ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और फ्रांस के बीच तनाव तेज हो गया है। ट्रंप की अमेरिकी नियंत्रण वाली सोच पर फ्रांस ने सार्वजनिक रूप से तंज कसा। टैरिफ धमकी और संप्रभुता के मुद्दे से यूरोप-अमेरिका रिश्तों में खटास बढ़ती दिख रही है।
Greenland Dispute: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और फ्रांस के बीच तनाव अब कूटनीतिक बयानबाजी से आगे निकल चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की सोच ने यूरोप में नाराजगी बढ़ा दी है। फ्रांस ने इस पूरे तर्क को न सिर्फ खारिज किया, बल्कि सार्वजनिक रूप से उसका मजाक उड़ाया है। इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड अब सिर्फ एक द्वीप नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम केंद्र बन चुका है।
अमेरिका का कहना है कि ग्रीनलैंड सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है, जबकि फ्रांस और यूरोपीय संघ इसे संप्रभुता का खुला उल्लंघन मान रहे हैं। इस टकराव के असर अब व्यापार, सुरक्षा और कूटनीति तीनों क्षेत्रों में दिखने लगे हैं।
शांति के नाम पर नियंत्रण की अमेरिकी दलील
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में भविष्य में रूस से बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। बेसेन्ट के अनुसार, अगर कभी रूस ने ग्रीनलैंड पर हमला किया, तो नाटो की गारंटी के चलते अमेरिका को युद्ध में उतरना पड़ेगा।
उन्होंने यह तर्क दिया कि भविष्य के टकराव से बचने के लिए बेहतर यही होगा कि ग्रीनलैंड पहले ही अमेरिका के नियंत्रण में आ जाए। उनका कहना था कि यह “Peace through Strength” की नीति है, जिसमें ताकत दिखाकर शांति सुनिश्चित की जाती है।
आर्कटिक क्षेत्र को लेकर ट्रंप की रणनीतिक सोच

स्कॉट बेसेन्ट ने एक इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप आर्कटिक को आने वाले दशकों की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती मानते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघलने से यह क्षेत्र सैन्य और आर्थिक दोनों दृष्टियों से अहम हो गया है।
उनके मुताबिक, अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है और अगर वह ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में ले लेता है, तो वहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव नहीं होगा। उन्होंने यूरोपीय देशों पर कमजोरी दिखाने का आरोप भी लगाया और कहा कि अमेरिका ताकत से फैसले करता है।
फ्रांस का व्यंग्यात्मक पलटवार
अमेरिका की इस दलील पर फ्रांस ने तीखा और व्यंग्यात्मक जवाब दिया। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक रिस्पॉन्स अकाउंट ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कई उदाहरण दिए।
फ्रांस ने कहा कि अगर कभी आग लगने का डर हो, तो क्या पहले ही घर जला देना सही होगा। अगर कभी शार्क के हमले का खतरा हो, तो क्या पहले ही लाइफगार्ड को खा लिया जाए। इसी तुलना के जरिए फ्रांस ने अमेरिकी तर्क को हास्यास्पद बताया।
इस सार्वजनिक प्रतिक्रिया से साफ हो गया कि फ्रांस ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति को गंभीर सुरक्षा रणनीति नहीं, बल्कि अतार्किक सोच मानता है।
फ्रांस की चेतावनी
फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड को लेकर किसी भी तरह की जबरदस्ती यूरोपीय संघ और अमेरिका के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का संप्रभु हिस्सा है और डेनमार्क यूरोपीय संघ का सदस्य देश है।
लेस्क्योर ने यह भी बताया कि यही संदेश उन्होंने अपने अमेरिकी समकक्ष स्कॉट बेसेन्ट को सीधे तौर पर दिया है। फ्रांस का मानना है कि संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
सहयोग की जरूरत पर फ्रांस का संतुलित रुख
तनाव के बावजूद फ्रांस ने यह भी माना कि कुछ वैश्विक मुद्दों पर अमेरिका और यूरोप को मिलकर काम करना चाहिए। खासकर दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के मामले में चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में G7 मंच पर सहयोग जरूरी है।
टैरिफ धमकी से बढ़ा तनाव
ग्रीनलैंड विवाद के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क और फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी 2026 से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड पर कोई समझौता नहीं हुआ, तो 1 जून 2026 से यह टैरिफ बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका दशकों से यूरोपीय देशों को सब्सिडी देता रहा है और अब डेनमार्क को इसकी कीमत चुकानी चाहिए।
मैक्रों का सख्त जवाब
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप की धमकियों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कोई दबाव या धमकी यूरोपीय संघ को प्रभावित नहीं कर सकती। मैक्रों ने साफ किया कि EU न यूक्रेन के मुद्दे पर झुकेगा, न ग्रीनलैंड के मामले में, और न ही किसी अन्य वैश्विक संकट में। आठ यूरोपीय देशों के संयुक्त बयान में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूरी एकजुटता दिखाई गई है।










