मोरक्को से हजारों प्रवासियों के स्पेन के सेउटा एन्क्लेव में प्रवेश के बाद स्पेन सरकार ने सेना तैनात करने का फैसला किया है। सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, जबकि मोरक्को के साथ मिलकर प्रवासियों की वापसी और स्थिति सामान्य करने की कोशिश जारी है।
मेड्रिड: स्पेन ने उत्तरी अफ्रीका में स्थित अपने स्वायत्त क्षेत्र सेउटा (Ceuta) में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सेना तैनात करने का फैसला किया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब मोरक्को से हजारों प्रवासी सीमा पार कर स्पेनिश क्षेत्र में प्रवेश कर गए। अचानक बढ़ी इस आवाजाही ने स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और प्रवासी सहायता केंद्रों पर भारी दबाव डाल दिया है। स्पेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सशस्त्र बलों को सिविल गार्ड की सहायता के लिए तैनात किया जा रहा है ताकि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके और आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकें। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मोरक्को के साथ मिलकर सीमा पार करने वाले लोगों को जल्द से जल्द वापस भेजने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।
सेउटा क्यों है रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?
सेउटा उत्तरी अफ्रीका में मोरक्को के तट पर स्थित स्पेन का एक स्वायत्त शहर है। यह मुख्य भूमि स्पेन से जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के माध्यम से अलग है, लेकिन प्रशासनिक रूप से स्पेन और यूरोपीय संघ का हिस्सा है। सेउटा और मेलिला यूरोपीय संघ की अफ्रीका के साथ एकमात्र स्थलीय सीमाएं हैं। यही कारण है कि बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में अफ्रीका से यूरोप पहुंचने की कोशिश करने वाले प्रवासियों के लिए ये दोनों क्षेत्र लंबे समय से प्रमुख प्रवेश द्वार बने हुए हैं।
हजारों प्रवासियों ने पार की सीमा
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से सीमा पार करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। गुरुवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब हजारों लोग समुद्र के रास्ते तैरकर या सीमा अवरोधों को पार कर सेउटा पहुंचने लगे। रातभर भी लोगों का आना जारी रहा। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में बड़ी संख्या में युवा प्रवासियों को सड़कों पर सोते हुए और सीमा के आसपास अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रवासियों के बीच झड़पों की भी खबरें सामने आईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों ने रबर ट्यूब और अन्य अस्थायी साधनों की मदद से समुद्र पार करने की कोशिश की। इस दौरान कई लोगों की जान भी चली गई, हालांकि आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं हुई है।
मेलिला में भी बढ़ा दबाव
सेउटा के अलावा स्पेन के दूसरे अफ्रीकी स्वायत्त क्षेत्र मेलिला (Melilla) में भी लगभग 300 से 400 लोगों के सीमा पार करने की सूचना मिली है। दोनों शहरों में प्रवासी स्वागत केंद्र अपनी क्षमता से अधिक लोगों को संभाल रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त संसाधन और तत्काल सहायता की मांग की है।
स्पेन और मोरक्को मिलकर कर रहे हैं कार्रवाई
स्पेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि मोरक्को के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है ताकि सीमा पार करने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस भेजा जा सके। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने सीमा पार करने की कोशिश क्यों की और इस दौरान मोरक्को की ओर से सुरक्षा व्यवस्था किस स्तर तक प्रभावी रही। सीमा के मोरक्को वाले हिस्से में सुरक्षा बलों द्वारा वाटर कैनन का उपयोग कर लोगों को रोकने की भी खबरें सामने आई हैं।

प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ का दौरा
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने स्थिति को गंभीर बताते हुए सेउटा का दौरा करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य सीमा पर सामान्य स्थिति बहाल करना, स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मानवीय सहायता उपलब्ध कराना है। सरकार ने स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल, राहत संसाधन और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
इटली की प्रतिक्रिया से बढ़ा राजनीतिक विवाद
सेउटा की स्थिति ने यूरोप में राजनीतिक बहस भी तेज कर दी है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि सरकार स्पेन के साथ खुले सीमा समझौते शेंगेन (Schengen) को लेकर असाधारण कदमों पर विचार कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि सेउटा की घटनाएं यह दिखाती हैं कि अनियंत्रित अवैध प्रवासन यूरोप की सीमाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इटली अकेले ऐसा कदम लागू नहीं कर सकता, क्योंकि शेंगेन व्यवस्था कई यूरोपीय देशों की साझा सहमति पर आधारित है।
स्पेन ने इटली की टिप्पणियों पर जताई आपत्ति
स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने इटली की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि प्रवासन जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूरोपीय साझेदार देशों से सहयोग और एकजुटता की उम्मीद की जाती है, न कि ऐसे बयानों की जो विवाद को बढ़ाएं। स्पेन ने इस मुद्दे पर इटली के राजदूत को भी तलब किया।
2021 जैसी स्थिति की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा घटनाक्रम मई 2021 की याद दिलाता है, जब कुछ ही दिनों में लगभग 8,000 लोग सेउटा में प्रवेश कर गए थे। उस समय भी स्पेन और मोरक्को के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया था और सीमा सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस हुई थी। हाल के वर्षों में स्पेन ने सीमा निगरानी बढ़ाने, अवरोधों को मजबूत करने और मोरक्को के साथ सहयोग बढ़ाने जैसे कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद अवैध प्रवासन की चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
यूरोप के लिए क्यों अहम है यह संकट?
सेउटा और मेलिला केवल स्पेन के लिए ही नहीं बल्कि पूरे यूरोपीय संघ के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं। यदि इन सीमाओं पर दबाव बढ़ता है तो इसका असर यूरोप की आव्रजन नीति, सीमा सुरक्षा और सदस्य देशों के बीच सहयोग पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक सहयोग, कानूनी प्रवासन व्यवस्था और मानव तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई जैसी दीर्घकालिक रणनीतियां भी जरूरी होंगी।











