ट्रंप ने ईरान से बातचीत रोकी, डील की शर्त पर ही आगे बढ़ेगा अमेरिका; होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बातचीत रोक दी है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर विवाद बढ़ गया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर चिंता गहराई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत रोकने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि तेहरान के समझौते के लिए तैयार होने तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी। इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत पर फिलहाल रोक लगाने का संकेत दिया है। ट्रंप का कहना है कि जब तक तेहरान किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी। इस बीच रणनीतिक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

ईरान से बातचीत पर ट्रंप ने लगाई रोक

अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से चल रही कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अगस्त को कहा कि ईरान के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं हो रही है और निकट भविष्य में बातचीत की कोई योजना भी नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और व्यापक समझौते की कोशिशें पहले ही मुश्किल दौर में पहुंच चुकी हैं।

ट्रंप प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच पहले हुई बातचीत में कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई दिए थे, लेकिन अब वॉशिंगटन ने आगे बढ़ने से पहले तेहरान की स्पष्ट प्रतिबद्धता का इंतजार करने का फैसला किया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान किसी संभावित समझौते के लिए ठोस रुख अपनाए।

60 दिन की बातचीत की समयसीमा भी खत्म

अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए समझौते के तहत दोनों पक्षों को व्यापक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए करीब 60 दिनों का समय मिला था। इस अवधि में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, युद्ध की समाप्ति और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने जैसे मुद्दों पर समाधान तलाशने की कोशिश होनी थी।

हालांकि, तय समयसीमा बिना किसी निर्णायक समझौते के समाप्त हो गई। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर समझौते की शर्तें पूरी नहीं करने का आरोप लगाया।

ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले अपनी सैन्य नाकाबंदी और अन्य दबाव वाले कदमों पर पीछे हटना होगा। वहीं ट्रंप प्रशासन तेहरान से अपनी शर्तों को स्वीकार करने की मांग कर रहा है। इसी टकराव के कारण बातचीत का रास्ता फिलहाल बंद होता दिखाई दे रहा है।

ट्रंप ने होर्मुज का नक्शा पोस्ट कर बढ़ाया विवाद

ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक विवादित नक्शा साझा किया। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को न्यू यूएस टेरिटरी यानी नया अमेरिकी क्षेत्र बताया गया था। यह पोस्ट ऐसे समय सामने आई जब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।

नक्शे में होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास का समुद्री इलाका अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाया गया। ट्रंप पहले भी इस रणनीतिक जलमार्ग को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की बात कह चुके हैं। ईरान ने इस तरह के दावे को खारिज किया है और इसे अवास्तविक तथा भ्रामक बताया है।

ट्रंप का यह कदम सिर्फ अमेरिका-ईरान विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है और इसके आसपास कई खाड़ी देश महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं।

क्या होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका का हिस्सा बन सकता है?

ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के बावजूद किसी नक्शे या राजनीतिक घोषणा से होर्मुज स्ट्रेट अमेरिकी क्षेत्र नहीं बन जाता। यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है, जिसकी भौगोलिक स्थिति ईरान और ओमान के बीच है।

समुद्री कानून के तहत इस क्षेत्र से जुड़े अधिकार और जहाजों की आवाजाही अंतरराष्ट्रीय नियमों के अधीन होती है। इसलिए किसी एक देश द्वारा एकतरफा तरीके से इस पूरे समुद्री मार्ग को अपना क्षेत्र घोषित करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका कानूनी दर्जा नहीं बदलता।

यही वजह है कि ट्रंप का नक्शा फिलहाल एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, न कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्थापित अमेरिकी संप्रभुता के रूप में।

होर्मुज स्ट्रेट पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने के लिए इसी समुद्री मार्ग से गुजरना पड़ता है।

भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। यहां लंबे समय तक किसी तरह की रुकावट से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और इसके कारण ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

हाल के तनाव के कारण ऊर्जा बाजार पहले ही चिंतित हैं। रॉयटर्स के अनुसार, होर्मुज को लेकर बढ़े जोखिम ने तेल कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।

अमेरिका और ईरान के दावे आमने-सामने

होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को लेकर अमेरिका और ईरान के बयान एक-दूसरे से अलग हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी लागू है और जलमार्ग खुला है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका पहले से तय शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक स्ट्रेट को पूरी तरह से सामान्य नहीं किया जाएगा।

इस विरोधाभास के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। समुद्री यातायात में कमी और संभावित सैन्य टकराव की आशंका से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।

ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति

ट्रंप का रुख बताता है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर अधिक दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। बातचीत रोकने के साथ ही वॉशिंगटन तेहरान से समझौते के लिए स्पष्ट रियायतें चाहता है।

दूसरी ओर ईरान भी अपने रणनीतिक फायदे का इस्तेमाल कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव उसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थिति में रखता है। इसी कारण यह जलमार्ग अमेरिका-ईरान विवाद का सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होती, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल और गैस की कीमतों में तेजी से दुनिया के कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए परिवहन लागत भी बढ़ सकती है। इसके अलावा शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और वैश्विक व्यापार पर भी भू-राजनीतिक तनाव का असर पड़ने की आशंका है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की तत्काल बहाली की संभावना कम दिखाई दे रही है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर कायम हैं और होर्मुज स्ट्रेट विवाद को लेकर बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।

हालांकि, बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक दबाव के बीच भविष्य में कूटनीतिक बातचीत का रास्ता फिर खुल सकता है। लेकिन इसके लिए दोनों देशों को पहले होर्मुज स्ट्रेट, सैन्य गतिविधियों और संभावित परमाणु समझौते जैसे प्रमुख मुद्दों पर समझौते की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

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