उज्जैन के सप्त सागर में सीवेज मिलने पर NGT सख्त, छह तालाबों का पानी नहाने लायक नहीं

उज्जैन के सप्त सागर में सीवेज मिलने पर NGT सख्त हुआ। जांच में छह तालाबों का पानी नहाने योग्य नहीं मिला। प्रशासन को प्रदूषण रोकने के निर्देश दिए गए।

उज्जैन के ऐतिहासिक सप्त सागर में प्रदूषण और सीवेज मिलने पर NGT ने नाराजगी जताई है। रिपोर्ट में छह तालाबों का पानी नहाने योग्य नहीं मिला। ट्रिब्यूनल ने नगर निगम और प्रशासन को सुधार के निर्देश दिए हैं।

उज्जैन: धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले सप्त सागर की खराब होती जल गुणवत्ता पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाया है। जांच में फिकल और टोटल कोलिफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। ट्रिब्यूनल ने बिना उपचार वाले पानी का प्रवाह रोकने, जल गुणवत्ता सुधारने और अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

सप्त सागर में प्रदूषण पर NGT की सख्ती

उज्जैन के ऐतिहासिक सप्त सागर जलाशयों की खराब होती स्थिति को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर नाराजगी जताई है। मामला धार्मिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये जलाशय उज्जैन की ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं।

NGT के समक्ष रखी गई रिपोर्टों में पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई। उपलब्ध जांच रिपोर्ट के अनुसार, सप्त सागर के कई जलाशयों में फिकल कोलिफॉर्म और टोटल कोलिफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। इससे पानी में सीवेज या बिना उपचार वाले गंदे पानी के पहुंचने की आशंका मजबूत हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक रत्नाकर सागर को छोड़कर बाकी छह तालाबों का पानी नहाने योग्य मानकों पर खरा नहीं उतरता। ऐसे में इन जलाशयों का धार्मिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

बिना ट्रीटमेंट पानी पहुंचने पर सवाल

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में पानी में फिकल कोलिफॉर्म की मौजूदगी की बात सामने आई। NGT ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए अधिकारियों से सवाल किया कि अगर पानी में इतनी मात्रा में कोलिफॉर्म मौजूद है तो इसके स्रोत का पता लगाने और उसे रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

ट्रिब्यूनल के पहले के आदेशों में भी उज्जैन के जलाशयों में बिना उपचार वाले पानी के प्रवाह को रोकने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। मई 2026 के आदेश में NGT ने पानी के नमूने लेकर सभी सप्त सागर की जल गुणवत्ता की जांच कराने और संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

सप्त सागर में रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णुसागर और पुरुषोत्तम सागर शामिल हैं। NGT ने इन जलाशयों की धार्मिक और पर्यावरणीय महत्ता को देखते हुए संरक्षण पर जोर दिया है।

अतिक्रमण हटाने और जल गुणवत्ता सुधारने के निर्देश

जल प्रदूषण के साथ-साथ सप्त सागर क्षेत्र में अतिक्रमण का मुद्दा भी लंबे समय से सामने आता रहा है। ट्रिब्यूनल के रिकॉर्ड के अनुसार, संयुक्त समिति ने जलाशयों के क्षेत्र का सीमांकन कर रिपोर्ट तैयार की थी। इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने और जलाशयों को सुरक्षित रखने की कार्रवाई को लेकर NGT ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

ट्रिब्यूनल ने उज्जैन नगर निगम और जिला प्रशासन को जलाशयों में बिना उपचार वाला पानी जाने से रोकने तथा अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है। साथ ही जल गुणवत्ता सुधारने के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।

सिंहस्थ से पहले बढ़ी जिम्मेदारी

उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को देखते हुए सप्त सागर की स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शहर में आने की संभावना के बीच धार्मिक जलाशयों की स्वच्छता और पर्यावरणीय सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

NGT ने भी अपने आदेशों में सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए सप्त सागर की जल गुणवत्ता और पवित्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अधिकारियों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीन पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है।

आगे की कार्रवाई में जलाशयों से प्रदूषण के स्रोत की पहचान, सीवेज का उपचार, अतिक्रमण हटाना और नियमित जल गुणवत्ता जांच प्रमुख मुद्दे रहेंगे। NGT की सख्ती के बाद अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इन ऐतिहासिक जलाशयों के संरक्षण के लिए समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करे।

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