हर साल 10 अगस्त को विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य जैव ईंधन के उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। भारत में यह दिवस ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सतत विकास से भी जुड़ा है।
असम: असम के जोरहाट की 17 वर्षीय कराटे खिलाड़ी जनमोनी कोंवर ने मुश्किल हालात के बीच बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 20वीं ऑल इंडिया इंडिपेंडेंस कप कराटे चैंपियनशिप 2026 में जनमोनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दिल्ली में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने अपने तीनों मुकाबले जीते और फाइनल मुकाबले में 10-2 के प्रभावशाली अंतर से जीत दर्ज की। जनमोनी की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि प्रतियोगिता से कुछ ही सप्ताह पहले असम में आई विनाशकारी बाढ़ ने उनके परिवार और प्रशिक्षण व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया था। बाढ़ के कारण उनका घर और ट्रेनिंग ग्राउंड तबाह हो गया था। परिवार को सुरक्षित स्थान की तलाश में राहत शिविर में जाना पड़ा। इसके बावजूद जनमोनी ने अपने खेल अभ्यास और लक्ष्य को नहीं छोड़ा।
बाढ़ में घर और ट्रेनिंग ग्राउंड गंवाया
जनमोनी कोंवर की कहानी केवल एक खेल उपलब्धि की कहानी नहीं है, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों के बीच हौसला बनाए रखने की मिसाल भी है। असम में आई बाढ़ ने उनके परिवार की जिंदगी को अचानक बदल दिया। बाढ़ के पानी ने उनका घर प्रभावित किया और जिस जगह वह कराटे का अभ्यास करती थीं, वह भी नष्ट हो गया।
ऐसे समय में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार की सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना थी। परिवार को राहत शिविर में रहना पड़ा। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद जनमोनी ने खेल से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा। उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए तैयारी जारी रखी।
दिल्ली में तीनों मुकाबलों में दर्ज की जीत
जनमोनी ने दिल्ली में आयोजित 20वीं ऑल इंडिया इंडिपेंडेंस कप कराटे चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने अपने तीनों मुकाबलों में जीत हासिल की। फाइनल मुकाबले में उनका प्रदर्शन सबसे ज्यादा प्रभावशाली रहा, जहां उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 10-2 के स्कोर से हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।
कम समय में सामने आई व्यक्तिगत और पारिवारिक परेशानियों के बावजूद प्रतियोगिता में इस तरह का प्रदर्शन जनमोनी की मानसिक मजबूती को दर्शाता है। उनके लिए यह पदक केवल एक प्रतियोगिता की जीत नहीं, बल्कि बाढ़ से पैदा हुई मुश्किल परिस्थितियों पर उनकी व्यक्तिगत जीत के रूप में भी देखा जा रहा है।
ओलंपिक के सपने को रखा जिंदा
जनमोनी कोंवर का लक्ष्य सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना नहीं है। वह अपने खेल करियर को आगे बढ़ाते हुए ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखती हैं। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के कारण पैदा हुई परेशानियों के बीच भी उन्होंने इस सपने को खत्म नहीं होने दिया।
खेलों में सफलता के लिए लगातार अभ्यास, बेहतर प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और मानसिक दृढ़ता की जरूरत होती है। जनमोनी की स्थिति में इन चुनौतियों के साथ परिवार और प्रशिक्षण से जुड़ी अतिरिक्त मुश्किलें भी सामने आईं। इसके बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में उतरकर अपने प्रदर्शन से साबित किया कि परिस्थितियां कठिन हो सकती हैं, लेकिन लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें पार करने की ताकत दे सकती है।
असम की बाढ़ फिर बनी बड़ी चुनौती
जनमोनी की उपलब्धि ऐसे समय सामने आई है जब असम एक बार फिर बाढ़ की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ लंबे समय से लोगों के लिए बड़ी चुनौती रही है। हर साल भारी बारिश और नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित होते हैं।
बाढ़ के कारण घरों के साथ-साथ सड़क, कृषि भूमि, स्कूल और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचता है। कई परिवारों को कुछ समय के लिए राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ती है। जनमोनी का परिवार भी इसी संकट से प्रभावित हुआ और उन्हें अपना घर छोड़कर राहत शिविर में जाना पड़ा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने वैज्ञानिक समाधान पर दिया जोर
इसी बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राज्य की बाढ़ समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत पर जोर दिया है। दरांग जिले के बाढ़ प्रभावित मंगलदोई क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि असम की बाढ़ को केवल राष्ट्रीय समस्या घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान विकसित करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य लंबे समय से बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंधों और जियो-बैग जैसे उपायों पर निर्भर रहा है। हालांकि, उनके मुताबिक असम को बाढ़ से निपटने के लिए एक व्यापक वैज्ञानिक व्यवस्था की आवश्यकता है, जिससे हर साल होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
IIT और विश्वविद्यालयों से मांगे गए व्यावहारिक सुझाव
बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने देश और राज्य के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से विशेषज्ञ समाधान तैयार करने की अपील की। उन्होंने IITs, IIMs, डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी और गौहाटी यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों से व्यावहारिक सुझाव देने की जरूरत बताई।
ऐसे सुझावों को केंद्र सरकार के सामने रखा जा सकता है, ताकि बाढ़ प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक योजनाओं पर काम किया जा सके। इसका उद्देश्य केवल बाढ़ आने के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को पहले से कम किया जा सके।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए खेल का संघर्ष भी चुनौती
प्राकृतिक आपदा के दौरान आम परिवारों के सामने सबसे पहले घर, भोजन, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें होती हैं। ऐसे में किसी युवा खिलाड़ी के लिए अपने प्रशिक्षण और प्रतियोगिता की तैयारी जारी रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जनमोनी की कहानी इस बात को सामने लाती है कि प्राकृतिक आपदाओं का असर केवल लोगों के घरों और संपत्ति तक सीमित नहीं रहता। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और युवाओं के भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ सकता है। उनके मामले में बाढ़ ने प्रशिक्षण स्थल और घर दोनों को प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने खेल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।
गोल्ड मेडल ने बढ़ाई उम्मीद
ऑल इंडिया इंडिपेंडेंस कप में स्वर्ण पदक जीतकर जनमोनी ने अपने परिवार और असम के खेल जगत के लिए नई उम्मीद पैदा की है। तीनों मुकाबलों में जीत और फाइनल में 10-2 का स्कोर उनकी क्षमता को दर्शाता है।
उनकी उपलब्धि उन युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जिन्हें आर्थिक, प्राकृतिक या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अपने खेल के सफर में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जनमोनी ने दिखाया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है।
अब आगे की नजर बड़े मंच पर
राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद जनमोनी के सामने अब अपने खेल को और मजबूत करने की चुनौती होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें लगातार उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं, बेहतर प्रशिक्षण और फिटनेस पर काम करना होगा। उनका ओलंपिक सपना लंबा सफर है, लेकिन दिल्ली में मिली यह जीत उस सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर है। बाढ़ से प्रभावित परिवार की 17 वर्षीय खिलाड़ी का राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतना असम के लिए खेल और संघर्ष, दोनों मोर्चों पर एक सकारात्मक कहानी सामने लाता है।
जनमोनी कोंवर की उपलब्धि यह संदेश देती है कि मुश्किल परिस्थितियां किसी खिलाड़ी के रास्ते में बड़ी बाधा जरूर बन सकती हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति समर्पण उन्हें पार करने की ताकत दे सकता है। एक ओर जहां असम स्थायी बाढ़ समाधान की तलाश में है, वहीं जनमोनी जैसी युवा प्रतिभाएं राज्य के लिए उम्मीद और प्रेरणा की नई तस्वीर पेश कर रही हैं।











