एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में सूडान के एल-फाशेर में RSF पर हत्या, जातीय सफाए, बलात्कार, यौन दासता और मानवता के खिलाफ अपराधों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय जांच, जवाबदेही और तत्काल युद्धविराम की मांग की गई है।
खार्तूम: सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) की नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। संगठन ने आरोप लगाया है कि अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने पश्चिमी दारफुर के एल-फाशेर (El-Fasher) शहर पर नियंत्रण स्थापित करने के अभियान के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध और जातीय सफाए जैसी गंभीर घटनाओं को अंजाम दिया। रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक चली घेराबंदी के दौरान नागरिकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया और बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ।
तीन साल से जारी है सत्ता संघर्ष
सूडान अप्रैल 2023 से गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। यह संघर्ष देश की नियमित सेना सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच सत्ता संघर्ष के कारण शुरू हुआ था। शुरुआत राजधानी खार्तूम से हुई, लेकिन धीरे-धीरे हिंसा पश्चिमी दारफुर समेत कई इलाकों तक फैल गई। एल-फाशेर इस संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन गया, जहां महीनों तक दोनों पक्षों के बीच भीषण लड़ाई चली।
एमनेस्टी की रिपोर्ट में गंभीर आरोप
एमनेस्टी इंटरनेशनल की जांच में दावा किया गया है कि एल-फाशेर और उसके आसपास के क्षेत्रों में RSF के लड़ाकों ने बड़े पैमाने पर नागरिकों पर अत्याचार किए। रिपोर्ट के अनुसार, लोगों की हत्या की गई, उन्हें जबरन उनके घरों से बेदखल किया गया, अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और यातनाएं दी गईं। महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार तथा यौन हिंसा के कई मामले सामने आए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई लोगों को दास बनाकर रखा गया और जातीय पहचान के आधार पर उनका उत्पीड़न किया गया। एमनेस्टी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य इतने गंभीर हैं कि वे नरसंहार (Genocide) से जुड़े मामलों की जांच में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बच्चों को भी नहीं बख्शा गया
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संघर्ष का सबसे भयावह असर बच्चों पर पड़ा है। संगठन के अनुसार, कई मामलों में बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया गया। कुछ बच्चों की हत्या कर दी गई, कई घायल हुए, उनका अपहरण किया गया और उन्हें जबरन सशस्त्र समूहों में शामिल किया गया। एमनेस्टी ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है और कहा है कि बच्चों के खिलाफ इस स्तर की हिंसा बेहद चिंताजनक है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई दर्दनाक कहानी
रिपोर्ट तैयार करने के दौरान एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 200 से अधिक पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। एक 17 वर्षीय किशोर ने बताया कि दक्षिणी एल-फाशेर के अबू जेरेगा इलाके में हमलावरों ने पहले उसे बांधा, फिर डंडों और हथियारों से पीटा और बाद में उसके पैर में गोली मार दी। उसने बताया कि उसी हमले में उसके आठ चचेरे भाइयों की मौत हो गई, जिनमें कई नाबालिग बच्चे भी शामिल थे। घायल होने के बाद अब वह बैसाखियों के सहारे चल रहा है।
जातीय पहचान के आधार पर बनाए गए निशाना
एमनेस्टी ने उपग्रह चित्रों, वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर कहा है कि कई हमले जातीय पहचान के आधार पर किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, RSF से जुड़े कुछ अरब लड़ाकों ने स्थानीय गैर-अरब समुदायों, विशेष रूप से जघावा (Zaghawa) समुदाय के लोगों को निशाना बनाया। कई गवाहों ने बताया कि हमलों के दौरान जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि हिंसा केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि जातीय आधार पर भी केंद्रित थी।

यौन हिंसा को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप
संयुक्त राष्ट्र पहले भी चेतावनी दे चुका है कि सूडान के गृहयुद्ध में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। एमनेस्टी की रिपोर्ट भी इसी बात की पुष्टि करती है। संगठन के अनुसार, कई महिलाओं और लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार, यौन शोषण और यौन दासता जैसी घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की हिंसा का उद्देश्य केवल पीड़ितों को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि पूरे समुदाय में भय का माहौल पैदा करना भी था।
RSF ने आरोपों को पहले भी किया है खारिज
एमनेस्टी की ताजा रिपोर्ट पर RSF की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इससे पहले संगठन ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है। RSF का कहना रहा है कि यदि कुछ व्यक्तिगत स्तर पर घटनाएं हुई भी हैं तो उनकी जांच की जा रही है, लेकिन उन घटनाओं के पैमाने को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
दोनों पक्षों पर लगे हैं युद्ध अपराध के आरोप
सूडान के गृहयुद्ध में केवल RSF ही नहीं बल्कि नियमित सेना SAF पर भी युद्ध अपराधों के आरोप लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने दोनों पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील की है। हालांकि दोनों पक्ष इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र पहले भी जता चुका है चिंता
संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही एल-फाशेर की स्थिति को बेहद गंभीर बताया था। संगठन के अनुसार, शहर पर हमलों के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए और हालात में नरसंहार जैसे संकेत दिखाई दिए। संयुक्त राष्ट्र लगातार युद्धविराम लागू करने और प्रभावित इलाकों तक मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग करता रहा है।
दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में शामिल है सूडान
लगातार जारी संघर्ष ने सूडान को दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में बदल दिया है। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और करोड़ों लोग भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सुरक्षित आश्रय जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित हैं। सहायता एजेंसियों का कहना है कि यदि जल्द ही हिंसा नहीं रुकी तो मानवीय स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग तेज
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। संगठन का कहना है कि सूडान में तुरंत युद्धविराम लागू कराया जाना चाहिए, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।











