ऑस्ट्रेलिया के दूरस्थ द्वीपों पर बर्ड फ्लू का कहर: 75% से अधिक सील पप्स की मौत

ऑस्ट्रेलिया के दूरस्थ द्वीपों पर बर्ड फ्लू के कारण 75% से अधिक बेबी सील की मौत हो गई है। वैज्ञानिक अध्ययन मे 13 हजार से ज्यादा सील पप्स के मरने की पुष्टि हुई है

ऑस्ट्रेलिया के दूरस्थ द्वीपों पर बर्ड फ्लू के कारण 75% से अधिक बेबी सील की मौत हो गई है। वैज्ञानिक अध्ययन में 13 हजार से ज्यादा सील पप्स के मरने की पुष्टि हुई है, जिससे समुद्री जीवों पर गंभीर संकट बढ़ गया है।

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के बेहद दूरस्थ हर्ड (Heard) और मैकडोनाल्ड (McDonald) द्वीपों पर बर्ड फ्लू (H5N1) ने भारी तबाही मचाई है। नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि इस वायरस ने दक्षिणी एलीफेंट सील के नवजात बच्चों की आबादी को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यह क्षेत्र समुद्री पक्षियों और सीलों के प्रजनन के लिए जाना जाता है और यहां लाखों की संख्या में जीव पाए जाते हैं।

13,000 से अधिक सील पप्स की मौत का अनुमान

वैज्ञानिकों द्वारा ड्रोन सर्वे और ग्राउंड स्टडी के आधार पर तैयार रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि लगभग 17,000 सील पप्स में से करीब 13,000 की मौत हो चुकी है। यह कुल आबादी का 75 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा है। कुछ क्षेत्रों में स्थिति और भी भयावह रही, जहां मृत्यु दर लगभग 97 प्रतिशत तक पहुंच गई। शोधकर्ताओं ने बताया कि सर्वेक्षण के समय भी कई नवजात सील मर रहे थे, जिससे वास्तविक आंकड़ा और अधिक हो सकता है।

H5N1 वायरस का कई प्रजातियों में फैलाव

यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका BioRxiv में प्रकाशित हुआ है और अभी तक इसका पियर-रिव्यू नहीं हुआ है। रिपोर्ट में पाया गया कि H5N1 वायरस केवल सील तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नौ अलग-अलग प्रजातियों में इसके संक्रमण के संकेत मिले हैं। इनमें दक्षिणी एलीफेंट सील, किंग पेंगुइन, जेंटू पेंगुइन और अंटार्कटिक फर सील जैसी प्रजातियां शामिल हैं। यह संकेत देता है कि वायरस धीरे-धीरे पूरे क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के दूरस्थ द्वीपों पर बर्ड फ्लू का कहर: 75% से अधिक सील पप्स की मौत

पेंगुइन और अन्य समुद्री जीव भी प्रभावित

शोध में यह भी पाया गया कि पेंगुइन आबादी पर भी इसका असर पड़ा है, हालांकि सील की तुलना में कम। किंग पेंगुइन की आबादी में कुछ सौ वयस्क पक्षियों की मौत दर्ज की गई है, जो सामान्य से अधिक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव भले ही कुल आबादी का छोटा हिस्सा हो, लेकिन यह वायरस के फैलाव और उसकी गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

ऑस्ट्रेलिया में पहली बार H5N1 की पुष्टि

यह पहली बार है जब ऑस्ट्रेलिया के किसी बाहरी क्षेत्र में H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। अब तक ऑस्ट्रेलिया ऐसा महाद्वीप था जहां यह वायरस नहीं पाया गया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह वायरस संभवतः प्रवासी पक्षियों के माध्यम से इन द्वीपों तक पहुंचा, जो लगभग 1,800 किलोमीटर दूर स्थित फ्रांसीसी क्रोसेट द्वीपों से आए थे। यह घटना वायरस के वैश्विक फैलाव को और स्पष्ट करती है।

ड्रोन सर्वे और कठिन परिस्थितियों में हुआ अध्ययन

इन द्वीपों तक पहुंचना बेहद कठिन है, इसलिए वैज्ञानिकों ने ड्रोन सर्वे और सीमित ग्राउंड विजिट के जरिए डेटा एकत्र किया। शोधकर्ताओं ने नौ प्रजातियों से नमूने लेकर संक्रमण की जांच की, जिसमें कई प्रजातियों में H5N1 की पुष्टि हुई। यह अध्ययन इस बात को दर्शाता है कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी वैश्विक वायरस कितनी तेजी से फैल सकते हैं।

वैज्ञानिकों की चेतावनी और वायरस का विस्तार

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस अब सब-अंटार्कटिक क्षेत्रों में पूर्व दिशा की ओर फैल रहा है। इससे पहले भी ऐसे ही प्रभाव दक्षिण जॉर्जिया जैसे क्षेत्रों में देखे गए थे, जहां एलीफेंट सील की आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो यह वैश्विक समुद्री जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार की चिंता और प्रतिक्रिया

ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण मंत्री ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का संकेत है कि देश को H5N1 वायरस के संभावित प्रसार के लिए और गंभीर तैयारी करनी होगी। सरकार का मानना है कि यह वायरस भविष्य में मुख्य भूमि तक भी पहुंच सकता है, इसलिए निगरानी और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना जरूरी है।

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