सोने-चांदी की तेजी ने म्युचुअल फंड निवेशकों की बढ़ाई संख्या, जनवरी में जुड़े 12 लाख नए निवेशक

जनवरी में म्युचुअल फंड में 12 लाख नए निवेशक जुड़े। सोने-चांदी की कीमतों में तेजी ने गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेशकों की रुचि बढ़ाई है।

जनवरी में म्युचुअल फंड में 12 लाख नए निवेशक जुड़े। सोने-चांदी की तेजी से गोल्ड और सिल्वर ETF व FOF योजनाओं में निवेश बढ़ा। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और पोर्टफोलियो में diversification बढ़ी।

Mutual Fund: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी ने म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में नई जान फूंक दी है। जनवरी महीने में निवेशकों की संख्या में जो बढ़ोतरी दर्ज की गई, वह पिछले 18 महीनों में सबसे अधिक रही। कीमती धातुओं में बढ़ती दिलचस्पी ने बड़ी संख्या में नए निवेशकों को गोल्ड और सिल्वर आधारित स्कीमों की ओर आकर्षित किया है।

जनवरी में म्युचुअल फंड उद्योग से करीब 12 लाख नए निवेशक जुड़े। इसके साथ कुल निवेशकों की संख्या बढ़कर 6.02 करोड़ पर पहुंच गई। यह वृद्धि 2025 की औसत मासिक बढ़ोतरी 5 लाख की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इससे साफ है कि सोने-चांदी की तेजी ने निवेशकों की सोच और निवेश रणनीति को प्रभावित किया है।

गोल्ड और सिल्वर ETF ने बनाई बढ़त

जनवरी में गोल्ड ETF और सिल्वर ETF ने फोलियो वृद्धि और शुद्ध निवेश के मामले में सक्रिय इक्विटी योजनाओं को पीछे छोड़ दिया। कुल फोलियो वृद्धि में इन दोनों का योगदान 55 प्रतिशत रहा।

यह आंकड़ा बताता है कि निवेशक अब सिर्फ इक्विटी पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि पोर्टफोलियो में diversification के लिए कीमती धातुओं को भी शामिल कर रहे हैं। सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

गोल्ड ETF के जरिए निवेश करना आसान और पारदर्शी तरीका माना जाता है। इसमें फिजिकल गोल्ड रखने की जरूरत नहीं होती, फिर भी कीमतों की चाल का फायदा मिल सकता है।

FOF के जरिए भी बढ़ा निवेश

केवल ETF ही नहीं, बल्कि फंड ऑफ फंड्स यानी FOF के जरिए भी निवेशकों ने कीमती धातुओं में बड़ा निवेश किया। जनवरी में गोल्ड और सिल्वर से जुड़े FOF में संयुक्त निवेश 33,503 करोड़ रुपये रहा।

यह आंकड़ा सक्रिय इक्विटी योजनाओं में हुए शुद्ध निवेश से करीब 40 प्रतिशत ज्यादा है। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अब सुरक्षित और स्थिर विकल्पों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं।

FOF के जरिए निवेश करने से निवेशकों को अलग-अलग फंडों में एक्सपोजर मिलता है और जोखिम का संतुलन बेहतर हो सकता है।

क्यों बढ़ रही है गोल्ड स्कीमों की लोकप्रियता

म्युचुअल फंड अधिकारियों का मानना है कि गोल्ड स्कीमों में निवेश उद्योग के लिए लंबे समय में बड़ा ग्राहक आधार तैयार कर सकता है। सोने की भारत में गहरी सांस्कृतिक स्वीकृति है। त्योहारों, शादियों और परंपराओं से इसका गहरा जुड़ाव है।

मिरे ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स इंडिया के उपाध्यक्ष और सीईओ स्वरूप आनंद मोहंती का कहना है कि गोल्ड स्कीमों में निवेश उद्योग के लिए सबसे अधिक ग्राहक जोड़ने का माध्यम बन सकता है। सोने को लेकर लोगों में भावनात्मक जुड़ाव भी है, जो निवेश निर्णयों को प्रभावित करता है।

कीमती धातुओं में निवेश का यह रुझान केवल मौजूदा निवेशकों तक सीमित नहीं है। पहली बार म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले लोग भी गोल्ड और सिल्वर आधारित स्कीमों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तेजी

हाल के महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई है। इस तेजी ने अलग-अलग अवधि के रिटर्न को बेहतर बनाया है। जब निवेशकों को अच्छे रिटर्न का अनुभव होता है, तो वे संबंधित निवेश विकल्पों में और अधिक पैसा लगाने के लिए प्रेरित होते हैं।

कीमती धातुओं को अक्सर अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश माना जाता है। वैश्विक आर्थिक हालात, ब्याज दरों में बदलाव और भू-राजनीतिक घटनाओं का असर भी सोने-चांदी की मांग पर पड़ता है।

इसी वजह से कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर ETF शामिल कर रहे हैं, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव के समय संतुलन बना रहे।

निवेशकों के व्यवहार में बदलाव

जनवरी के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि निवेशकों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है। पहले जहां अधिकतर निवेशक इक्विटी योजनाओं पर जोर देते थे, वहीं अब वे एसेट एलोकेशन को लेकर ज्यादा सजग हो रहे हैं।

Diversification की रणनीति अपनाते हुए निवेशक जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। सोना और चांदी पोर्टफोलियो में संतुलन लाने का काम कर सकते हैं, खासकर तब जब शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ती है।

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