सूडान गृहयुद्ध: यौन हिंसा को ‘युद्ध के हथियार’ के रूप में इस्तेमाल, संयुक्त राष्ट्र की चौंकाने वाली रिपोर्ट

UN रिपोर्ट के अनुसार सूडान में युद्ध के दौरान यौन हिंसा को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा। हजारों लोग प्रभावित, हालात और मानवीय संकट गहराता जा रहा है।

UN की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सूडान के गृहयुद्ध में यौन हिंसा को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। हजारों महिलाएं और बच्चे प्रभावित हैं। हालात गंभीर हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की अपील की गई है।

 खारतूम: अफ्रीकी देश सूडान में जारी भीषण गृहयुद्ध एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता का बड़ा विषय बन गया है। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि इस संघर्ष में यौन हिंसा को बड़े पैमाने पर “युद्ध के हथियार” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं और बच्चों सहित हजारों लोग इस क्रूरता का शिकार हुए हैं, जबकि कई मामलों में पुरुष और किशोर भी प्रभावित हुए हैं।

यह युद्ध 2023 से शुरू हुआ था, जब सूडानी सेना और अर्धसैनिक बल Rapid Support Forces के बीच सत्ता और नियंत्रण को लेकर संघर्ष भड़क उठा था। तब से देश लगातार हिंसा, विस्थापन और मानवीय संकट से जूझ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय United Nations Human Rights Office ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 546 से अधिक यौन हिंसा की घटनाओं की पुष्टि की गई है। इनमें सामूहिक दुष्कर्म, यौन दासता और अन्य अमानवीय अपराध शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 838 पीड़ितों की पहचान हुई है, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और लड़कियों की है। इसके अलावा पुरुष और बच्चे भी इन घटनाओं से प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि असली आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं क्योंकि कई पीड़ित डर, सामाजिक कलंक और असुरक्षा के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा है कि इस तरह की हिंसा स्पष्ट रूप से “युद्ध अपराध” है और यदि यह व्यापक या योजनाबद्ध रूप से की जाए, तो यह मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आती है।

यौन हिंसा बन रही ‘युद्ध का हथियार’

रिपोर्ट में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि यौन हिंसा का उपयोग केवल व्यक्तिगत अपराध के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीति के रूप में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों में भय फैलाना, समुदायों को तोड़ना और उन्हें विस्थापित करना है। विशेष रूप से RSF और उससे जुड़े मिलिशिया समूहों पर इन घटनाओं में अधिक संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं, हालांकि सूडानी सेना और उसके सहयोगी बलों पर भी कुछ मामलों में ऐसी हिंसा के आरोप दर्ज किए गए हैं। 

मानवाधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रवृत्ति युद्ध के नियमों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का गंभीर उल्लंघन है, जो वैश्विक समुदाय के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है।

सूडान गृहयुद्ध: यौन हिंसा को ‘युद्ध के हथियार’ के रूप में इस्तेमाल, संयुक्त राष्ट्र की चौंकाने वाली रिपोर्ट

एल-ओबेद में बढ़ता तनाव और संभावित हमला

सूडान का शहर एल-ओबेद (El-Obeid) वर्तमान में संघर्ष का एक नया केंद्र बन गया है। यह शहर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिम और पूर्व सूडान को जोड़ता है और तेल संसाधनों के नजदीक स्थित है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, RSF इस शहर पर ड्रोन हमले कर रहा है और आपूर्ति मार्गों को बाधित कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही यहां बड़ा सैन्य हमला हो सकता है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper ने चेतावनी दी है कि एल-ओबेद “भयावहता की कगार” पर खड़ा है। 

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है। शहर में लगभग 2 लाख से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं, जिनमें अधिकतर विस्थापित नागरिक शामिल हैं। लगातार हमलों और बुनियादी सेवाओं की कमी के कारण लोगों का जीवन बेहद कठिन हो गया है।

मानवीय संकट: भूख, विस्थापन और डर

Sudan में जारी इस युद्ध ने दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र और सहायता एजेंसियों के अनुसार, अब तक 11 मिलियन से अधिक लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं, जबकि लगभग 28 मिलियन लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं।

एल-ओबेद और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में रहने वाले लोग लगातार डर के साए में जी रहे हैं। ड्रोन हमलों और गोलाबारी के बीच आम नागरिकों के लिए भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाएं भी लगभग समाप्त हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, हालात इतने खराब हैं कि वे खुद को असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई परिवारों को नहीं पता कि वे आगे कहां जाएं।

एल-फशेर की भयावह यादें और अंतरराष्ट्रीय चिंता

पिछले वर्ष एल-फशेर (El-Fasher) शहर में RSF के कब्जे के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ तीन दिनों में 6000 से अधिक लोगों की जान गई थी। इस घटना को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने “नरसंहार जैसे हालात” के रूप में देखा था। अब आशंका जताई जा रही है कि एल-ओबेद में भी वैसी ही स्थिति दोहराई जा सकती है यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और अपील

वैश्विक स्तर पर कई देशों ने सूडान में तत्काल युद्धविराम की मांग की है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड और नॉर्वे ने संयुक्त बयान जारी कर हिंसा रोकने की अपील की है। इन देशों ने कहा है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो एल-ओबेद में बड़े पैमाने पर मानवीय आपदा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय नेताओं का मानना है कि सूडान में चल रहा संघर्ष अब केवल आंतरिक युद्ध नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी खतरा बन चुका है।

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