तमिलनाडु में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए खाली पड़ी 152 इन-सर्विस सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को ऑल इंडिया कोटा में स्थानांतरित करने के फैसले को Supreme Court of India में चुनौती दी गई है।
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा शिक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। मामला 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए निर्धारित 152 खाली इन-सर्विस सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में स्थानांतरित किए जाने से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र, राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की है।
क्या है विवाद का मूल मुद्दा?
विवाद उन 152 सुपर-स्पेशियलिटी सीटों को लेकर है जो तमिलनाडु में सरकारी सेवा दे रहे डॉक्टरों (इन-सर्विस कैंडिडेट्स) के लिए आरक्षित थीं, लेकिन काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान खाली रह गईं। राज्य में उपलब्ध कुल 430 सुपर-स्पेशियलिटी सीटों में से 215 सीटें सरकारी डॉक्टरों के लिए निर्धारित थीं।काउंसलिंग के शुरुआती चरणों में केवल 63 सीटें भरी जा सकीं, जिसके बाद 152 सीटें खाली रह गईं। इन सीटों को बाद में ऑल इंडिया कोटा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया, जिसे तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अदालत में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इन सीटों को तुरंत ऑल इंडिया कोटा में स्थानांतरित करने के बजाय राज्य के सरकारी डॉक्टरों को काउंसलिंग के अतिरिक्त चरणों में अवसर दिया जाना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
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सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी डॉक्टरों की भूमिका और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में उनके योगदान पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।
पीठ ने कहा कि यदि सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों को उच्च स्तरीय विशेषज्ञता प्राप्त करने का अवसर मिलता है, तो वे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
अदालत ने यह भी माना कि इन-सर्विस उम्मीदवार एक विशिष्ट श्रेणी का प्रतिनिधित्व करते हैं क्योंकि वे एक साथ चिकित्सा सेवाएं भी प्रदान करते हैं और उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर रहे होते हैं। न्यायालय ने यह प्रश्न भी उठाया कि देश में कितने लोग निजी अस्पतालों में महंगी सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं का खर्च वहन कर सकते हैं। इस टिप्पणी को सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अदालत से अनुरोध किया है कि संबंधित अधिकारियों को इन सीटों को ऑल इंडिया कोटा में स्थानांतरित करने से रोका जाए, कम से कम तब तक जब तक काउंसलिंग प्रक्रिया के सभी चरण पूरे न हो जाएं। याचिका में यह भी मांग की गई है कि इन-सर्विस डॉक्टरों को तीसरे राउंड या मॉप-अप राउंड की काउंसलिंग में इन सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर दिया जाए। इसके अलावा, यदि आवश्यक हो तो पात्रता प्रतिशत (क्वालिफाइंग परसेंटाइल) में छूट देकर अधिक उम्मीदवारों को मौका देने की भी बात कही गई है।
राजनीतिक स्तर पर भी उठा मुद्दा
यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन चुका है। इस महीने की शुरुआत में तमिलनाडु के वरिष्ठ राजनीतिक नेता उदयनिधि स्टालिन ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आरक्षित सीटों का संरक्षण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है।
उनका कहना था कि यदि ये सीटें अन्य श्रेणियों में स्थानांतरित कर दी जाती हैं, तो भविष्य में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।











