सोनभद्र में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही, बकाया होने के बावजूद जारी कर दिया कनेक्शन

सोनभद्र में लाखों रुपये बकाया दिखाने के बावजूद एक हिस्से में बिजली कनेक्शन जारी हुआ, जबकि दूसरे आवेदक को रोका गया। मामले की जांच की मांग उठी।

सोनभद्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक संपत्ति पर लाखों रुपये का बकाया दिखाने के बावजूद पहले कनेक्शन जारी कर दिया गया, जबकि दूसरे हिस्से के नए मालिक को कनेक्शन देने से रोका गया। मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंच गई है।

Sonbhadra: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बिजली विभाग की कार्यशैली को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। एक ही संपत्ति से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में विभाग के अलग-अलग रवैये ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर बकाया होने के बावजूद कनेक्शन जारी कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर नए आवेदन पर लाखों रुपये का बकाया दिखाकर कनेक्शन देने से इनकार कर दिया गया।

कनेक्शन आवेदन के बाद खुला पूरा मामला

राबर्ट्सगंज शहर के दीपनगर पोरखा क्षेत्र में स्थित एक पुराने मकान से जुड़ा यह मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायत के अनुसार, यह मकान पहले से जर्जर स्थिति में था और वहां बिजली कनेक्शन या मीटर जैसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं थी। समय के साथ संपत्ति के हिस्से अलग-अलग लोगों को बेचे गए।

बताया गया कि मकान के एक हिस्से को खरीदने वाले व्यक्ति ने नया निर्माण कराया और बिजली कनेक्शन भी प्राप्त कर लिया। बाद में दूसरे हिस्से की खरीद करने वाली महिला ने जब अपने हिस्से के लिए बिजली कनेक्शन का आवेदन किया, तब विभाग की ओर से उस संपत्ति पर लगभग दो लाख रुपये का बकाया दर्शा दिया गया।

एक ही संपत्ति पर दो अलग नियम?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि संपत्ति पर वास्तव में लाखों रुपये का बकाया था, तो पहले हिस्से को बिजली कनेक्शन कैसे जारी कर दिया गया। वहीं यदि कोई बकाया नहीं था, तो दूसरे आवेदक के सामने बकाया राशि का मुद्दा क्यों खड़ा किया गया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन कनेक्शन देने के बजाय विभागीय स्तर पर विभिन्न आपत्तियां उठाई जाने लगीं। इसके कारण उन्हें निर्माण कार्य के दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

निर्माण कार्य भी हुआ प्रभावित

बिजली कनेक्शन नहीं मिलने के कारण मकान निर्माण का काम प्रभावित हो रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्हें जनरेटर के माध्यम से निर्माण कार्य कराना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि नियमों का पालन समान रूप से नहीं किया जाएगा तो आम उपभोक्ताओं का भरोसा प्रभावित होगा।

अधिकारियों पर लगे गंभीर आरोप

शिकायत में कुछ विभागीय अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया और विभिन्न प्रकार के दबाव बनाने की कोशिश की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मामले के सामने आने के बाद उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई गई है। इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

जांच के बाद हो सकती है कार्रवाई

बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका नियमों के विपरीत पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विभाग का यह भी कहना है कि सरकार की नीति उपभोक्ताओं को पारदर्शी और आसान प्रक्रिया के तहत बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की है। ऐसे में यदि कहीं अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो उसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

यह मामला केवल एक उपभोक्ता की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बकाया राशि का विवाद कैसे उत्पन्न हुआ और क्या वास्तव में नियमों की अनदेखी कर बिजली कनेक्शन जारी किया गया था।

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