राजस्थान के जोधपुर स्थित एयर फोर्स स्टेशन पर 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक बहुदेशीय ‘तरंग शक्ति-2026’ हवाई युद्धाभ्यास का आयोजन किया जा रहा है। इस 17 दिवसीय युद्धाभ्यास में 40 देशों की वायु सेनाओं के शामिल होने की उम्मीद है।
Tarang Shakti 2026: भारतीय वायु सेना का बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ राजस्थान के जोधपुर में आयोजित होने जा रहा है। 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभ्यास में करीब 40 देशों के शामिल होने की उम्मीद है। भारत के अलावा कई देशों की वायु सेनाएं अपने लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और अन्य हवाई संसाधनों के साथ अभ्यास का हिस्सा बन सकती हैं।
जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन का रणनीतिक महत्व भी इस आयोजन को खास बनाता है। यह क्षेत्र भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से अपेक्षाकृत कम दूरी पर स्थित है। हालांकि, इस अभ्यास का घोषित उद्देश्य किसी एक देश को निशाना बनाना नहीं, बल्कि भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच परिचालन तालमेल, संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर सहयोग को मजबूत करना है।
17 दिनों तक चलेगा बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास
तरंग शक्ति-2026 का आयोजन करीब 17 दिनों की अवधि में किया जाएगा। भारतीय वायु सेना की मेजबानी में होने वाले इस अभ्यास में अलग-अलग देशों के एयरक्रू को एक साथ प्रशिक्षण और परिचालन परिस्थितियों में काम करने का अवसर मिलेगा। बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों का एक प्रमुख उद्देश्य अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच interoperability, यानी एक-दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता बढ़ाना होता है। ऐसे अभ्यासों में पायलट और ग्राउंड स्टाफ संयुक्त मिशन योजना, संचार, हवाई संचालन और विभिन्न परिस्थितियों में समन्वय का अभ्यास करते हैं।
F-35 से Rafale तक लड़ाकू विमानों पर नजर
तरंग शक्ति-2026 को लेकर सबसे अधिक चर्चा संभावित रूप से शामिल होने वाले आधुनिक लड़ाकू विमानों को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के F-35 स्टील्थ फाइटर जेट के इस अभ्यास में शामिल होने की संभावना है। यदि इसकी तैनाती होती है, तो यह भारतीय वायु सेना के साथ F-35 की भागीदारी वाले प्रमुख बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में से एक होगी।
F-35 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर विमान है, जिसे कम रडार दृश्यता और उन्नत सेंसर क्षमताओं के लिए जाना जाता है। इसके अलावा फ्रांस के Rafale और संयुक्त अरब अमीरात के F-16 जैसे लड़ाकू विमान भी अभ्यास में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभ्यास में भाग लेने वाले सभी देशों और उनके विमान प्लेटफॉर्म की अंतिम सूची भारतीय वायु सेना की ओर से पूरी तरह सार्वजनिक किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी।
भारत की ओर से Rafale, Su-30MKI और Tejas जैसे लड़ाकू विमान अभ्यास का हिस्सा हो सकते हैं। इससे भारतीय पायलटों को अलग-अलग देशों के आधुनिक एयरक्राफ्ट और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं के साथ प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।

सिर्फ फाइटर जेट नहीं, दूसरे एयरक्राफ्ट भी होंगे शामिल
तरंग शक्ति का दायरा केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। अभ्यास में परिवहन विमान और अन्य सपोर्ट प्लेटफॉर्म भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारतीय वायु सेना की ओर से Airborne Early Warning and Control (AEW&C) विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल किए जाने की संभावना है। इन संसाधनों के जरिए प्रतिभागी सेनाएं हवाई निगरानी, लॉजिस्टिक्स, लंबी दूरी के मिशन और हवा में ईंधन भरने जैसी क्षमताओं का अभ्यास कर सकती हैं।
जापान के साथ अभ्यास के बाद तरंग शक्ति
जोधपुर में तरंग शक्ति का आयोजन भारत और जापान के बीच ‘वीर गार्जियन’ द्विपक्षीय वायु अभ्यास के तुरंत बाद हो रहा है। यह अभ्यास 9 से 22 सितंबर तक आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों की वायु सेनाओं ने हिस्सा लिया। वीर गार्जियन में भारतीय Su-30MKI और जापानी वायु आत्मरक्षा बल के F-2 जैसे लड़ाकू विमानों की भागीदारी ने दोनों देशों के बीच हवाई सहयोग को प्रशिक्षण का व्यावहारिक मंच दिया।
2024 में पहली बार हुआ था तरंग शक्ति
भारतीय वायु सेना ने पहली बार तरंग शक्ति अभ्यास 2024 में आयोजित किया था। इसका आयोजन तमिलनाडु के सुलूर और राजस्थान के जोधपुर में दो चरणों में हुआ था। उस अभ्यास में भारत के साथ कई यूरोपीय देशों की वायु सेनाओं ने हिस्सा लिया था। 2024 के अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त प्रशिक्षण, परिचालन समन्वय और भागीदार देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना था। अब 2026 में इसका दूसरा संस्करण पहले से बड़े बहुराष्ट्रीय स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है।











