Tvisha Sharma Death Case: मेडिकल बोर्ड ने बताया सुसाइडल हैंगिंग, शरीर पर नहीं मिले गंभीर चोट के निशान

Tvisha Sharma Death Case में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक मौत सुसाइडल हैंगिंग से हुई। जांच में शरीर पर किसी गंभीर चोट के निशान नहीं मिले हैं।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर एम्स के मेडिकल बोर्ड द्वारा किए गए दूसरे पोस्टमॉर्टम में त्विषा शर्मा की मौत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मेडिकल बोर्ड की जांच के मुताबिक, त्विषा की मौत सुसाइडल हैंगिंग के कारण हुई थी।

नई दिल्ली: एमपी हाईकोर्ट के निर्देश पर AIIMS के मेडिकल बोर्ड ने त्विषा शर्मा की मौत की दूसरी पोस्टमॉर्टम जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, मौत सुसाइडल हैंगिंग के कारण हुई और शरीर पर मारपीट या संघर्ष से जुड़े कोई महत्वपूर्ण चोट के निशान नहीं मिले। त्विषा शर्मा की मौत के मामले में AIIMS के मेडिकल बोर्ड की दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच को एक महत्वपूर्ण दिशा मिली है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने अपनी विस्तृत जांच में निष्कर्ष दिया है कि त्विषा शर्मा की मौत सुसाइडल हैंगिंग के कारण हुई थी। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शरीर पर ऐसा कोई मेडिकल-लीगल रूप से महत्वपूर्ण चोट का निशान नहीं मिला, जिससे मौत से पहले मारपीट, शारीरिक हमला या संघर्ष की पुष्टि होती हो। AIIMS के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में तैयार की गई रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया है। 

मेडिकल बोर्ड ने मौत से जुड़े विभिन्न संभावित पहलुओं का अध्ययन करने के बाद अपनी राय तैयार की। हालांकि, मामले की आपराधिक जांच और अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसी तथा न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे।

पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने की विस्तृत जांच

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद AIIMS में विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड में फॉरेंसिक मेडिसिन के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। टीम ने न सिर्फ दोबारा पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की, बल्कि उपलब्ध मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का भी विस्तृत विश्लेषण किया। मेडिकल बोर्ड ने करीब 11 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है। इसमें मौत के कारण के साथ-साथ यह भी जांचा गया कि घटना में आत्महत्या या हत्या की किसी संभावना के समर्थन में कोई मेडिकल साक्ष्य मौजूद है या नहीं।

जांच के दौरान शरीर पर मौजूद चोटों और अन्य संकेतों का फॉरेंसिक अध्ययन किया गया। बोर्ड के अनुसार, ऐसा कोई महत्वपूर्ण चोट का निशान सामने नहीं आया, जिसे मेडिकल-लीगल दृष्टि से संघर्ष या शारीरिक हमले से जोड़ा जा सके।

लिगेचर मटीरियल की भी हुई जांच

इस मामले में फांसी के लिए इस्तेमाल किए गए कथित लिगेचर मटीरियल को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट तैयार करते समय विशेषज्ञों ने इस सामग्री का बारीकी से परीक्षण किया। इसमें मेटल रिंग वाले जिमनास्टिक बेल्ट से जुड़े पहलू को भी जांच के दायरे में रखा गया। डॉ. सुधीर गुप्ता के अनुसार, बोर्ड ने निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक साहित्य तथा उपलब्ध फॉरेंसिक साक्ष्यों का अध्ययन किया। विशेषज्ञों ने विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं की समीक्षा करने के बाद लिगेचर मटीरियल से जुड़े सवालों पर अपनी राय तैयार की।

दूसरी पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया 24 मई को पूरी की गई थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड के सदस्यों ने कथित घटनास्थल का निरीक्षण भी किया। क्राइम सीन का अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे पोस्टमॉर्टम में सामने आए निष्कर्षों को घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों और अन्य साक्ष्यों से मिलाने में मदद मिल सकती थी।

बोर्ड ने लगभग एक महीने तक उपलब्ध वैज्ञानिक सामग्री, मेडिकल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक पहलुओं पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने सभी संभावित कोणों का अध्ययन करने के बाद अपनी अंतिम मेडिकल राय तैयार की।

Leave a comment