ट्रम्प ने अमेरिकी हथियारों की कमी की खबरों को किया खारिज, सूचना लीक करने वालों को दी कड़ी चेतावनी

ट्रम्प ने हथियारों की कमी की खबरों को खारिज किया। उन्होंने सूचना लीक करने वालो पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान और मिसाइल भंडार से जुड़ी पूरी रिपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में हथियारों की कमी की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि देश के पास पर्याप्त सैन्य भंडार मौजूद है। उन्होंने सूचना लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी, जबकि मिसाइल भंडार को लेकर बहस तेज हो गई है।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका के सैन्य हथियारों और गोला-बारूद के भंडार में कमी की खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि देश के पास पर्याप्त मात्रा में हथियार मौजूद हैं और जरूरत के अनुसार नए हथियारों का उत्पादन भी लगातार जारी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए अपने बयान में यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक करने वालों की पहचान की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ लंबी जेल की सजा की मांग की जाएगी।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष छह महीने से अधिक समय तक खिंच चुका है और युद्धविराम या स्थायी शांति समझौते की संभावना अभी भी स्पष्ट नहीं है। इसी दौरान अमेरिकी सैन्य भंडार, विशेष रूप से लंबी दूरी की मिसाइलों और वायु रक्षा प्रणाली से जुड़े हथियारों की उपलब्धता को लेकर कई रिपोर्टें सामने आई हैं।

ट्रम्प बोले- अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास विभिन्न प्रकार के हथियारों और गोला-बारूद का विशाल भंडार मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि रक्षा उत्पादन लगातार जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त हथियारों का निर्माण कर उन्हें सैन्य भंडार में शामिल किया जा रहा है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका की सैन्य क्षमता किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम है और हथियारों की कमी की खबरें वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं।

सूचना लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी मीडिया तक पहुंचाने वाले लोगों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी गोपनीय सूचनाएं लीक करना देश के हितों के खिलाफ है और संबंधित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि ऐसी जानकारी सार्वजनिक होने से सैन्य रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

अमेरिकी मिसाइल भंडार पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

हाल के दिनों में कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान के साथ जारी संघर्ष और अन्य सैन्य अभियानों के कारण अमेरिका ने बड़ी संख्या में लंबी दूरी की सटीक मिसाइलों और वायु रक्षा प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले हथियारों का उपयोग किया है।

इन्हीं रिपोर्टों के बाद यह चर्चा शुरू हुई कि क्या अमेरिका के पास भविष्य के संभावित संघर्षों के लिए पर्याप्त सैन्य भंडार बचा है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन लगातार इन दावों का खंडन करता रहा है।

ईरान का जवाब- हमारी स्वदेशी तकनीक पर्याप्त

अमेरिकी हथियार भंडार पर उठे सवालों के बीच ईरान की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरानी रक्षा अधिकारियों ने कहा कि देश की स्वदेशी रक्षा तकनीक और घरेलू स्तर पर विकसित हथियार किसी भी बाहरी खतरे का सामना करने में सक्षम हैं।

ईरान का कहना है कि उसने पिछले वर्षों में अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत किया है और आधुनिक मिसाइलों तथा अन्य सैन्य प्रणालियों के विकास पर लगातार निवेश किया है।

रक्षा विशेषज्ञों की अलग राय

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर नजर रखने वाले कई विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक मिसाइलों और उन्नत रक्षा प्रणालियों का उत्पादन अत्यधिक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। ऐसे हथियारों को विकसित करने, ऑर्डर देने, निर्माण करने और सेना तक पहुंचाने में कई महीने या कई बार वर्षों का समय लग सकता है।

इसी कारण यदि किसी बड़े सैन्य अभियान के दौरान बड़ी संख्या में हथियारों का उपयोग होता है तो उनके भंडार को पहले जैसी स्थिति में लाने में समय लगना स्वाभाविक माना जाता है।

मिसाइल भंडार को लेकर अलग-अलग अनुमान

कुछ स्वतंत्र रक्षा विश्लेषण संस्थानों ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया है कि अमेरिका के कुछ प्रमुख मिसाइल भंडार में कमी आई है। इनमें विशेष रूप से पैट्रियट और थाड (THAAD) जैसी वायु रक्षा प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाली मिसाइलों का उल्लेख किया गया है।

हालांकि अमेरिकी सरकार ने इन अनुमानों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रक्षा विभाग का कहना है कि वास्तविक सैन्य भंडार से जुड़ी जानकारी गोपनीय होती है और राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं की जाती।

यूक्रेन और अन्य मोर्चों पर भी बढ़ी मांग

अमेरिका केवल पश्चिम एशिया में ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी अपने सहयोगी देशों को सैन्य सहायता उपलब्ध करा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने यूक्रेन को बड़ी संख्या में रक्षा उपकरण और मिसाइलें उपलब्ध कराई हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि एक साथ कई मोर्चों पर सैन्य सहायता देने से हथियारों की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, जिससे उत्पादन क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

रक्षा उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

अमेरिकी प्रशासन पहले भी यह संकेत दे चुका है कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए रक्षा उत्पादन में तेजी लाई जा रही है। रक्षा विभाग ने अतिरिक्त बजट की मांग भी की है ताकि सेना के लिए नए हथियारों, मिसाइलों और सैन्य उपकरणों का तेजी से निर्माण किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए अमेरिका आने वाले वर्षों में रक्षा उद्योग में और अधिक निवेश कर सकता है।

वैश्विक सुरक्षा पर क्या पड़ेगा असर

अमेरिका के सैन्य भंडार को लेकर उठी बहस केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था, सहयोगी देशों की रक्षा रणनीति और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन पर भी पड़ सकता है।

यदि भविष्य में किसी बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक संघर्ष की स्थिति बनती है, तो प्रमुख सैन्य शक्तियों की उत्पादन क्षमता, हथियारों का भंडार और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि देश पूरी तरह तैयार है, जबकि रक्षा विशेषज्ञ वास्तविक स्थिति का आकलन उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर करते रहने की बात कह रहे हैं।

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