तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में दावा किया कि उनके पास तीन सरकारी विभागों में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी अहम फाइलें मौजूद हैं। उन्होंने DMK के पूर्व मंत्रियों और विधायकों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे उन्हें इन फाइलों को अभी सार्वजनिक करने के लिए मजबूर न करें।
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को उस समय सियासी पारा चढ़ गया, जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में विपक्षी दल डीएमके (DMK) को तीखी चेतावनी दी। विधानसभा में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चल रही बहस के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने दावा किया कि उनके पास तीन सरकारी विभागों से संबंधित कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की विस्तृत रिपोर्ट मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इन रिपोर्टों में पर्याप्त सबूत हैं और उन्हें पता है कि इन जानकारियों को कब और किस तरीके से सार्वजनिक करना है।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं से कहा कि वे उन्हें इन फाइलों को सार्वजनिक करने के लिए मजबूर न करें। उनके बयान के बाद विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। हालांकि, जिन आरोपों का जिक्र किया गया, उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस समय नहीं हुई है और मुख्यमंत्री के दावों पर आगे की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण होगी।
विधानसभा में भ्रष्टाचार के आरोपों पर गरमाई बहस
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विवाद उस समय शुरू हुआ जब जल संसाधन विभाग के मंत्री एन. आनंद ने पिछली सरकार की एक आवास योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि योजना के तहत कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और कुछ ऐसे लोगों को भी आवास आवंटित किए गए, जो इसके लिए पात्र नहीं थे।
आनंद की टिप्पणी उस समय आई जब पूर्व मंत्री और डीएमके नेता आई. पेरियासामी विधानसभा में ‘कलैगनार कनावु इल्लम थिट्टम’ से संबंधित विषय पर बोल रहे थे। मंत्री के आरोपों पर डीएमके विधायकों ने आपत्ति जताई और सदन में तीखी बहस शुरू हो गई। विपक्षी सदस्यों ने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की। इसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से भी विपक्ष पर भ्रष्टाचार के मामलों में जवाब देने से बचने के आरोप लगाए गए।
मंत्री की टिप्पणी के बाद सीएम विजय ने संभाला मोर्चा

बहस के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब भ्रष्टाचार से जुड़े सबूत सामने आते हैं तो डीएमके के विधायक कथित तौर पर चुप हो जाते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार से संबंधित पूरी रिपोर्ट सदन में रख दें तो विपक्ष की प्रतिक्रिया क्या होगी।
इन टिप्पणियों के बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सरकार से आरोपों के प्रमाण सामने रखने को कहा। इसके बाद मुख्यमंत्री विजय ने बहस में हस्तक्षेप करते हुए अपनी सरकार के पास मौजूद कथित रिपोर्टों का जिक्र किया।
‘तीन विभागों की रिपोर्ट मेरी टेबल पर है’
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने करीब एक सप्ताह पहले विधानसभा को बताया था कि तीन सरकारी विभागों की विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उनके पास पहुंच चुकी है। विजय के अनुसार, इन रिपोर्टों में कथित अनियमितताओं से संबंधित विस्तृत सामग्री और सबूत मौजूद हैं। उन्होंने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि वह सभी दस्तावेजों को तत्काल सार्वजनिक नहीं करना चाहते और इसके लिए उचित समय का इंतजार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि यदि उन्हें लगातार खुलासा करने के लिए दबाव डाला गया, तो वह संबंधित जानकारी सार्वजनिक कर सकते हैं। विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें पता है कि कब और किस तरह इस मुद्दे पर बोलना है। उनके इस बयान को तमिलनाडु की राजनीति में सरकार और डीएमके के बीच बढ़ते टकराव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
‘सही समय पर करूंगा खुलासा’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक विपक्ष के साथ संयम और संवाद का रास्ता अपनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी चुप्पी को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कुछ राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अभी तक कई मामलों पर विस्तार से प्रतिक्रिया नहीं दी।
विजय ने कहा कि उनकी सरकार ने लोगों के बीच विश्वास और सकारात्मक संवाद के आधार पर समर्थन हासिल किया है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर कथित भ्रष्टाचार से संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जा सकता है।












