त्रिपुरा में 2024 TET क्वालिफायर्स ने लंबित शिक्षक भर्ती के खिलाफ प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री माणिक साहा के आवास की ओर मार्च कर रहे अभ्यर्थियों को पुलिस ने महिला कॉलेज के सामने रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने तत्काल नियुक्ति, उम्र सीमा संबंधी चिंता और नियमित भर्ती की मांग उठाई।
अगरतला: त्रिपुरा में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET पास करने वाले अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में देरी के खिलाफ सोमवार को प्रदर्शन किया। 2024 TET क्वालिफायर्स का एक समूह मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के आवास की ओर मार्च कर रहा था, लेकिन पुलिस ने महिला कॉलेज के सामने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। अभ्यर्थियों ने सभी सफल उम्मीदवारों की एक साथ भर्ती शुरू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उनका दावा है कि करीब दो वर्षों से वे शिक्षक भर्ती बोर्ड, शिक्षा विभाग और प्रारंभिक शिक्षा विभाग के समक्ष प्रतिनियुक्तियों और प्रदर्शनों के जरिए अपनी मांग रखते आ रहे हैं।
दो साल से भर्ती का इंतजार
TET क्वालिफायर्स के अनुसार, परीक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नियुक्ति में देरी की जा रही है। अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने परीक्षा पास करने के लिए मेहनत की और निर्धारित प्रक्रिया के तहत सत्यापन भी कराया, लेकिन इसके बाद भी नियुक्ति को लेकर स्पष्टता नहीं है। प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थी ने राज्य में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि जब स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं और शिक्षकों की आवश्यकता बनी हुई है, तो सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में देरी का असर केवल उनके रोजगार पर नहीं पड़ रहा, बल्कि राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
करीब 50 हजार अभ्यर्थियों में से 1,856 उम्मीदवार सत्यापन के बाद बचे
प्रदर्शनकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, नवीनतम TET में करीब 50,000 उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद लगभग 1,856 उम्मीदवार ऐसे बताए जा रहे हैं, जो भर्ती के लिए आगे की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के परीक्षा पास करने और सत्यापन प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया को लंबा खींचना उनके भविष्य के लिए गंभीर समस्या बन रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति को लेकर जल्द निर्णय लिया जाए और भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए।
उम्र सीमा पार होने का भी डर
प्रदर्शनकारियों ने भर्ती में देरी के बीच उम्र सीमा को लेकर भी चिंता जताई। उनका दावा है कि करीब 20 से 25 उम्मीदवारों की उम्र कथित तौर पर 40 वर्ष से अधिक हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य उम्मीदवारों के पास निर्धारित आयु सीमा पार करने से पहले केवल लगभग एक महीने का समय बचा है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, यदि भर्ती प्रक्रिया और आगे खिंचती है तो कई ऐसे उम्मीदवार सरकारी नौकरी के लिए निर्धारित आयु सीमा से बाहर हो सकते हैं, जिन्होंने पहले ही TET जैसी जरूरी परीक्षा पास कर ली है। उन्होंने सरकार से इस पहलू को भी गंभीरता से देखने की अपील की। उनका कहना है कि वे परीक्षा के मानकों में किसी तरह की छूट या अंकों में बदलाव की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग केवल उन उम्मीदवारों की नियुक्ति से जुड़ी है, जिन्होंने निर्धारित परीक्षा और सत्यापन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की है।
रोजगार पर भी पड़ा असर
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि भर्ती की उम्मीद में कई उम्मीदवारों ने लंबे समय तक निजी ट्यूशन और अन्य अस्थायी कामों के सहारे अपना खर्च चलाया। लेकिन लगातार इंतजार के कारण अब उनके लिए निजी ट्यूशन के अवसर भी कम हो गए हैं। उनका कहना है कि शिक्षक बनने की तैयारी और परीक्षा प्रक्रिया में समय और संसाधन लगाने के बाद उन्हें नियुक्ति की उम्मीद थी। भर्ती में अनिश्चितता ने आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि यदि सरकारी भर्ती नियमित रूप से होती रहे तो शिक्षित युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं और उन्हें लंबे समय तक अस्थायी काम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च से पहले पुलिस ने रोका
अपनी मांग सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के आवास की ओर मार्च कर रहे थे। हालांकि, पुलिस ने अगरतला स्थित महिला कॉलेज के सामने ही उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि वे अपनी भर्ती की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री तक पहुंचना चाहते थे, लेकिन उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। अभ्यर्थियों ने कहा कि करीब दो साल से अलग-अलग सरकारी कार्यालयों और विभागों के सामने अपनी बात रखने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसी वजह से उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने सीधे अपनी मांग रखने का फैसला किया।
नियमित शिक्षक भर्ती की भी मांग
TET क्वालिफायर्स ने केवल लंबित भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग नहीं की, बल्कि भविष्य में शिक्षक भर्ती नियमित रूप से आयोजित करने की भी अपील की। उनका कहना है कि राज्य में शिक्षकों की जरूरत और सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं की संख्या को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया को लंबे अंतराल के बाद शुरू करने के बजाय नियमित बनाया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों के मुताबिक, नियमित भर्ती से दो महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान हो सकता है। एक तरफ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, वहीं दूसरी ओर योग्य युवाओं को समय पर रोजगार के अवसर मिलेंगे।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
प्रदर्शनकारियों ने त्रिपुरा सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और संबंधित विभागों को भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश देने की मांग की है। उनका कहना है कि वे परीक्षा में सफल हो चुके हैं और सत्यापन प्रक्रिया भी पूरी कर चुके हैं, इसलिए अब नियुक्ति को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से भर्ती की स्पष्ट समयसीमा घोषित करने, लंबित उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने और भविष्य की शिक्षक भर्ती के लिए नियमित व्यवस्था तैयार करने की अपील की।
फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार की ओर से किसी विस्तृत निर्णय या भर्ती की निश्चित समयसीमा की जानकारी सामने नहीं आई है। TET क्वालिफायर्स का आंदोलन ऐसे समय में हुआ है, जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे राज्य में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।










