पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन एक बार फिर ‘सिटी ऑफ जॉय’ यानी कोलकाता पहुंची हैं। वह 1 अगस्त को कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए यहां आई हैं।
कोलकाता: प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 19 साल बाद कोलकाता पहुंची हैं। निर्वासन के लंबे दौर के बाद ‘सिटी ऑफ जॉय’ में वापसी को उन्होंने भावनात्मक क्षण बताया। तस्लीमा नसरीन 1 अगस्त को कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी, जहां वह कट्टरपंथ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक मुद्दों पर अपनी कविताएं प्रस्तुत करेंगी।
कोलकाता पहुंचने के बाद तस्लीमा नसरीन काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा उनके लिए सिर्फ किसी शहर में वापसी नहीं है, बल्कि अपनेपन और पुराने रिश्तों से दोबारा जुड़ने का अनुभव है।
‘ऐसा लग रहा है जैसे अपने देश लौट रही हूं’
कोलकाता पहुंचने के बाद तस्लीमा नसरीन ने कहा कि बंगाल उनके लिए कभी भी सीमाओं से विभाजित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनके लिए भाषा, संस्कृति और भावनाओं का रिश्ता किसी भी राजनीतिक सीमा से बड़ा है। तस्लीमा ने कहा, “मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मैं अपने देश लौट रही हूं। बंगाल मेरे दिल में कभी किसी बॉर्डर या कांटेदार तार से अलग नहीं हुआ।
बंगाल के पूर्वी हिस्से का दरवाजा मेरे लिए बंद है, इसलिए फिलहाल बंगाल का यह हिस्सा ही मेरा घर है।” उन्होंने कहा कि वह कोलकाता किसी मेहमान की तरह नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की तरह लौट रही हैं जिसका इस शहर से गहरा भावनात्मक संबंध रहा है।
2007 के बाद पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी
तस्लीमा नसरीन वर्ष 2004 से 2007 के बीच कोलकाता में रही थीं। हालांकि, उनकी लेखनी और विचारों को लेकर विवादों के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था। बांग्लादेश में धर्म, महिलाओं के अधिकारों और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर उनके लेखन के कारण उन्हें विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2007 के बाद यह पहला मौका होगा जब तस्लीमा नसरीन कोलकाता में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इस कार्यक्रम में वह पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रसिद्ध लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के साथ मंच साझा करेंगी।
कोलकाता से अपने रिश्ते को किया याद

तस्लीमा नसरीन ने कहा कि कोलकाता उनके लिए केवल रहने की जगह नहीं थी, बल्कि यह वह शहर था जहां उन्हें दोस्त, पाठक और परिवार जैसा अपनापन मिला। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक दूर रहने का दर्द हमेशा रहेगा। उनके अनुसार, कोई भी वापसी उन खोए हुए वर्षों को वापस नहीं ला सकती, लेकिन कोलकाता लौटना उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, “मैं एक अजनबी या मेहमान की तरह वापस नहीं आ रही हूं। मैं ऐसे व्यक्ति के रूप में लौट रही हूं जिसने हमेशा खुद को बंगाल का हिस्सा माना है।”
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दिया संदेश
तस्लीमा नसरीन ने अपनी वापसी के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि किसी लेखक की स्वतंत्रता केवल उन विचारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए जिन्हें लोग पसंद करते हैं, बल्कि उन विचारों की रक्षा भी जरूरी है जो असहमतिपूर्ण या विवादास्पद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी लेखक की सुरक्षा और स्वतंत्रता किसी सरकार, राजनीतिक दल या धार्मिक समूह की अनुमति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह मौलिक अधिकारों का हिस्सा होनी चाहिए। हालांकि, तस्लीमा नसरीन भारतीय नागरिक नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भारत में मिले समर्थन और सुरक्षा के लिए आभार व्यक्त किया।
शुभेंदु अधिकारी और सरकार का जताया आभार
तस्लीमा नसरीन ने कोलकाता यात्रा के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए आयोजकों और पश्चिम बंगाल सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने विशेष रूप से शुभेंदु अधिकारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि अलग विचार रखने वाले लेखक की स्वतंत्रता और सुरक्षा का सम्मान करना लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति से हर मुद्दे पर सहमत होना जरूरी नहीं है, लेकिन उसके विचार रखने के अधिकार की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।











