'CJP ने CJI की टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया', सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर सरकार और CBI से मांगा जवाब

Supreme Court ने CJI की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश करने वाली PIL पर केंद्र सरकार और CBI से जवाब मांगा है। जानें क्या है पूरा मामला।

भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसे नाम भी सामने आए।

Supreme Court: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक कथित ‘कॉकरोच’ टिप्पणी को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर संदर्भ से हटाकर पेश किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया है कि अदालत की वर्चुअल कार्यवाही की चुनिंदा एडिटिंग कर एक मौखिक टिप्पणी को अलग अर्थ दिया गया और बाद में उसका इस्तेमाल व्यावसायिक तथा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया।

यह मामला उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP नाम से एक समूह और उससे जुड़ी गतिविधियों की चर्चा शुरू हुई थी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि न्यायिक कार्यवाही की कथित भ्रामक एडिटिंग और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल की जांच कर जिम्मेदार लोगों या संस्थाओं के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

सुप्रीम कोर्ट में करीब आधे घंटे हुई सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और उनके वकील राजा चौधरी ने अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI द्वारा ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल एक विशेष संदर्भ में किया गया था। 

आरोप है कि बाद में सुनवाई के वीडियो से इस शब्द को अलग करके एक छोटी क्लिप तैयार की गई और उसे सोशल मीडिया पर ऐसे प्रसारित किया गया, जिससे टिप्पणी का मूल संदर्भ बदल गया।

किस मामले की सुनवाई के दौरान हुई थी टिप्पणी?

याचिका में ‘संजय दुबे बनाम दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल’ मामले में 15 मई की सुनवाई का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, उस सुनवाई के दौरान CJI ने कथित तौर पर फर्जी वकीलों और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग से जुड़े संदर्भ में ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया था। राजा चौधरी ने अदालत में तर्क दिया कि टिप्पणी का संबंध न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग, पेशेवर मानकों में गिरावट और इससे न्यायिक संस्थान पर पड़ने वाले प्रभाव से था। उनका आरोप है कि इस व्यापक संदर्भ को नजरअंदाज कर सिर्फ एक शब्द या छोटे हिस्से को वायरल कंटेंट में बदल दिया गया।

PIL में क्या मांग की गई है?

जनहित याचिका में अदालत से मांग की गई है कि उन व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान कर जांच की जाए, जिन्होंने कथित तौर पर न्यायिक कार्यवाही की एडिटिंग, उसके व्यावसायिक इस्तेमाल, कथित ट्रेडमार्क दुरुपयोग या बिना अनुमति कमर्शियल सर्कुलेशन के जरिए आर्थिक लाभ हासिल किया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर न्यायिक टिप्पणियों के संदर्भ को बदलकर पेश किए जाने से आम लोगों के बीच अदालत और न्यायाधीशों को लेकर गलत धारणा बन सकती है। उनका दावा है कि ऐसी गतिविधियां न्यायिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।

अभिव्यक्ति की आजादी पर भी जोर

याचिका में यह स्पष्ट करने की मांग भी की गई है कि न्यायपालिका की आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई अनुचित रोक नहीं लगनी चाहिए। याचिकाकर्ता के मुताबिक कार्रवाई केवल उन मामलों में होनी चाहिए, जहां न्यायिक कार्यवाही को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश करने, व्यावसायिक लाभ लेने या संस्थागत गरिमा को नुकसान पहुंचाने का आरोप हो। इस तरह PIL का एक महत्वपूर्ण पहलू न्यायिक गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन से भी जुड़ा है।

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