राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 38 करने से जुड़े अध्यादेश के 10 दिन बाद न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया में तेजी देखी गई है।
नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है। इन नामों में चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। सिफारिश किए गए नामों में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, बॉम्बे हाईकोर्ट, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के साथ-साथ वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना का नाम शामिल है। यदि इन नियुक्तियों को मंजूरी मिलती है, तो सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या मौजूदा 32 से बढ़कर 37 हो जाएगी, जिससे केवल एक पद रिक्त रहेगा।
राष्ट्रपति द्वारा न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के बाद तेजी से प्रक्रिया
यह सिफारिश उस समय आई है जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 38 तक बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद कॉलेजियम की यह पहली बड़ी सिफारिश मानी जा रही है, जिसमें शीर्ष अदालत की संरचना को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, कॉलेजियम की बैठक में नामों को अंतिम रूप देने से पहले विस्तृत चर्चा हुई, और जिन नामों पर मतभेद थे उन्हें सूची से हटा दिया गया। यह बैठक सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुई, जिसमें कई वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल थे।
सिफारिश किए गए न्यायाधीशों के नाम
कॉलेजियम द्वारा जिन पांच नामों की सिफारिश की गई है, वे इस प्रकार हैं—
- न्यायमूर्ति शील नागू – वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर – बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
- न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- न्यायमूर्ति अरुण पल्ली – जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना – सुप्रीम कोर्ट बार से सीधे पदोन्नति की सिफारिश
इन नामों की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदन के बाद लिया जाएगा।

वी. मोहना: बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाली संभावित दूसरी महिला
वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना का नाम इस सूची में विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि यदि उनकी नियुक्ति होती है तो वे न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के बाद बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली दूसरी महिला बन जाएंगी। वी. मोहना एक अनुभवी वकील हैं, जिन्होंने 37 वर्षों से अधिक समय तक कानूनी क्षेत्र में काम किया है।
वह कोयंबटूर की रहने वाली हैं और उन्होंने 1988 में कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद 1996 में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड की योग्यता हासिल की थी। 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था। वे अपने परिवार में पहली पीढ़ी की वकील हैं और विभिन्न संवैधानिक एवं आपराधिक मामलों में विशेषज्ञता रखती हैं।
न्यायमूर्ति शील नागू का प्रोफाइल और अनुभव
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू न्यायिक प्रशासन और संवैधानिक मामलों में लंबा अनुभव रखते हैं। वे पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहे और बाद में मुख्य न्यायाधीश के पद पर पहुंचे। न्यायमूर्ति नागू उस आंतरिक जांच समिति का भी हिस्सा रहे हैं, जिसका गठन दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए किया गया था। इस मामले में न्यायिक प्रणाली की पारदर्शिता और आंतरिक अनुशासन को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी।
उनकी संभावित नियुक्ति के बाद उनका कार्यकाल लगभग साढ़े तीन वर्ष का होगा और वे दिसंबर 2029 में सेवानिवृत्त होंगे। इन पांच नियुक्तियों के बाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता और न्यायिक क्षमता में महत्वपूर्ण विस्तार होगा। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 32 न्यायाधीश कार्यरत हैं, और नई नियुक्तियों के बाद यह संख्या 37 तक पहुंच जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते लंबित मामलों और न्यायिक बोझ को देखते हुए यह विस्तार आवश्यक था। इससे मामलों की सुनवाई तेज होने और न्याय वितरण प्रणाली में सुधार की उम्मीद की जा रही है।










