Swapan Dasgupta को शुभेंदु सरकार में मिली अहम जिम्मेदारी, जानिए पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर

वरिष्ठ पत्रकार और राजनेता Swapan Dasgupta को शुभेंदु सरकार में एक अहम जिम्मेदारी दी गई है। जानिए उनकी पत्रकारिता से राजनीति तक की यात्रा, प्रमुख भूमिकाएं और

सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार में बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार किया गया, जिसमें कुल 35 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इस विस्तार के बाद राज्य मंत्रिपरिषद की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार के पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार में 35 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, जिससे मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो गई है। इसी विस्तार में वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। उनके नाम की घोषणा के बाद राजनीतिक और अकादमिक हलकों में उनकी भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

कौन हैं स्वपन दासगुप्ता?

Swapan Dasgupta भारत के जाने-माने पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और लेखक हैं। उनका जन्म 3 अक्टूबर 1955 को एक प्रतिष्ठित बंगाली वैद्य परिवार में हुआ था। वे लंबे समय तक भारतीय पत्रकारिता जगत से जुड़े रहे और कई प्रमुख राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान और राजनीतिक विषयों पर उनकी गहरी समझ के कारण उन्हें देश के प्रमुख सार्वजनिक बुद्धिजीवियों में गिना जाता है।

स्वपन दासगुप्ता ने 2003 के बाद विभिन्न संपादकीय पदों पर कार्य किया और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर लेखन किया। वे भारत की राजनीतिक व्यवस्था, इतिहास और सामाजिक विषयों पर विश्लेषणात्मक लेखों के लिए जाने जाते हैं। उनके लेखन और विचारों ने उन्हें एक प्रभावशाली राजनीतिक टिप्पणीकार के रूप में स्थापित किया।

पद्म भूषण सम्मान

Swapan Dasgupta को शुभेंदु सरकार में मिली अहम जिम्मेदारी, जानिए पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर

साल 2015 में भारत सरकार ने उनके पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उनकी बौद्धिक और पेशेवर उपलब्धियों को दर्शाता है। 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने स्वपन दासगुप्ता को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय रूप से भाग लिया।

हालांकि वे शुरू में किसी राजनीतिक दल से औपचारिक रूप से जुड़े नहीं थे, लेकिन बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विचारधारा के साथ राजनीतिक रूप से सक्रिय भूमिका निभाई।

चुनावी राजनीति में प्रवेश

2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले वे औपचारिक रूप से राजनीति में शामिल हुए। भाजपा ने उन्हें तारकेश्वर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने राजनीतिक सक्रियता जारी रखी और पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।

2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कोलकाता की रासबिहारी विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर बड़ी जीत दर्ज की। यह सीट पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ मानी जाती थी। इस चुनाव में उन्होंने टीएमसी नेता देबाशीष कुमार को हराकर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि यह सीट दक्षिण कोलकाता के शहरी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में आती है।

चुनाव अभियान के दौरान भाजपा ने इस सीट पर विशेष ध्यान दिया था। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री और स्थानीय संगठन नेतृत्व शामिल था, ने यहां प्रचार में सक्रिय भागीदारी निभाई।

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