टोंक में खुले नाले में गिरने से 2 साल की बच्ची की मौत, शव लेकर घर के बाहर धरने पर परिवार

टोंक के हमीरपुर में घर के बाहर खेलते समय 2 साल की बच्ची खुले नाले में गिर गई। मौत के बाद परिजन शव लेकर धरने पर बैठे और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।

टोंक के हमीरपुर में घर के बाहर खेल रही दो साल की बच्ची खुले नाले में गिर गई। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने शव दफनाने से इनकार कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग करते हुए धरना शुरू किया।

टोंक: राजस्थान के टोंक जिले में एक दर्दनाक हादसे में दो साल की बच्ची की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई। घटना के बाद परिजन बच्ची का शव घर के बाहर रखकर धरने पर बैठ गए हैं। परिवार ने शव दफनाने से इनकार करते हुए खुले नाले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

घर के बाहर खेलते समय खुले नाले में गिरी बच्ची

हादसा टोडारायसिंह पंचायत समिति क्षेत्र के हमीरपुर गांव में रविवार शाम करीब 5:45 बजे हुआ। परिवार के अनुसार, दो साल की अनाबिया घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान वह मकान के पास से गुजर रहे करीब पांच फीट गहरे खुले नाले में गिर गई।

बच्ची के नाले में गिरने की जानकारी मिलते ही परिजनों और आसपास मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया। बच्ची को तत्काल बाहर निकाला गया और इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

हादसे की खबर फैलते ही परिवार और मोहल्ले में शोक की स्थिति बन गई। परिजनों का कहना है कि बच्ची घर के बाहर खेल रही थी और किसी को अंदाजा नहीं था कि खुले नाले की वजह से इतना बड़ा हादसा हो जाएगा।

परिजनों का आरोप- कई बार की थी नाला बंद कराने की मांग

मृत बच्ची के पिता अरबाज खान ने आरोप लगाया कि जिस नाले में उनकी बेटी गिरी, उसे बंद कराने और उसकी सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग पहले भी कई बार की जा चुकी थी। परिवार का कहना है कि पंचायत प्रशासन के अलावा संबंधित अधिकारियों को भी खुले नाले की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई थी।

परिजनों के मुताबिक, नाले को ढकने या उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था करने के लिए स्थानीय स्तर पर कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि अगर समय रहते नाले को बंद कर दिया जाता या उसके चारों ओर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती, तो बच्ची की जान बच सकती थी।

इस घटना के बाद ग्रामीणों और परिवार के लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि खुले नाले की समस्या केवल एक परिवार से जुड़ी नहीं है, बल्कि आसपास रहने वाले अन्य लोगों के लिए भी खतरा बनी हुई है।

शव घर के बाहर रखकर धरने पर बैठे परिजन

बच्ची की मौत के बाद परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। परिजन शव को घर के बाहर रखकर धरने पर बैठ गए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे।

परिवार का कहना है कि जब तक प्रशासन खुले नाले को लेकर ठोस कदम नहीं उठाता और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय नहीं करता, तब तक वे शव नहीं दफनाएंगे। परिजनों की मांग है कि खुले नाले को तत्काल बंद कराया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की जाए।

धरने में स्थानीय लोग भी परिवार के साथ खड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को पहले से मौजूद शिकायतों को गंभीरता से लेना चाहिए था।

16 घंटे से अधिक समय तक जारी रहा धरना

परिजनों के अनुसार, बच्ची की मौत के बाद करीब 16 घंटे से अधिक समय तक परिवार शव लेकर घर के बाहर बैठा रहा। इस दौरान परिवार ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं और कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों का आरोप है कि घटना रविवार शाम को हुई, लेकिन इसके बावजूद सोमवार सुबह तक प्रशासन की ओर से मौके पर स्थिति का जायजा लेने में देरी हुई। स्थानीय लोगों ने कहा कि हादसे की जानकारी पंचायत और तहसील प्रशासन को दी गई थी।

हालांकि, प्रशासनिक अधिकारी बाद में मौके पर पहुंचे और परिवार से बातचीत शुरू की। अधिकारियों ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया और उनकी शिकायतों को सुनकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन देने की कोशिश की।

तहसीलदार और नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे

मामले की जानकारी मिलने के बाद टोंक तहसीलदार अजयपाल सिंह यादव और नायब तहसीलदार पूजा अटल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार और ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया।

प्रशासन की कोशिश है कि परिवार शव का अंतिम संस्कार करने के लिए सहमत हो। वहीं, परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मौके पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि केवल आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि खुले नाले को तत्काल सुरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई अन्य बच्चा या व्यक्ति इस तरह के हादसे का शिकार न हो।

खुले नाले की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

इस घटना ने ग्रामीण और आबादी वाले क्षेत्रों में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आबादी के बीच खुले और गहरे नाले बच्चों के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकते हैं। ऐसे स्थानों पर ढक्कन, बैरिकेडिंग या अन्य सुरक्षा उपाय नहीं होने पर दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, हमीरपुर में जिस नाले में बच्ची गिरी, वह घर के पास से होकर गुजरता है। ऐसे में वहां रहने वाले परिवारों के बच्चों के लिए लगातार खतरा बना हुआ था।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को खुले नालों और जल निकासी व्यवस्था का समय-समय पर निरीक्षण करना चाहिए। जहां नाले खुले हों, वहां तत्काल ढक्कन या सुरक्षा अवरोध लगाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

परिवार ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की

मृत बच्ची के परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जाए। परिवार का आरोप है कि नाला बंद कराने की मांग पहले से की जा रही थी, इसके बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

परिजनों का कहना है कि उनकी बेटी की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। वे चाहते हैं कि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने वाले जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।

अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन और परिवार के बीच बातचीत

फिलहाल प्रशासन और परिवार के बीच बातचीत जारी है। अधिकारी परिजनों को समझाने में जुटे हैं, जबकि परिवार अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठा है।

घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। परिवार की मांग है कि पहले खुले नाले को सुरक्षित किया जाए और मामले में जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई शुरू की जाए। प्रशासन की ओर से मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।

दो साल की मासूम की मौत ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को सामने ला दिया है। यदि आबादी के बीच खुले नालों की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत व सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, तो ऐसे हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है।

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