तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके (Dravida Munnetra Kazhagam) के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कोयंबटूर में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिससे राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया।
DMK: तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन पर तीखे हमले को लेकर विवादों में घिर गए हैं। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ डीएमके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई डर नहीं है, यहां तक कि अगर प्रधानमंत्री के पिता भी आ जाएं, तब भी नहीं।स्टालिन ने रविवार को कोयंबटूर में आयोजित डीएमके युवा विंग के कार्यक्रम में एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें बाहर करना होगा, जिन्हें 10 हार का सामना करना पड़ा है।
कोयंबटूर कार्यक्रम में दी गई टिप्पणी
उदयनिधि स्टालिन ने रविवार को डीएमके युवा विंग के कार्यक्रम में अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी को निशाना बनाते हुए कहा कि “हमें डीएमके को हराने में कोई डर नहीं है, चाहे प्रधानमंत्री आएं या उनके पिता।” उन्होंने अपने बयान में अन्नाद्रमुक की चुनावी विफलताओं को भी उजागर किया और कहा कि पलानीस्वामी को बाहर करना जरूरी है, जिन्हें 10 हार का सामना करना पड़ा है।
स्टालिन के इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। विपक्षी पार्टियों ने इसे व्यक्तिगत हमले के रूप में लिया और डीएमके के खिलाफ चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए।

बीजेपी का कड़ा पलटवार
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने डीएमके पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डीएमके “बुद्धिहीन, नैतिकताहीन और मर्यादाहीन” बन चुकी है। पूनावाला ने कहा कि पिछले सप्ताह इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और स्टालिन जूनियर के सनातन धर्म पर दिए गए बयान से यह साफ होता है कि डीएमके और उसके सहयोगी दल चुनावी हताशा में हैं।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि उदयनिधि स्टालिन के बयान में प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को निशाना बनाया गया है, जो राजनीति की मर्यादाओं के खिलाफ है। पूनावाला ने कहा, बिहार चुनावों में भी इंडिया गठबंधन ने व्यक्तिगत हमलों के माध्यम से विरोध प्रदर्शन किया था। अब डीएमके भी इसी रणनीति पर काम कर रही है।
चुनावी हताशा और राजनीतिक संकेत
बीजेपी के तेलंगाना अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि डीएमके की हताशा इसे प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां करने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने दावा किया कि डीएमके तमिलनाडु में अपनी पकड़ खो रही है और आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा-अन्नाद्रमुक गठबंधन राज्य में सरकार बनाने में सफल होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि डीएमके के राजनीतिक दबाव और बढ़ती असुरक्षा का संकेत भी है। इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो सकती हैं, क्योंकि विधानसभा चुनाव लगभग दो महीनों में होने की संभावना है।









