ISIS से जुड़ी मानी जाने वाली महिलाएं और बच्चे वर्षों बाद आज ऑस्ट्रेलिया लौट रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि कुछ लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा और उन पर जांच चलेगी, जबकि बच्चों को पुनर्वास और सहायता कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया में आज एक संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामला सामने आ रहा है, जहां चार महिलाओं और नौ बच्चों का एक समूह वर्षों तक सीरिया के उत्तर-पूर्वी शरणार्थी शिविरों में रहने के बाद वापस लौट रहा है। इस समूह को आमतौर पर मीडिया में “ISIS ब्राइड्स” कहा जाता है। ये सभी लोग दोहा के रास्ते सिडनी और मेलबर्न पहुंचने वाले हैं। सुरक्षा कारणों को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने एयरपोर्ट पर कड़ी निगरानी और संभावित गिरफ्तारी की तैयारी की है।
एयरपोर्ट पर पुलिस तैनाती और गिरफ्तारी की संभावना
ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस (AFP) की आयुक्त क्रिसी बैरेट ने पुष्टि की है कि कुछ लोगों को देश में पहुंचते ही गिरफ्तार किया जा सकता है, जबकि कुछ के खिलाफ आगे जांच जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही इस समूह की निगरानी के लिए तैयार हैं।
बैरेट ने कहा कि सभी संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई गई हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।
बच्चों के लिए पुनर्वास और सहायता कार्यक्रम
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि लौट रहे बच्चों को विशेष पुनर्वास कार्यक्रमों से गुजरना होगा। इनमें मानसिक स्वास्थ्य सहायता, सामाजिक एकीकरण (community integration) और उग्रवाद विरोधी शिक्षा कार्यक्रम शामिल होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बच्चे लंबे समय तक संघर्ष क्षेत्र और शरणार्थी शिविरों में कठिन परिस्थितियों में रहे हैं, जहां शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी थी। ऐसे में उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

वर्षों से सीरिया के कैंपों में रह रहा था समूह
यह समूह कई वर्षों से सीरिया के उन शरणार्थी शिविरों में रह रहा था, जहां वे उस समय पहुंचे थे जब उनके पति या पिता इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़े संघर्षों में मारे गए या पकड़े गए थे। इन शिविरों में जीवन बेहद कठिन माना जाता है, जहां बुनियादी सुविधाओं की भी कमी रहती है।
इससे पहले भी इस समूह ने ऑस्ट्रेलिया लौटने की कोशिश की थी, लेकिन फरवरी में स्थानीय अधिकारियों ने उनकी वापसी को रोक दिया था। अब यह समूह दमिश्क से होकर वापसी कर रहा है।
सरकार और खुफिया एजेंसियों की पहले से तैयारी
ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि देश की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां 2014 से ही इस तरह के मामलों के लिए तैयारी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार को उनके यात्रा कार्यक्रम की जानकारी टिकट बुक होने के बाद मिली थी, जिसके बाद सभी आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए गए।
सरकार का यह भी कहना है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी, और सभी लौटने वाले व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
ASIO का बयान: तत्काल खतरा नहीं, लेकिन निगरानी जारी
ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (ASIO) के प्रमुख माइक बर्गेस ने कहा कि फिलहाल इस समूह से कोई तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन उन पर नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति में संदिग्ध गतिविधियां पाई जाती हैं, तो संयुक्त आतंकवाद विरोधी टीम तुरंत कार्रवाई करेगी।
बर्गेस ने यह भी कहा कि “लोगों का व्यवहार ही आगे की कार्रवाई तय करेगा।”
बाल अधिकार और मानवाधिकार संगठनों की चिंता
सेव द चिल्ड्रन ऑस्ट्रेलिया के सीईओ मैट टिंकलर ने कहा कि लौट रहे समूह में लगभग दो-तिहाई बच्चे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ध्यान महिलाओं के बजाय बच्चों के पुनर्वास पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ये बच्चे ऐसे वातावरण में बड़े हुए हैं जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की भारी कमी थी, और अब उन्हें एक स्थिर जीवन देने की जरूरत है।









