मेमोरी चिप्स की कमी के कारण स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइसेस की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी की आशंका है। बढ़ती मांग, सीमित सप्लाई और एआई डेटा सेंटर पर बढ़ते फोकस ने बाजार में असंतुलन पैदा कर दिया है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
Memory Chips Shortage: स्मार्टफोन और लैपटॉप समेत डिजिटल डिवाइसेस की कीमतें आने वाले समय में बढ़ सकती हैं, क्योंकि मेमोरी चिप्स की सप्लाई गंभीर दबाव में है। यह स्थिति वैश्विक टेक इंडस्ट्री में देखी जा रही है, जहां अमेरिका-चीन ट्रेड पॉलिसी, चिप निर्माताओं का एआई डेटा सेंटर की ओर झुकाव और सीमित सप्लायर्स की मौजूदगी बड़ा कारण बनी है। 2025-26 के दौरान इसका असर ज्यादा दिखने की संभावना है, क्योंकि मांग तेज़ी से बढ़ रही है और उत्पादन उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पा रहा।
मेमोरी चिप्स की कमी क्यों बनी बड़ी समस्या
स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइसेस की कीमतों में आने वाली तेज़ बढ़ोतरी के पीछे मेमोरी चिप्स की कमी सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। हालिया एनालिसिस के मुताबिक, स्मार्टफोन और पीसी इंडस्ट्री में 26 साल बाद सबसे बड़ा प्राइस हाइक देखने को मिल सकता है। मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन सप्लाई सीमित होने से बाजार में असंतुलन पैदा हो गया है।
इस स्थिति की शुरुआत अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए टैरिफ से मानी जा रही है, जिससे इंपोर्ट महंगा हुआ और नए निवेश धीमे पड़े। इसके बाद माइक्रोन जैसी बड़ी कंपनी ने कंज्यूमर मार्केट के बजाय एआई डेटा सेंटर के लिए चिप्स बनाने पर फोकस कर लिया। नतीजतन, बाजार में सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसे सीमित सप्लायर्स ही बचे हैं, जिन पर पूरा दबाव आ गया है।

AI और डेटा सेंटर ने कैसे बढ़ाया दबाव
मेमोरी चिप्स की मौजूदा कमी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका अहम मानी जा रही है। एआई डेटा सेंटर को हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की भारी जरूरत होती है। एक हाईपावर GPU में ही लगभग 1TB HBM की मांग होती है और बड़े डेटा सेंटर में हजारों GPU लगाए जाते हैं।
एआई कंपनियां लंबे कॉन्ट्रैक्ट और ज्यादा मुनाफे के कारण चिप मेकर्स के लिए प्राथमिक ग्राहक बन गई हैं। इसी वजह से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए चिप्स का उत्पादन पीछे छूट गया। इसका असर सीधे आम उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है, जिनके लिए डिवाइसेस महंगे होते जा रहे हैं।
ग्राहकों और कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर
मेमोरी चिप्स की कमी का असर सिर्फ प्रीमियम स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रहेगा। लैपटॉप, टैबलेट, टीवी, गेमिंग कंसोल, IoT डिवाइसेस और यहां तक कि क्लाउड और सर्वर बेस्ड सर्विसेज भी इसकी चपेट में हैं। कई कंपनियां लागत नियंत्रित करने के लिए RAM कम करने या फीचर्स से समझौता करने लगी हैं।
सैमसंग, शाओमी और अन्य टेक कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले प्रोडक्ट्स ज्यादा कीमत पर लॉन्च हो सकते हैं। वहीं कुछ कंपनियां खुद मेमोरी चिप्स बनाने की योजना पर काम कर रही हैं, लेकिन नए प्लांट से उत्पादन शुरू होने में अभी समय लगेगा।











