सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी माहौल गर्म हो गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मामले को लेकर सहारनपुर जाने का ऐलान किया था। इसी क्रम में मेरठ की सरधना सीट से सपा विधायक अतुल प्रधान सोमवार को अपने समर्थकों के साथ सहारनपुर जाने की तैयारी में थे। पुलिस ने उनके आवास के बाहर पहुंचकर उन्हें रोक दिया और घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी। देखते ही देखते मौके पर विधायक के समर्थकों और पुलिस के बीच नोकझोंक की स्थिति बन गई। बाद में अतुल प्रधान की गाड़ी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने अपनी जीप भी सामने लगा दी।
पुलिस की कार्रवाई के विरोध में अतुल प्रधान और उनके समर्थकों ने नाराजगी जताई। रिपोर्ट के मुताबिक विधायक के घर के बाहर सुबह से ही पुलिस बल तैनात था। जब अतुल प्रधान सहारनपुर जाने के लिए अपनी गाड़ी में बैठने की कोशिश करने लगे तो पुलिस ने रास्ता रोक दिया। इसके बाद विधायक गाड़ी से बाहर आए और पुलिस अधिकारियों से उनकी तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ देर बाद वहां धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। समर्थकों को पुलिस ने किसी तरह पीछे किया।
मौके पर मौजूद समर्थकों की पुलिसकर्मियों से भी बहस हुई। इसी दौरान एक समर्थक की दरोगा से कहासुनी का वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है। समर्थक पुलिसकर्मी से सवाल करता नजर आया कि वह उसे घूर क्यों रहा है। इसके बाद माहौल और गरमा गया। पुलिसकर्मियों ने समर्थकों को पीछे हटने को कहा, जबकि समर्थक सहारनपुर जाने की अनुमति देने की मांग करते रहे। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी बड़े हिंसक टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अतुल प्रधान ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें आखिर कहीं तो जाने दिया जाए। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पुलिस से यह भी कहा कि उनकी अदालत में तारीख है और सरधना विधानसभा क्षेत्र में भी उनके कई कार्यक्रम निर्धारित हैं। विधायक ने पुलिस अधिकारी से यहां तक कहा कि अगर उन्हें जाने से रोकना है तो पुलिस उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर अदालत तक ले जाए और इसके बाद उनके दूसरे कार्यक्रमों में भी लेकर जाए।
अतुल प्रधान के आवास पर पुलिस की तैनाती रविवार से ही शुरू कर दी गई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि विधायक अपने साथियों के साथ सहारनपुर जा सकते हैं। सहारनपुर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई थीं और समाजवादी पार्टी ने अपने नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मौके पर भेजने का निर्णय लिया था। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है।
दरअसल, सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद को प्रशासन ने 5 सितंबर को ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन का कहना है कि यह सरकारी जमीन पर बना अनधिकृत निर्माण था और कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के बाद की गई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मस्जिद प्रबंधन की अपील को 2 सितंबर को जिला अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। दूसरी तरफ मस्जिद के मुतवल्ली ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि उन्हें पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सहारनपुर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सपा नेताओं का कहना है कि मामले की वास्तविक स्थिति जानने और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के लिए पार्टी का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर जाना चाहता है। प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कई नेताओं को वहां जाने से रोकने की कोशिश की है। इसी क्रम में अतुल प्रधान को भी मेरठ में रोक दिया गया।
सपा की ओर से 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के सहारनपुर जाने की योजना बनाई गई थी। रविवार को प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मुलाकात नहीं कर सका था। इसके बाद सोमवार को मुलाकात का समय तय होने की बात सामने आई। इसी बीच पुलिस ने पार्टी के कई नेताओं को उनके घरों पर रोक दिया। अतुल प्रधान भी इसी कार्रवाई की चपेट में आए।
अतुल प्रधान को रोकने के दौरान पुलिस ने उनके आवास के बाहर वाहनों की नाकेबंदी कर दी। जब विधायक ने अपनी गाड़ी निकालने की कोशिश की तो पुलिस की जीप को रास्ते में लगा दिया गया। इसके बाद विधायक और पुलिस के बीच बहस हुई। समर्थकों ने भी पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। काफी देर तक मौके पर तनाव जैसी स्थिति बनी रही, हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा।
विधायक ने सहारनपुर में हुई कार्रवाई को लेकर पुलिस से सवाल भी किए। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों को तोड़ा जा रहा है और पुलिस को आगे करके कार्रवाई की जा रही है। अतुल प्रधान का यह बयान उनके राजनीतिक विरोध के तौर पर सामने आया है। वहीं प्रशासन का कहना है कि सहारनपुर में कार्रवाई किसी धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी जमीन पर बताए गए अनधिकृत निर्माण के संबंध में न्यायिक प्रक्रिया के बाद की गई है।
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद मामला और संवेदनशील तब हो गया जब मलबा हटाने के दौरान वहां एक पुराना कुआं मिलने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक यह कुआं करीब 20 फीट गहरा बताया गया है। प्रशासन ने इसके ऐतिहासिक महत्व की जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की मदद लेने की बात कही है। फिलहाल इस कुएं के इतिहास और निर्माण काल को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
सहारनपुर में कार्रवाई के बाद सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी तरह की भीड़ या राजनीतिक गतिविधि के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। इसी वजह से सहारनपुर जाने वाले नेताओं पर नजर रखी जा रही है। मेरठ में अतुल प्रधान के आवास के बाहर भी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने समाजवादी पार्टी और भाजपा सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। विपक्षी नेता मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार और उसके समर्थक इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई कार्रवाई बता रहे हैं। भाजपा नेता संगीत सोम ने भी कहा है कि प्रशासन ने मस्जिद नहीं बल्कि कथित अवैध निर्माण हटाया है। ऐसे में अब विवाद केवल स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है।
अतुल प्रधान की हाउस अरेस्ट कार्रवाई के बाद उनके समर्थकों में भी नाराजगी देखी गई। समर्थकों का कहना है कि विधायक को अपने क्षेत्र से बाहर जाने और किसी घटना का जायजा लेने से रोकना उचित नहीं है। वहीं पुलिस का रुख कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर केंद्रित है। प्रशासन को आशंका है कि संवेदनशील मामले में बड़ी राजनीतिक भीड़ के पहुंचने से स्थिति बिगड़ सकती है।
फिलहाल अतुल प्रधान को मेरठ स्थित उनके आवास से सहारनपुर जाने नहीं दिया गया है। पुलिस और विधायक समर्थकों के बीच हुई नोकझोंक तथा धक्का-मुक्की के बाद भी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। दूसरी ओर सपा प्रतिनिधिमंडल के सहारनपुर जाने और प्रशासन से मुलाकात की कोशिशों के बीच राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं। आने वाले समय में इस मामले पर विपक्ष और सरकार के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
सहारनपुर मस्जिद प्रकरण में अदालत के आदेश, प्रशासन की कार्रवाई और विपक्ष के आरोपों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में मामले की कानूनी स्थिति और अदालत के आदेशों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की तस्वीर साफ होगी। फिलहाल अतुल प्रधान को रोकने की कार्रवाई ने इस विवाद को मेरठ तक पहुंचा दिया है और पुलिस से हुई नोकझोंक ने पूरे घटनाक्रम को और सुर्खियों में ला दिया है।








