तालिबान शासन के पांच साल: अफगान महिलाओं के सपनों पर पाबंदियों का साया

अफगानिस्तान में तालिबान शासन के पांच साल पूरे होने पर महिलाओं ने शिक्षा, रोजगार और भविष्य पर लगी पाबंदियों की चुनौतियां और टूटते सपनों की कहानी साझा की।

तालिबान शासन के पांच साल पूरे होने पर अफगान महिलाओं ने शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में बढ़ती पाबंदियों के बीच अपनी मुश्किलें साझा कीं। कई महिलाओं ने बताया कि सत्ता परिवर्तन के बाद उनके करियर और भविष्य के सपने गंभीर रूप से प्रभावित हुए।

काबुल: अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के पांच साल पूरे होने के बीच देश की महिलाओं ने अपनी बदलती जिंदगी, शिक्षा और रोजगार पर लगी पाबंदियों तथा भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता की दर्दनाक तस्वीर साझा की है। कई महिलाओं का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद उनके वर्षों से संजोए सपने अचानक खत्म हो गए। सुरक्षा कारणों से कई महिलाओं ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की।

तालिबान शासन में महिलाओं की बदली जिंदगी

तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किया था। इसके बाद से महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक जीवन और आवाजाही पर कई कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं। मौजूदा परिस्थितियों में लड़कियों की शिक्षा छठी कक्षा के बाद बाधित हो जाती है, जबकि महिलाओं के विश्वविद्यालय जाने पर भी रोक जारी है।

इन प्रतिबंधों ने अफगान महिलाओं के लिए शिक्षा और करियर की संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। देश के कई हिस्सों में महिलाओं के लिए उपलब्ध रोजगार के अवसर भी बेहद सीमित हो गए हैं। ऐसे माहौल में कई महिलाएं अपने परिवारों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अपने भविष्य को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

पायलट बनने का सपना अब दूर

काबुल में रहने वाली एक युवा महिला ने बताया कि बचपन से उसका सपना पायलट बनने का था। आसमान में उड़ते विमानों को देखकर वह कल्पना करती थी कि एक दिन वह भी विमान उड़ाएगी और दुनिया को करीब से देखेगी।

लेकिन लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध के बाद उसके लिए यह सपना लगभग असंभव नजर आने लगा। उसने हार नहीं मानी और ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रखी। हाल ही में उसने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, जिसे वह सामान्य उपलब्धि नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में हासिल की गई बड़ी जीत मानती है।

उसका कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बावजूद अफगानिस्तान में लड़की होने के कारण पायलट बनने की राह उसके लिए बेहद कठिन है। उसकी कहानी उन हजारों अफगान लड़कियों की स्थिति को दर्शाती है, जिनकी शिक्षा और करियर की योजनाएं मौजूदा परिस्थितियों में प्रभावित हुई हैं।

पूर्व पत्रकार ने बताया सपनों के टूटने का दर्द

बामियान प्रांत की पूर्व पत्रकार जुहल ने बताया कि तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद उन्हें ऐसा लगा जैसे वर्षों की मेहनत से बनाए गए उनके सभी सपने अचानक जमीन में दफन हो गए।

पत्रकारिता से जुड़ी महिलाओं के लिए भी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भूमिका सीमित होने के साथ स्वतंत्र रूप से काम करने की संभावनाएं भी प्रभावित हुई हैं। जुहल की कहानी बताती है कि किस तरह राजनीतिक बदलाव का असर केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं की व्यक्तिगत आकांक्षाओं और पहचान पर भी पड़ा।

आभूषण बनाने वाली युवती की अलग जंग

काबुल की 18 वर्षीय शकीबा आभूषण बनाने का काम करती हैं। उन्होंने तालिबान की वापसी के दिन को अपनी जिंदगी का सबसे कठिन और दर्दनाक दिन बताया।

उनकी तरह कई युवा महिलाएं शिक्षा या पारंपरिक नौकरियों के रास्ते बंद होने के बाद छोटे व्यवसाय, हस्तशिल्प और घर से किए जाने वाले कामों के जरिए अपनी आजीविका बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि इन विकल्पों की पहुंच सीमित है और आर्थिक परिस्थितियां लगातार दबाव बढ़ा रही हैं।

दंत चिकित्सा सहायक के रूप में काम करने वाली एला ने भी बताया कि महिलाओं के सामने मौजूद समस्याएं केवल शिक्षा पर लगी पाबंदियों तक सीमित नहीं हैं। उनके मुताबिक रोजमर्रा की जिंदगी, रोजगार और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी बड़ी चिंता बन गई हैं।

आर्थिक संकट ने बढ़ाई मुश्किलें

अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर प्रतिबंधों के साथ देश गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट से भी गुजर रहा है। सूखा, बाढ़, सहायता में कमी और पड़ोसी देशों से लौट रहे लोगों की बड़ी संख्या ने पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।

मानवीय संगठनों के अनुसार अफगानिस्तान दुनिया के गंभीर खाद्य संकटों में शामिल है। इस संकट का सबसे अधिक असर बच्चों और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक 2026 में करीब 37 लाख बच्चों के तीव्र कुपोषण से प्रभावित होने की आशंका है।

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में परिवारों के सामने भोजन जुटाने की चुनौती और गंभीर है। मानवीय संकट की रिपोर्टों में ऐसे परिवारों का भी उल्लेख हुआ है जिन्हें भोजन और आर्थिक जरूरतों के बीच बेहद कठिन फैसले लेने पड़ रहे हैं।

तालिबान का दावा, अफगानिस्तान में बढ़ी स्थिरता

तालिबान शासन के पांच वर्ष पूरे होने पर देश में उसकी ओर से उपलब्धियों को भी रेखांकित किया जा रहा है। राजधानी काबुल में तालिबान के झंडे और बैनर दिखाई दे रहे हैं और संगठन खुद को देश का स्थिर शासक बताता है।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने विदेशी देशों के साथ संबंधों पर बात करते हुए कहा है कि पश्चिमी देशों को अब तालिबान को युद्धरत संगठन के रूप में नहीं देखना चाहिए। तालिबान का कहना है कि विदेशी सेनाओं की वापसी के बाद अफगानिस्तान में हिंसा और युद्ध की स्थिति में कमी आई है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबान शासन को लेकर स्थिति अभी भी जटिल है। विदेशी प्रतिबंध, अफगान संपत्तियों का फ्रीज होना और सीमित राजनयिक मान्यता देश की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं। रूस वर्तमान में तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाला एकमात्र देश बताया गया है।

महिलाओं के अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय चिंता

अफगान महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने लगातार चिंता जताई है। शिक्षा और रोजगार से महिलाओं को बाहर रखने की नीतियों को उनके मूल अधिकारों और देश के सामाजिक-आर्थिक भविष्य के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

महिलाओं का कहना है कि केवल सुरक्षा या सामाजिक व्यवस्था के नाम पर उनके शिक्षा और रोजगार के अधिकार सीमित नहीं किए जाने चाहिए। कई महिलाएं ऑनलाइन शिक्षा, घरेलू व्यवसाय और अन्य वैकल्पिक माध्यमों के जरिए अपने भविष्य को बचाने की कोशिश कर रही हैं।

लेकिन इन प्रयासों के बावजूद अवसरों की कमी, आर्थिक संकट और सामाजिक प्रतिबंध उनके सामने बड़ी बाधाएं हैं। कई महिलाएं अपनी पहचान छिपाकर ही अपनी कहानी साझा कर रही हैं, क्योंकि उन्हें संभावित कार्रवाई या अन्य प्रतिकूल परिणामों का डर है।

पांच साल बाद भी भविष्य को लेकर अनिश्चितता

तालिबान के सत्ता में लौटने के पांच वर्ष बाद अफगानिस्तान में युद्ध और विदेशी सैन्य मौजूदगी की स्थिति भले ही पहले की तुलना में बदल गई हो, लेकिन महिलाओं के लिए एक अलग तरह का संकट बना हुआ है। शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रतिबंधों ने उनके भविष्य को अनिश्चित बना दिया है।

पायलट बनने का सपना देखने वाली युवती, पत्रकारिता छोड़ने वाली जुहल, आभूषण बनाने वाली शकीबा और दंत चिकित्सा सहायक एला की कहानियां इस बदलाव के मानवीय प्रभाव को सामने लाती हैं।

इन महिलाओं के लिए तालिबान शासन की पांचवीं वर्षगांठ केवल सत्ता परिवर्तन की तारीख नहीं है, बल्कि उन सपनों और अवसरों का हिसाब भी है, जो उनके अनुसार पिछले पांच वर्षों में उनसे दूर होते गए हैं। अफगानिस्तान का भविष्य अब इस बात पर भी निर्भर करेगा कि महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा, रोजगार तथा सार्वजनिक जीवन में कितनी जगह मिलती है।

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