।

यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब मतदाता डेटा और सॉफ्टवेयर से जुड़े कुछ मामलों पर सार्वजनिक बहस तेज हुई है। आयोग ने तकनीकी प्रणाली की समीक्षा के जरिए प्रक्रिया में संभावित खामियों की पहचान और सुधार का रास्ता चुना है।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट पर भी विवाद

SIR और Form 6 से जुड़े मुद्दों के बीच Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कुछ फैसलों को लेकर 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें Form 6 में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने और SIR से जुड़े कुछ फैसले शामिल थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने नियमों में बदलाव किए बिना Form 6 में अतिरिक्त हिस्सा जोड़ने को लेकर सवाल उठाए थे।

हालांकि, चुनाव आयोग ने बाद में कहा कि SIR समेत हाल के सभी फैसले आयोग की ओर से सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

Form 6 से हटाया गया अतिरिक्त SIR घोषणा-पत्र

SIR पूरा कर चुके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव आयोग ने Form 6 से अतिरिक्त SIR घोषणा-पत्र हटा दिया है। इसका मतलब है कि ऐसे राज्यों में SIR के बाद मतदाता सूची में नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन करने वालों को उस अतिरिक्त घोषणा-पत्र की जरूरत नहीं होगी।

इस बदलाव के बाद SIR के दौरान नाम छूटे पात्र मतदाताओं के लिए नाम दोबारा शामिल कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हो सकती है।

पात्र मतदाता का नाम सूची में रहना आयोग की प्राथमिकता

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची का उद्देश्य पात्र नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया में शामिल करना है। इसलिए SIR के दौरान छूटे पात्र मतदाताओं और नए 18 वर्षीय मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में जहां ड्राफ्ट सूची के दौरान करोड़ों रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जरूरत सामने आई है, वहां दावे, आपत्तियों और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल आयोग का विशेष अभियान SIR में छूटे पात्र मतदाताओं और नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने पर केंद्रित है। वहीं महाराष्ट्र में नामों की जांच, नोटिस, BLO की घर-घर पहुंच और दावों-आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

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