ब्रिटेन के क्लैक्टन उपचुनाव में ‘कूड़ेदान’ वाला उम्मीदवार, नाइजेल फराज के खिलाफ उतरे काउंट बिनफेस

ब्रिटेन के क्लैक्टन उपचुनाव में काउंट बिनफेस कूड़ेदान जैसी पोशाक में प्रचार कर रहे हैं। वह नाइजेल फराज के खिलाफ मैदान में हैं और सस्ते घर का वादा कर रहे हैं।

ब्रिटेन के क्लैक्टन उपचुनाव में काउंट बिनफेस ने अपने अनोखे प्रचार से सबका ध्यान खींचा है। कूड़ेदान जैसी पोशाक पहनकर चुनाव लड़ रहे जॉन हार्वे नाइजेल फराज के खिलाफ मैदान में हैं। वह हर नागरिक को सस्ता घर देने का वादा कर रहे हैं।

लंदन: ब्रिटेन के क्लैक्टन उपचुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान कूड़ेदान जैसी पोशाक पहनने वाले और खुद को एलियन बताने वाले उम्मीदवार काउंट बिनफेस ने मुकाबले को खासा दिलचस्प बना दिया है। वह रिफॉर्म यूके के प्रमुख नेता नाइजेल फराज के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।

काउंट बिनफेस अपने अनोखे चुनावी अंदाज, व्यंग्यात्मक प्रचार और असामान्य वादों की वजह से सोशल मीडिया और ब्रिटिश चुनावी चर्चा में सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनका दावा है कि चुनाव का अंतिम नतीजा चाहे जो हो, उनके लिए किसी भी स्थिति में जीत होगी। वह मतदाताओं से हर नागरिक के लिए सस्ता घर उपलब्ध कराने जैसे वादे भी कर रहे हैं।

हालांकि, चुनावी आंकड़ों और पिछले प्रदर्शन को देखते हुए काउंट बिनफेस के लिए सीट जीतना बेहद मुश्किल माना जा रहा है। उनका मुख्य लक्ष्य बड़ी संख्या में वोट हासिल करना और अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराना बताया जा रहा है।

कौन हैं काउंट बिनफेस?

काउंट बिनफेस वास्तव में एक राजनीतिक किरदार है, जिसे 46 वर्षीय लेखक और कॉमेडियन जॉन हार्वे निभाते हैं। हार्वे इससे पहले भी अलग-अलग काल्पनिक नामों और किरदारों के साथ ब्रिटेन के चुनावों में उम्मीदवार रह चुके हैं।

उनका चुनावी अंदाज पारंपरिक राजनीतिक प्रचार से बिल्कुल अलग है। कूड़ेदान जैसी पोशाक और चेहरे को ढकने वाली पहचान के साथ प्रचार करने के कारण वह मतदाताओं और मीडिया का ध्यान खींचते हैं।

हार्वे ने पहली बार 2017 के ब्रिटिश आम चुनाव में ‘लॉर्ड बकेटहेड’ नाम के किरदार के रूप में चुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री थेरेसा मे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरकर काफी सुर्खियां हासिल की थीं।

बाद में इस किरदार के नाम को लेकर कॉपीराइट विवाद सामने आया और हार्वे को ‘लॉर्ड बकेटहेड’ नाम का इस्तेमाल बंद करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने एक नया राजनीतिक किरदार तैयार किया।

2018 में सामने आया काउंट बिनफेस

लॉर्ड बकेटहेड के बाद जॉन हार्वे ने 2018 में ‘काउंट बिनफेस’ नाम के किरदार को चुनावी राजनीति में पेश किया। नया नाम भी व्यंग्य और हास्य पर आधारित था।

‘काउंट’ ब्रिटिश राजशाही और अभिजात वर्ग से जुड़ी एक उपाधि है, जबकि ‘बिन’ का इस्तेमाल ब्रिटेन में कूड़ेदान के लिए किया जाता है। इस तरह ‘काउंट बिनफेस’ का मोटे तौर पर अर्थ कूड़ेदान जैसे चेहरे वाला काउंट समझा जा सकता है।

यह किरदार ब्रिटेन की चुनावी राजनीति में व्यंग्यात्मक विरोध की एक शैली को दर्शाता है, जिसमें उम्मीदवार गंभीर राजनीतिक बहस के साथ हास्य और असामान्य प्रचार का इस्तेमाल करके जनता का ध्यान आकर्षित करते हैं।

बोरिस जॉनसन के खिलाफ भी लड़ चुके हैं चुनाव

काउंट बिनफेस का चुनावी सफर केवल क्लैक्टन उपचुनाव तक सीमित नहीं है। उन्होंने 2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

इसके बाद वह 2021 और 2024 के लंदन मेयर चुनावों में भी उम्मीदवार रहे। इसके अलावा 2023 के उपचुनाव, 2024 के आम चुनाव और 2026 के एक अन्य उपचुनाव में भी उन्होंने हिस्सा लिया।

इन चुनावों में उनका उद्देश्य पारंपरिक राजनीतिक दलों को चुनौती देने के साथ-साथ राजनीतिक व्यवस्था पर व्यंग्य करना और मतदाताओं का ध्यान वैकल्पिक मुद्दों की ओर खींचना रहा है।

सस्ते घर का वादा क्यों चर्चा में है?

क्लैक्टन उपचुनाव के दौरान काउंट बिनफेस अपने कई असामान्य वादों को लेकर चर्चा में हैं। इनमें सबसे प्रमुख हर नागरिक के लिए सस्ता घर उपलब्ध कराने का वादा है।

ब्रिटेन में लंबे समय से आवास की कीमत और किराए का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। ऐसे में काउंट बिनफेस ने भी इस मुद्दे को अपने चुनाव प्रचार में शामिल किया है, हालांकि उनका प्रचार पारंपरिक राजनीतिक अभियानों की तुलना में ज्यादा व्यंग्यात्मक और मनोरंजक अंदाज में है।

उनके अभियान में गंभीर सामाजिक मुद्दों को हास्य और असामान्य प्रस्तुति के साथ मतदाताओं तक पहुंचाने की कोशिश दिखाई देती है।

क्या नाइजेल फराज को हरा पाएंगे?

काउंट बिनफेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाइजेल फराज हैं। फराज पहले भी क्लैक्टन सीट से सांसद रह चुके हैं और पिछले चुनाव में उन्हें लगभग 46 प्रतिशत वोट मिले थे।

हालिया सर्वेक्षणों में फराज की स्थिति और मजबूत बताई जा रही है। उपलब्ध अनुमान के अनुसार उन्हें करीब 73 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। ऐसे में काउंट बिनफेस के लिए सीट जीतना फिलहाल बेहद कठिन दिखाई देता है।

इसके अलावा ब्रिटेन की प्रमुख पार्टियों में शामिल लेबर, कंजर्वेटिव और लिबरल डेमोक्रेट्स ने इस उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा है। इससे फराज की स्थिति और मजबूत हो गई है।

उपचुनाव में 33 उम्मीदवार मैदान में

क्लैक्टन उपचुनाव में काउंट बिनफेस और नाइजेल फराज के अलावा भी बड़ी संख्या में उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। कुल 33 उम्मीदवारों के मैदान में होने से मुकाबला बहुकोणीय बन गया है।

हालांकि, राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चा फराज और काउंट बिनफेस को लेकर हो रही है। फराज के पास पहले से मजबूत राजनीतिक आधार है, जबकि काउंट बिनफेस अपने अनोखे प्रचार और व्यंग्यात्मक शैली के कारण मतदाताओं का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

काउंट बिनफेस की लोकप्रियता को केवल चुनाव जीतने के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। उनके लिए वोट प्रतिशत भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

5 प्रतिशत वोट हासिल करना भी बड़ी उपलब्धि

ब्रिटेन के चुनावी नियमों के तहत काउंट बिनफेस के लिए सीट जीतना भले ही मुश्किल हो, लेकिन अगर वह पर्याप्त वोट हासिल करते हैं तो इसे उनके अभियान की सफलता माना जा सकता है।

क्लैक्टन उपचुनाव में यदि उन्हें कम से कम 5 प्रतिशत वोट मिलते हैं, तो उनकी 500 पाउंड की जमा राशि वापस हो जाएगी। इसलिए उनके लिए यह चुनाव सिर्फ सांसद बनने की कोशिश नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक पहचान को मजबूत करने का अवसर भी है।

अब तक उनके चुनावी सफर में सबसे बेहतर प्रदर्शन 2021 के लंदन मेयर चुनाव में रहा, जहां उन्हें लगभग 1 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे में 5 प्रतिशत या उससे अधिक वोट हासिल करना उनके लिए पिछली तुलना में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

व्यंग्यात्मक राजनीति का अलग चेहरा

काउंट बिनफेस जैसे उम्मीदवार ब्रिटेन की चुनावी राजनीति में व्यंग्य और राजनीतिक हास्य की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। ऐसे उम्मीदवार आमतौर पर चुनाव जीतने की पारंपरिक रणनीति के बजाय राजनीतिक व्यवस्था और मुख्यधारा के दलों पर व्यंग्य करने के लिए चुनाव मैदान का इस्तेमाल करते हैं।

उनकी पोशाक, नाम और प्रचार शैली मतदाताओं का ध्यान आकर्षित करती है। हालांकि, उनके अभियान में उठाए गए कुछ मुद्दे वास्तविक सामाजिक समस्याओं से जुड़े हैं, जिनमें आवास और जीवन-यापन की लागत जैसे विषय शामिल हैं।

क्लैक्टन उपचुनाव का नतीजा चाहे जो हो, काउंट बिनफेस ने अपने अनोखे प्रचार के जरिए मुकाबले में अलग पहचान जरूर बनाई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने पिछले चुनावी प्रदर्शन को कितना बेहतर कर पाते हैं और क्या 5 प्रतिशत वोट हासिल करने का लक्ष्य पूरा कर पाते हैं।

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