उड़ती राख से बिगड़ रही हवा, थर्मल प्लांट की लापरवाही से आमजन परेशान, कौन हैं जिम्मेदार?

झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल प्लांट से रोजाना उड़ती राख सड़क और हवा में फैल रही है, जिससे वायु प्रदूषण, आंखों में जलन और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

झालावाड़। कालीसिंध थर्मल प्लांट से निकल रही फ्लाइ ऐश इन दिनों सड़क से लेकर हवा तक को जहरीला बना रही है। कई किलोमीटर तक सड़क पर फैली राख से आमजन परेशान हैं, बाइक सवार घायल हो रहे हैं और वाहन चालकों की आंखों में धूल जा रही है। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से दूर हैं।

झालावाड़ में कालीसिंध थर्मल प्लांट से रोजाना करीब 4,000 मीट्रिक टन राख निकल रही है, जो लापरवाही के चलते सड़कों पर फैलकर गंभीर पर्यावरणीय खतरा बन गई है। कालीसिंध थर्मल से कपास्या कुआं तक फैली यह राख बाइक सवारों के फिसलने, वाहन चालकों की आँखों में धूल जाने और हवा की गुणवत्ता बिगड़ने का कारण बन रही है। कई जगहों पर गीली राख से दुर्घटनाएँ हो रही हैं, जबकि सूखी राख दिनभर गुबार बनकर लोगों की साँसों में घुल रही है। 

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को शिकायतें भेजी गईं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। पत्रिका टीम के निरीक्षण में ओवरलोड डंपर खुले में राख गिराते मिले, जिन पर तिरपाल तक नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है और स्वास्थ्य—सुरक्षा दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

थर्मल राख से सड़कें धुंधली

झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल प्लांट से रोजाना निकलने वाली फ्लाई ऐश और बॉटम ऐश सड़क-मार्गों पर गंभीर प्रदूषण और दुर्घटना का कारण बन रही है। करीब 4 हजार मीट्रिक टन राख प्रतिदिन निकलने के बावजूद डंपर और ट्रैक्टर क्षमता से अधिक भार लेकर बिना तिरपाल ढके सड़क पर राख फैलाते दिखाई दे रहे हैं। इससे न केवल वाहन चालकों की आंखों में जलन और दृश्यता कम हो रही है, बल्कि गीली राख पर फिसलकर कई लोग घायल भी हुए हैं। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

मुफ़्त राख का खेल, सड़कें बनीं खतरे का रास्ता

कालीसिंध थर्मल प्लांट से राख मुफ्त मिलने के कारण डंपर चालक तेज रफ्तार में क्षमता से अधिक लदा वाहन लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। 40 टन क्षमता वाले डंपर 50 टन से ज्यादा फ्लाई ऐश भरकर निकल रहे हैं, जिससे ब्रेक लगाते ही सड़क पर राख बिखर जाती है और दृश्यता व स्वास्थ्य दोनों को खतरा बढ़ रहा है। तय मार्ग तीनधार–मंडावर होते हुए एयरपोर्ट तक है, लेकिन अधिकांश चालक शॉर्टकट लेते हुए झालावाड़ शहर से गुजर रहे हैं, जिससे ब्रेकर और गड्ढों पर राख के ढेर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।

राहगीरों की बढ़ती परेशानी

स्थानीय लोगों ने खुले वाहनों से हो रहे राख परिवहन को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि थर्मल झालरापाटन से निकलने वाली फ्लाई ऐश हाईवे-52 और खानपुर मेगा हाईवे पर लगातार गिर रही है। इससे दुपहिया वाहन चालक धूल के बादल में राह तलाशते नजर आते हैं। सड़क किनारे बसे मास्टर कॉलोनी और तिलक नगर के लोगों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक हो गई है।

लोगों का कहना है कि वाहन गुजरते ही राख हवा में उड़कर वायु प्रदूषण को कई गुना बढ़ा रही है। इससे क्षेत्र में सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। नागरिकों ने मांग की है कि राख का परिवहन केवल बंद (केप्सूल) वाहनों से किया जाए, ताकि प्रदूषण को रोका जा सके और लोगों को राहत मिले।

 नागरिकों की स्पष्ट मांग

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कई बार शिकायतों के बावजूद खुले डंपरों का संचालन कम नहीं हुआ है। राख के उड़ने से घरों, दुकानों और राहगीरों पर लगातार असर पड़ता है। कॉलोनियों में रहने वालों का कहना है कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस धूल से प्रभावित हो रहा है।

आशीष और मोहित शर्मा (मंडल अध्यक्ष, झालावाड़ शहर) समेत कई लोगों ने जिला प्रशासन पर जोर दिया है कि इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक राख ढोने वाले डंपर पूरी तरह बंद ढंके नहीं होंगे, तब तक स्थिति में कोई सुधार संभव नहीं है।

प्रशासन की कार्यवाही का दावा

शिकायतों के बाद कालीसिंध थर्मल प्रबंधन ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने की बात कही है। अधिकारियों ने बताया कि जिस मार्ग से स्लरी और राख से भरे डंपर गुजरते हैं, वहां नियमित पानी का छिड़काव शुरू किया जाएगा, ताकि उड़ती धूल पर नियंत्रण रखा जा सके।

कालीसिंध थर्मल की चीफ इंजीनियर संगीता श्रृंगी ने कहा कि ओवरलोडिंग को लेकर भी सख्ती कर दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को पाबंद किया जा रहा है और आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि समस्या के समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

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