Stonehenge के Altar Stone की पहेली सुलझने के करीब, वैज्ञानिकों ने खोजा 700 किमी का सफर

नई रिसर्च के अनुसार Stonehenge का Altar Stone पहले ग्लेशियरों से Doggerland पहुंचा, फिर नवपाषाण काल के लोगों ने इसे इंग्लैंड तक पहुंचाया।

ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि Stonehenge का Altar Stone ग्लेशियरों के जरिए स्कॉटलैंड से Doggerland तक पहुंचा था। इसके बाद नवपाषाण काल के लोगों ने इसे दक्षिणी इंग्लैंड तक पहुंचाया होगा।

लंदन: Stonehenge के सबसे रहस्यमय पत्थरों में से एक Altar Stone की उत्पत्ति और यात्रा को लेकर नई रिसर्च सामने आई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि छह टन वजनी यह पत्थर पहले हिमयुग के दौरान ग्लेशियरों द्वारा स्कॉटलैंड से दक्षिण की ओर लाया गया और बाद में नवपाषाण काल की मानव बस्तियों ने इसे Stonehenge तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

स्कॉटलैंड से शुरू हुई Altar Stone की लंबी यात्रा

Stonehenge के केंद्र में स्थित छह टन वजनी Altar Stone लंबे समय से पुरातत्वविदों के लिए रहस्य बना हुआ है। पहले की रिसर्च में यह पता चल चुका था कि यह विशाल बलुआ पत्थर उत्तर-पूर्वी स्कॉटलैंड के Orcadian Basin क्षेत्र से आया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं था कि लगभग 700 किलोमीटर दूर दक्षिणी इंग्लैंड तक इसे कैसे पहुंचाया गया।

Stonehenge के Altar Stone की पहेली सुलझने के करीब, वैज्ञानिकों ने खोजा 700 किमी का सफर

अब ब्रिटेन की Sheffield Hallam University और ऑस्ट्रेलिया की Curtin University के शोधकर्ताओं ने एक नई व्याख्या पेश की है। उनके अनुसार, पत्थर की यात्रा का शुरुआती हिस्सा प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए पूरा हुआ हो सकता है।

हिमयुग के ग्लेशियरों ने निभाई अहम भूमिका

शोध के मुताबिक, अंतिम हिमयुग के दौरान विशाल बर्फीली चादरें ब्रिटेन के बड़े हिस्सों में फैली हुई थीं। वैज्ञानिकों ने प्राचीन ग्लेशियरों की गतिविधियों का मॉडल तैयार किया और पाया कि ये बर्फीले प्रवाह Altar Stone को स्कॉटलैंड से उत्तर सागर के नीचे स्थित प्राचीन भूभाग Doggerland तक ले जा सकते थे।

Doggerland कभी ब्रिटेन और यूरोप की मुख्य भूमि को जोड़ने वाला भूभाग था, जो बाद में समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण डूब गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि Dogger Bank क्षेत्र में इतने बड़े पत्थरों का कोई प्राकृतिक स्रोत नहीं है, इसलिए वहां ऐसे पत्थरों की मौजूदगी ग्लेशियरों द्वारा परिवहन की संभावना को मजबूत करती है।

अंतिम चरण इंसानों ने किया पूरा

अध्ययन में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि ग्लेशियर Altar Stone को सीधे दक्षिणी इंग्लैंड तक लेकर गए थे। इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि पत्थर की यात्रा का अंतिम और सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा नवपाषाण काल के समुदायों ने पूरा किया होगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, लोगों ने समुद्री तटों, नदियों और स्थलीय मार्गों का उपयोग कर इस विशाल पत्थर को धीरे-धीरे Stonehenge तक पहुंचाया। यह प्रक्रिया कई पीढ़ियों तक चली हो सकती है और लगभग 5,000 वर्ष पहले इसे स्मारक का हिस्सा बनाया गया होगा।

सांस्कृतिक महत्व भी हो सकता है वजह

वैज्ञानिकों का मानना है कि Altar Stone केवल निर्माण सामग्री नहीं था, बल्कि इसका सांस्कृतिक या धार्मिक महत्व भी रहा होगा। संभव है कि Doggerland में रहने वाले समुदायों ने इस पत्थर को विशेष महत्व दिया हो और पीढ़ियों तक संरक्षित रखा हो। बाद में यही सांस्कृतिक मूल्य इसे Stonehenge तक ले जाने का कारण बना।

हालांकि पत्थर के सटीक मार्ग को लेकर अभी भी कुछ सवाल बाकी हैं, लेकिन यह अध्ययन Stonehenge के निर्माण से जुड़े सबसे बड़े रहस्यों में से एक को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह शोध यह भी दिखाता है कि नवपाषाण काल के समुदाय संगठन, योजना और लंबी दूरी के परिवहन जैसी जटिल गतिविधियों में पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्षम थे।

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