तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति को लेकर जारी किए गए श्वेत पत्र के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने इस रिपोर्ट को राज्य के वित्तीय कुप्रबंधन का “पोस्टमॉर्टम” करार दिया है।
चेन्नई: K. Annamalai ने तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति पर जारी श्वेत पत्र को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। 'वी द लीडर्स मूवमेंट' के संस्थापक और तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने कहा कि यह श्वेत पत्र राज्य की वित्तीय स्थिति का नहीं, बल्कि वित्तीय कुप्रबंधन का "पोस्टमॉर्टम" है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्वेत पत्र से राज्य की बढ़ती देनदारियों, वित्तीय दबाव और आर्थिक चुनौतियों की वास्तविक तस्वीर सामने आती है। अन्नामलाई के अनुसार, सरकार की आर्थिक नीतियों और वित्तीय प्रबंधन में खामियों के कारण तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है।
श्वेत पत्र में क्या सामने आया?
राज्य सरकार द्वारा जारी आर्थिक स्थिति से जुड़े श्वेत पत्र में तमिलनाडु की वित्तीय चुनौतियों को विस्तार से दर्शाया गया है। रिपोर्ट में बढ़ते कर्ज, राजस्व में गिरावट और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर बढ़ते बोझ को प्रमुख मुद्दों के रूप में बताया गया है। श्वेत पत्र के अनुसार, राज्य पर कुल बकाया कर्ज लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुका है. प्रति व्यक्ति कर्ज लगभग 1,28,934 रुपये है।
राजस्व प्राप्तियों का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में जा रहा है. सार्वजनिक उपक्रमों पर भारी वित्तीय दबाव बना हुआ है. इन आंकड़ों ने राज्य की वित्तीय स्थिरता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अन्नामलाई का हमला: ‘वित्तीय कुप्रबंधन का परिणाम’
अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि श्वेत पत्र में सामने आई स्थिति कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय कुप्रबंधन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में राज्य के प्रमुख आर्थिक संकेतकों की तुलना अन्य औद्योगिक राज्यों से की गई है, जो तमिलनाडु की गिरती वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। उनके अनुसार, राजस्व में कमी, बढ़ता कर्ज और खर्चों पर नियंत्रण की कमी राज्य की आर्थिक संरचना को कमजोर कर रही है।
अन्नामलाई ने दावा किया कि राज्य के कुल राजस्व का लगभग 22.8 प्रतिशत हिस्सा केवल ब्याज भुगतान में चला जाता है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का अपने कर राजस्व (Own Tax Revenue) का अनुपात 2021-22 में 5.93 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 5.45 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो आर्थिक कमजोरी को दर्शाता है। इसके अलावा, बिजली, परिवहन और नागरिक आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक उपक्रमों पर लगभग 3.18 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बताया गया है।
रोजगार और जनसंख्या संरचना पर चिंता
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अन्नामलाई ने राज्य की आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ जनसंख्या संरचना को भी एक बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि 2031 तक तमिलनाडु में कामकाजी आयु वर्ग (वर्किंग-एज पॉपुलेशन) में गिरावट की संभावना है। उनके अनुसार, यह स्थिति राज्य के राजस्व आधार को और कमजोर कर सकती है और आने वाले वर्षों में आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को और कठिन बना सकती है। उन्होंने इसे “गंभीर संरचनात्मक चुनौती” बताया, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
अन्नामलाई ने यह भी आरोप लगाया कि सिस्टम में मौजूद भ्रष्टाचार, संपत्ति रजिस्ट्रेशन से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और रियल एस्टेट कीमतों को कम दिखाने जैसी समस्याओं के कारण राज्य को राजस्व नुकसान हो रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सरकार के लिए सुझाव
अन्नामलाई ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि वह इस स्थिति से निपटने के लिए एक विशेषज्ञ परामर्श समूह बनाए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस समूह में:
- अर्थशास्त्री
- शिक्षाविद
- और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ
शामिल किए जाएं, ताकि राज्य की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सके। श्वेत पत्र जारी होने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष जहां इसे वित्तीय कुप्रबंधन का प्रमाण बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ पक्ष इसे पारदर्शिता और सुधार की दिशा में कदम के रूप में पेश कर सकता है।










