G20 समिट में आमंत्रण न मिलने पर साउथ अफ्रीका ने अमेरिका पर नाराजगी जताई है। उप राष्ट्रपति पॉल मशातिले ने कहा कि भारत BRICS सम्मेलन के लिए उन्हें सम्मानपूर्वक बुला रहा है। हालांकि, व्यापारिक हितों के चलते अमेरिका से रिश्ते बनाए रखे जाएंगे।
केप टाउन:: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और साउथ अफ्रीका के बीच बढ़ता तनाव अब खुलकर सामने आने लगा है। G20 से जुड़े विवाद के बीच साउथ अफ्रीका ने भारत के साथ अपने मजबूत रिश्तों का हवाला देते हुए अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। साउथ अफ्रीका के उप राष्ट्रपति पॉल मशातिले ने कहा कि अगर अमेरिका उन्हें दरकिनार कर रहा है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि भारत उन्हें सम्मान के साथ अपने यहां आमंत्रित कर रहा है।
उन्होंने घोषणा की कि साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति इस साल के अंत में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आएंगे। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और साउथ अफ्रीका के रिश्तों में खटास की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
‘हमें नहीं बुलाया गया, लेकिन हम G20 का हिस्सा हैं’
मीडिया से बातचीत के दौरान उप राष्ट्रपति पॉल मशातिले ने कहा कि साउथ अफ्रीका को G20 से जुड़े कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का था, लेकिन इससे साउथ अफ्रीका की वैश्विक भूमिका कम नहीं हो जाती।
मशातिले ने कहा, "हमें आमंत्रण नहीं मिला, लेकिन हम G20 का हिस्सा हैं और रहेंगे। वैश्विक मुद्दों पर हमारी भूमिका महत्वपूर्ण है।"
उनके बयान को अमेरिका की ओर से मिले व्यवहार पर नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाती है।
भारत का नाम लेकर दिया संदेश
अमेरिका को लेकर नाराजगी जताने के साथ ही साउथ अफ्रीका ने भारत के साथ अपने संबंधों पर भी जोर दिया। उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारत इस साल BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा और साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति इसमें भाग लेने के लिए भारत आएंगे।

उन्होंने कहा कि भारत और साउथ अफ्रीका के संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं और दोनों देश कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ काम करते हैं। BRICS जैसे मंच विकासशील देशों की आवाज को दुनिया के सामने रखने का अवसर देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का नाम लेकर दिया गया यह बयान अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक संदेश भी है कि साउथ अफ्रीका के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत साझेदार मौजूद हैं।
अमेरिका से रिश्ते नहीं तोड़ेगा साउथ अफ्रीका
हालांकि साउथ अफ्रीका ने अमेरिका के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है, लेकिन उसने यह भी स्पष्ट किया है कि वह वॉशिंगटन के साथ अपने रिश्ते खत्म नहीं करेगा।
मशातिले ने कहा कि अमेरिका उनके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के मजबूत संबंध हैं, जिन्हें जारी रखना साउथ अफ्रीका के हित में है।
उन्होंने कहा, "हम अमेरिका के साथ काम करना जारी रखेंगे। हमारे आर्थिक हित और व्यापारिक संबंध महत्वपूर्ण हैं। हम अपने लोगों और कंपनियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संबंध बनाए रखेंगे।"
इस बयान से साफ है कि साउथ अफ्रीका कूटनीतिक मतभेदों के बावजूद आर्थिक सहयोग को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता।
BRICS की बढ़ती ताकत
दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह BRICS की भूमिका पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। भारत, ब्राजील, रूस, चीन और साउथ अफ्रीका समेत कई देशों का यह मंच वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में उभर रहा है।
भारत में होने वाला आगामी BRICS सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और विकासशील देशों के हितों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति की प्रस्तावित भारत यात्रा को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बदलते वैश्विक समीकरणों के संकेत
साउथ अफ्रीका के ताजा बयान ने यह संकेत दिया है कि दुनिया की कूटनीति तेजी से बदल रही है। कई देश अब केवल एक शक्ति केंद्र पर निर्भर रहने के बजाय बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारत, BRICS और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच बढ़ता सहयोग भी इसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले महीनों में भारत में होने वाला BRICS सम्मेलन इन बदलते वैश्विक समीकरणों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।










