अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में सैयद अता हसनैन, पवित्रा मार्गेरिटा जाएंगे ईरान

ईरान में आयोजित होने वाले राजकीय अंतिम संस्कार में भारत की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा

भारत सरकार की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ईरान में आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं कार्यक्रम में नहीं जाएंगे और भारत का प्रतिनिधित्व दोनों नेता करेंगे

नई दिल्ली: भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक और ऐतिहासिक संबंधों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत सरकार की ओर से दो वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, ईरान ने इस राजकीय समारोह में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, प्रधानमंत्री स्वयं इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। उनकी ओर से दोनों वरिष्ठ प्रतिनिधियों को अंतिम संस्कार समारोह में भाग लेने के लिए नामित किया गया है।

4 से 9 जुलाई के बीच होंगे अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार और उनसे जुड़ी धार्मिक रस्में 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच आयोजित की जाएंगी। यह कार्यक्रम कई चरणों में संपन्न होगा और देश के विभिन्न प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक शहरों में आयोजित किया जाएगा।

अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय महत्व का राजकीय कार्यक्रम भी माना जा रहा है, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया था विशेष निमंत्रण

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को देखते हुए यह निमंत्रण विशेष महत्व रखता है।

हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं कार्यक्रम में शामिल होने के बजाय भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया। कूटनीतिक दृष्टि से यह कदम भारत की संवेदना और सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ दोनों देशों के संबंधों को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कौन हैं सैयद अता हसनैन?

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं। रक्षा और सामरिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में उनकी पहचान रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर उनका अनुभव उन्हें ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपयुक्त बनाता है।

उनकी नियुक्ति इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि भारत इस कार्यक्रम को केवल औपचारिक यात्रा के रूप में नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है।

विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा की भी होगी अहम भूमिका

भारत सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे। विदेश मंत्रालय में उनकी जिम्मेदारियों को देखते हुए उनकी उपस्थिति भारत की आधिकारिक विदेश नीति और कूटनीतिक संदेश को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

इससे पहले भी वे अयातुल्ला अली खामेनेई की स्मृति में आयोजित एक शोक सभा में शामिल हो चुके हैं। वह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास द्वारा आयोजित किया गया था, जहां उन्होंने भारत सरकार की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

तेहरान, कुम और मशहद में होंगे अंतिम संस्कार के प्रमुख आयोजन

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े प्रमुख कार्यक्रम तेहरान, कुम और मशहद में आयोजित किए जाएंगे। प्रारंभिक धार्मिक रस्में राजधानी तेहरान में होंगी, जिसके बाद जनाजा कुम ले जाया जाएगा। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

अंतिम चरण में जनाजा मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां इमाम रजा दरगाह परिसर में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह स्थान ईरान के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

परिवार के अन्य सदस्यों का भी होगा अंतिम संस्कार

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम संस्कार के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई के परिवार के उन सदस्यों को भी श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिनकी मृत्यु उसी हमले में हुई थी। बताया गया है कि उनकी बेटी और दामाद को भी उसी दिन दफनाया जाएगा। इस कारण यह कार्यक्रम केवल एक राष्ट्रीय शोक समारोह नहीं बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक अंतिम विदाई का अवसर भी माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की रहेगी नजर

अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। पश्चिम एशिया की राजनीति में ईरान की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों की भागीदारी उनके ईरान के साथ कूटनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय रणनीति का भी संकेत होगी।

भारत-ईरान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण अवसर

भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार, समुद्री संपर्क और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लंबे समय से साझेदारी रही है। ऐसे में इस राजकीय समारोह में भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों को सम्मान देने का प्रतीक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अवसर केवल शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे देशों के बीच विश्वास, संवाद और कूटनीतिक सहयोग को भी मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।

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